ग्रीनलैंड पर 'कब्जे' की ट्रंप की जिद के खिलाफ यूरोपीय देशों ने खोला मोर्चा, EU भी झटका देने की तैयारी में

व्हाइट हाउस में अहम बैठक से पहले ट्रंप ने बुधवार को फिर कहा कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कंट्रोल से कम उन्हें कुछ मंजूर नहीं. उधर डेनमार्क के बाद अब फ्रांस ने चेतावनी दै दी है कि ग्रीनलैंड की संप्रभुता से खिलवाड़ के अभूतपूर्व विनाशकारी नतीजे होंगे.

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  • अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फिर से कहा है कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कंट्रोल से कम उन्हें कुछ मंजूर नहीं है
  • फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि किसी यूरोपीय की संप्रभुता प्रभावित होती है तो अभूतपूर्व परिणाम होंगे
  • फ्रांस इस मुद्दे पर जर्मनी और ब्रिटेन के साथ भी संपर्क में है ताकि साझा यूरोपीय मोर्चा तैयार किया जा सके
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ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेताबी बढ़ती जा रही है. किसी भी कीमत पर ग्रीनलैंड को हासिल करने के उनके ऐलान ने विश्व राजनीति में नया भूचाल पैदा कर दिया है. बुधवार को ट्रंप ने फिर दोहराया कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कंट्रोल से कम उन्हें कुछ मंजूर नहीं. ट्रंप के इस फैसले के खिलाफ अब यूरोपीय देश मुखर होने लगे है. डेनमार्क के बाद अब फ्रांस ने साफ चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड की संप्रभुता से खिलवाड़ के अभूतपूर्व विनाशकारी नतीजे होंगे. यूरोपीय संघ भी अमेरिका से ट्रेड डील को फ्रीज करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है.

ग्रीनलैंड से कम कुछ मंजूर नहीं, बोले ट्रंप

ग्रीनलैंड को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने के लिए कांग्रेस में विधेयक पेश होने के अगले ही दिन ट्रंप ने दोहराया कि राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत करने के लिए ग्रीनलैंड बहुत जरूरी है. इसे संभव बनाने के लिए नाटो को आगे आकर पहल करनी चाहिए. अगर ऐसा नहीं किया गया तो रूस या चीन इस पर कब्जा कर लेंगे और ये हम होने नहीं देंगे. ट्रंप ने आगे कहा कि ग्रीनलैंड के अमेरिका के हाथों में आने से नाटो कहीं ज्यादा ताकतवर और प्रभावी बन जाएगा. इससे कम उन्हें कुछ मंजूर नहीं है. ट्रंप पहले कह चुके हैं कि ग्रीनलैंड को लेने के लिए उन्हें ताकत का इस्तेमाल करना पड़ा तो वो भी करेंगे. 

ये भी देखें- ग्रीनलैंड पर कब्जे का रास्ता साफ! ट्रंप का एक्शन प्लान तैयार, अमेरिकी संसद की मुहर लगाने की तैयारी

फ्रांस ने कहा, अभूतपूर्व परिणाम होंगे

उधर ट्रंप के इस कदम के खिलाफ यूरोप का प्रमुख देश फ्रांस खुलकर सामने आ गया है. फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बुधवार को कैबिनेट बैठक के दौरान बेहद सख्त लहजे में कहा कि अगर किसी यूरोपीय और सहयोगी देश की संप्रभुता प्रभावित होती है तो इसके अभूतपूर्व व्यापक परिणाम होंगे. मैक्रों ने डेनमार्क और उसकी संप्रभुता के प्रति पूर्ण एकजुटता जाहिर करते हुए कहा कि उनकी हालात पर पूरी नजर है. हम बयानों को हल्के में नहीं ले रहे हैं. 

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जर्मनी-ब्रिटेन को साथ लाने में जुटा फ्रांस

इससे पहले, फ्रांस के विदेश मंत्री जीन नोएल बैरो ने तो यहां तक कह दिया कि अमेरिका को ग्रीनलैंड के मुद्दे पर डेनमार्क को ब्लैकमेल करना बंद कर देना चाहिए. ग्रीनलैंड और डेनमार्क अपनी जमीन अमेरिका को बेचने से साफ इनकार कर चुके हैं. फ्रांस इस मुद्दे पर जर्मनी और ब्रिटेन के साथ भी लगातार संपर्क में है ताकि ट्रंप के खिलाफ साझा यूरोपीय मोर्चा तैयार किया जा सके.

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ट्रेड डील रद्द करने पर विचार कर रहा EU

ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की धमकियों के विरोध में ब्रसेल्स में यूरोपीय संसद के सदस्य अमेरिका के साथ होने वाली ट्रेड डील को ठंडे बस्ते में डालने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं. सांसदों का एक समूह चाहता है कि जब तक अमेरिका ग्रीनलैंड पर अपना दावा नहीं छोड़ता, तब तक अमेरिकी वस्तुओं पर आयात शुल्क घटाने के कानून पर रोक लगा दी जाए. यूरोपीय संसद के 23 सांसदों ने ईयू असेंबली प्रेसिडेंट रोबर्टा मेटसोला को लेटर लिखकर अमेरिका से हर तरह सहयोग को तुरंत फ्रीज करने की मांग की है. हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसा किया गया तो ट्रंप नाराज होकर यूरोपीय उत्पादों पर और ज्यादा टैरिफ लगा सकते हैं, जिससे भीषण ट्रेड वॉर शुरू हो सकता है.

ग्रीनलैंड के पीछे क्यों पड़े हैं ट्रंप?

  • ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है. करीब 57 हजार की आबादी वाले इस द्वीप को ट्रंप 2019 में भी खरीदने की पेशकश कर चुके हैं, लेकिन डेनमार्क का साफ कहना है कि वह बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं है.
  • ग्रीनलैंड में दुर्लभ खनिज और विशाल गैस भंडार होने का अनुमान है. यूरोपीय यूनियन यहां 25 से 34 मिनरल्स होने की पुष्टि कर चुकी है. यही वजह है कि चीन और पश्चिमी देश यहां दिलचस्पी दिखा रहे हैं.
  • ग्रीनलैंड अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के करीब है. ये आर्कटिक द्वीप सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ऐसी जगह पर स्थित है जो इसे अमेरिका ही नहीं, कनाडा और रूस के लिए भी अहम बनाता है. 
  • ग्रीनलैंड पर अमेरिका का एक बड़ा एक्टिव मिलिट्री बेस है. शीत युद्ध के दौरान भी अमेरिका ने इसका इस्तेमाल किया था. यहां मौजूद थुले एयर बेस अमेरिका की मिसाइल डिफेंस और आर्कटिक मॉनिटरिंग में अहम भूमिका निभाता है. 

ग्रीनलैंड के पीएम बोले, ये वक्त जुआ खेलने का नहीं

इस बीच ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स फ्रेडरिक नील्सन ने साफ कर दिया है कि उनका द्वीप बिकाऊ नहीं है. उन्होंने बुधवार को कहा कि जब कोई दूसरा देश हमारी जमीन हथियाने की बात कर रहा हो, तो यह वक्त आत्मनिर्णय के अधिकार के साथ जुआ खेलने का नहीं है. नील्सन ने दोटूक कहा कि अगर ग्रीनलैंड को डेनमार्क या अमेरिका में से किसी एक को चुनना पड़ा तो वो हमेशा डेनमार्क को ही चुनेंगे. 

व्हाइट हाउस में होनी है अहम बैठक 

उनका ये बयान व्हाइट हाउस में अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच उच्चस्तरीय बैठक से ठीक पहले आया है. इस बैठक में तीनों देशों के विदेश मंत्री और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस मौजूद रहेंगे. डेनमार्क और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्रियों ने ट्रंप के फैसले का एकजुट होकर विरोध किया है. डेनमार्क के रक्षा मंत्री ने तो कह दिया है कि वह ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य मौजूदगी को और मजबूत करेंगे. वह इस मामले को लेकर नाटो सहयोगियों के भी संपर्क में हैं.

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