'प्रदर्शनकारियों को हमने भेजी थी बंदूकें, लगता है कुर्द विद्रोही खुद डकार गए...', ईरान को लेकर ट्रंप ने कबूली ये बात

ईरान में आर्थिक असंतोष से शुरू हुए प्रदर्शनों ने राजनीतिक रूप लिया, जहां जनता ने इस्लामी शासन के विरोध में आवाज उठाई.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा करते हुए स्वीकार किया है कि अमेरिका ने ईरान में शासन विरोधी प्रदर्शनकारियों को हथियारों की सप्लाई की थी. हालांकि, ट्रंप का मानना है कि ये हथियार उन हाथों तक नहीं पहुंचे जिनके लिए भेजे गए थे. ट्रंप ने कहा कि हथियारों की यह खेप कुर्द चैनलों के माध्यम से भेजी गई थी, लेकिन लगता है कि कुर्दों ने उन्हें अपने पास ही रख लिया.

ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा, "हमने उन्हें बहुत सारी बंदूकें भेजीं. हमने उन्हें कुर्दों के जरिए भेजा था और मुझे लगता है कि कुर्दों ने उन्हें रख लिया. हमने प्रदर्शनकारियों के लिए बड़ी तादाद में हथियार भेजे थे, लेकिन मेरा मानना है कि कुर्दों ने वे हथियार छीन लिए या दबा दिए." 

राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तेहरान को लेकर तनाव अपने चरम पर है. ईरान में अशांति की शुरुआत 28 दिसंबर 2025 को हुई थी, जब ईरानी मुद्रा (रियाल) में भारी गिरावट दर्ज की गई.

आसमान छूती महंगाई, सरकारी कुप्रबंधन और बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया था. इसकी शुरुआत तेहरान के ऐतिहासिक 'ग्रैंड बाजार' से हुई थी, जहां दुकानदारों ने हड़ताल कर अपनी दुकानें बंद कर दीं. देखते ही देखते यह विरोध प्रदर्शन पूरे देश में फैल गया और लोग सड़कों पर उतर आए थे.

शुरुआत में यह विरोध आर्थिक मुद्दों पर था, लेकिन जल्द ही इसने राजनीतिक मोड़ ले लिया. प्रदर्शनकारी अब केवल सुधार नहीं, बल्कि 'इस्लामिक रिपब्लिक' व्यवस्था के खात्मे और एक नई शासन प्रणाली की मांग करने लगे. सड़कों पर उतरे हजारों लोगों ने सीधे तौर पर सत्ता परिवर्तन का नारा बुलंद किया, जिससे ईरान की सरकार हिल गई.

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हिंसा का खौफनाक मंजर 

इस विद्रोह को कुचलने के लिए ईरानी सुरक्षा बलों बल प्रयोग किया. 17 जनवरी को एक सार्वजनिक संबोधन में तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने स्वीकार किया था कि हजारों लोग मारे गए हैं.

गौर करने वाली बात यह है कि इस बयान के कुछ हफ्तों बाद, 28 फरवरी को खुद खामेनेई की भी मौत हो गई. इसके बाद अमेरिका और इजरायल ने भी ईरान के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया है.

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कौन हैं कुर्द और ईरान के साथ उनका विवाद क्या है?

कुर्द मध्य पूर्व का एक ऐसा जातीय समूह है जिसका अपना कोई स्वतंत्र देश नहीं है. दुनिया भर में इनकी आबादी 2.5 करोड़ से 4.5 करोड़ के बीच मानी जाती है. ये मुख्य रूप से ईरान, तुर्किए, इराक, सीरिया और आर्मेनिया के पहाड़ी इलाकों में बसे हुए हैं. ईरान की कुल जनसंख्या में कुर्दों की हिस्सेदारी लगभग 10 प्रतिशत है, जो मुख्य रूप से सुन्नी मुस्लिम हैं.

1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से ही कुर्द समुदाय और तेहरान की शिया बहुल सरकार के बीच टकराव रहा है. कुर्द अक्सर अपनी राजनीतिक स्वायत्तता, सांस्कृतिक पहचान और भाषाई अधिकारों की मांग करते आए हैं. 1980 और 90 के दशक में कुर्दों के सशस्त्र विद्रोह को ईरान ने बड़ी बेरहमी से दबाया था. इसके बाद कई कुर्द नेता और लड़ाके इराक के उत्तरी इलाकों में शरण लेने को मजबूर हुए.

ईरान के भीतर कुर्द प्रतिरोध को मजबूती देने के लिए 2004 में 'कुर्दिस्तान फ्री लाइफ पार्टी' (PJAK) का गठन किया गया था. इस संगठन का मुख्य उद्देश्य ईरानी शासन के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष छेड़ना है. तब से लेकर अब तक, यह समूह ईरान-इराक सीमा पर बने अपने ठिकानों से ईरानी सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमले करता रहा है.

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