आपकी सांसों से बनेगा फ्यूल और उससे उड़ेंगे हवाई जहाज! चीनी वैज्ञानिकों की यह खोज भविष्य बदल सकती है

Renewable Energy: नई टेक्नोलॉजी न सिर्फ प्रदूषण कम कर सकती है, बल्कि महंगे ईंधन का सस्ता और साफ विकल्प भी दे सकती है. जब दुनिया में तेल और गैस की कीमतें और उससे पैदा होने वाली पर्यावरण की चिंता लगातार बढ़ रही है, तब यह खोज बहुत बड़ी मानी जा रही है.

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कार्बन डाइऑक्साइड से जेट फ्यूल बनाने को तैयार चीन के वैज्ञानिक (प्रतिकात्मक फोटो)
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  • चीनी वैज्ञानिकों ने कार्बन डाइऑक्साइड से जेट ईंधन बनाने की नई औद्योगिक तकनीक विकसित की है
  • इस प्रक्रिया में कार्बन गैस को पानी और ऊर्जा की मदद से लिक्विड फ्यूल में बदला जाता है
  • वैज्ञानिकों ने लोहे आधारित कैटेलिस्ट बनाया जो उच्च तापमान और दबाव पर स्थिरता के साथ काम करता है
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अब हवा में मौजूद गंदी गैस से हवाई जहाज का ईंधन (फ्यूल) बनाया जा सकता है- यह बात आपको सुनने में अजीब भले लगे, लेकिन चीन के वैज्ञानिकों ने इसे सच कर दिखाया है. यह नई टेक्नोलॉजी न सिर्फ प्रदूषण कम कर सकती है, बल्कि महंगे ईंधन का सस्ता और साफ विकल्प भी दे सकती है. जब दुनिया में तेल और गैस की कीमतें और उससे पैदा होने वाली पर्यावरण की चिंता लगातार बढ़ रही है, तब यह खोज बहुत बड़ी मानी जा रही है. अगर यह बड़े स्तर पर सफल होती है, तो आने वाले समय में जहाज उड़ाने का तरीका ही बदल सकता है और कार्बन गैस भी काम की चीज बन जाएगी. चलिए आपको बताते हैं कि चीनी वैज्ञानिकों ने क्या खोज की है.

कार्बन डाइऑक्साइड से जेट फ्यूल तक का सफर

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार चीनी साइंस एकेडमी के शंघाई एडवांस्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक टीम ने कार्बन डाइऑक्साइड को जेट फ्यूल में बदलने का औद्योगिक तरीका पेश किया है.  उनकी स्टडी 15 अप्रैल को एसीएस कैटालिसिस में प्रकाशित हुई. इसमें बताया गया है कि कार्बन डाइऑक्साइड को सीधे लंबे केमिकल चेन में बदला जा सकता है, जिससे जेट फ्यूल बनाया जाता है.

यह प्रक्रिया ऐसे काम करती है जैसे जलने की प्रक्रिया को उल्टा कर दिया गया हो. इसमें बेकार गैस पानी के साथ मिलती है और फिर एक रिएक्शन के जरिए उसे ऊर्जा से भरपूर लिक्विड फ्यूल में बदल दिया जाता है. कई सालों से इस तकनीक में दो बड़ी दिक्कतें थीं- पहला कि कार्बन की लंबी चेन बनाना मुश्किल था और दूसरा कि सही तरह के केमिकल तैयार करना भी आसान नहीं था.

इन समस्याओं को हल करने के लिए वैज्ञानिकों ने लोहे पर आधारित एक खास कैटेलिस्ट बनाया, जिसमें पोटैशियम और एल्युमिनियम मिलाए गए. रिएक्शन के दौरान यह कैटेलिस्ट एक खास जगह बनाता है जहां दो अलग मटेरियल मिलते हैं. यही जगह रिएक्शन को तेज करती है और सही साइज के अणु (मॉलेक्यूल) बनाने में मदद करती है.

रिजल्ट क्या मिला

परिणाम काफी अच्छे रहे. सिर्फ 330 डिग्री सेल्सियस तापमान और सामान्य दबाव पर यह कैटेलिस्ट हर घंटे प्रति ग्राम 453.7 मिलीग्राम भारी ओलेफिन बनाता है, जो लिक्विड फ्यूल के बेसिक हिस्से होते हैं. इनमें से 252.7 मिलीग्राम सीधे जेट फ्यूल में बदले जा सकते हैं. और भी अहम बात यह है कि यह कैटेलिस्ट 800 घंटे तक लगातार काम करता रहा और उसका प्रदर्शन स्थिर रहा. इससे पता चलता है कि यह तकनीक अब लैब से निकलकर फैक्ट्री में इस्तेमाल के लिए तैयार हो सकती है.

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साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार सोमवार को चीनी साइंस एकेडमी ने कहा कि यह स्टडी ज्यादा कार्बन वाले ओलेफिन और जेट फ्यूल बनाने का आसान और बहुत असरदार तरीका देती है. बता दें कि चीन में इस तरह के फ्यूल को बड़े स्तर पर बनाने की कोशिशें शुरू हो चुकी हैं. फाइनमैन डायनामिक्स नाम की कंपनी ने अक्टूबर में इनर मंगोलिया की सरकार के साथ एक समझौता किया है. इस प्रोजेक्ट के तहत हर साल 3,000 टन टिकाऊ जेट फ्यूल बनाया जाएगा, जो बिजली की मदद से तैयार किया जाएगा.

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