250 रोहिंग्या को तस्करी करके ले जा रहे थे, समुद्र में डूबी नाव, बचे शख्स ने बताई दिल दहला देने वाली कहानी

अंडमान सागर में रोहिंग्या शरणार्थियों और बांग्लादेशी नागरिकों को ले जा रही नाव पलटी. इस हादसे में 250 लोग लापता हैं. इन लोगों को तस्करी करके ले जाया जा रहा था.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • अंडमान सागर में मलेशिया जा रही एक नाव डूबने से 250 से अधिक बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोग समुद्र में गिर गए।
  • बांग्लादेश कोस्ट गार्ड ने नौ लोगों को बचाया है, जिनमें एक महिला भी शामिल है।
  • नाव पर सवार यात्रियों में लगभग 150 रोहिंग्या और बाकी बांग्लादेशी थे, कुल 280 लोग तस्करी कर लाए गए थे।
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

अंडमान सागर में बड़ा हादसा हुआ है. अंडमान द्वीप समूह के पास मलेशिया जा रही एक नाव समुद्र में डूब गई. इस नाव में 250 से ज़्यादा बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोग सवार थे. हादसे के बाद 9 लोगों को बचाया गया है. बांग्लादेशी अधिकारियों ने अब तक एक महिला समेत नौ लोगों को बचाया जा चुका है. इन लोगों को तस्करी करके ले जाया जा रहा था. बचे हुए लोगों ने इस खतरनाक सफर की हैरान कर देने वाली कहानी बताई है.

बांग्लादेशी कोस्ट गार्ड ने 9 लोगों को बचाया

बांग्लादेश के अखबार द डेली स्टार के अनुसार, बांग्लादेश कोस्ट गार्ड के मीडिया अधिकारी लेफ्टिनेंट कमांडर सब्बीर आलम सुजान ने बताया कि बांग्लादेश का झंडा लगी नाव 'MT मेघना प्राइड' चटगांव से इंडोनेशिया जा रही थी. इस नाव ने 9 अप्रैल की दोपहर को अंडमान द्वीप समूह के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से नौ लोगों को बचाया. बचाए गए लोगों को बांग्लादेश कोस्ट गार्ड के गश्ती जहाज 'मंसूर अली' को सौंप दिया गया.

कैसे बची जान, शख्स ने बताया

बचाए गए लोगों ने मानव तस्करी और उस जानलेवा सफर के बारे में दिल दहला देने वाली बातें बताईं. रफीकुल इस्लाम, जो खुद एक रोहिंग्या हैं, ने बताया कि 2 अप्रैल को कुतुपालोंग बाजार में उन्हें नौकरी का झांसा देकर फंसाया गया था. उन्हें टेकनाफ के कछोपिया यूनियन के राजारछारा इलाके में एक घर में ले जाया गया, जहां उन्हें 20 से 25 अन्य लोगों के साथ बंद करके रखा गया था.

उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी कोई पीड़ित भागने की कोशिश करता था, तो उसके साथ बुरा बर्ताव किया जाता था. उन्होंने यह भी बताया कि उस इलाके में कई घरों का इस्तेमाल तस्करी करके लाए गए लोगों को बंद रखने के लिए किया जाता था. 4 अप्रैल की रात उन्हें राजारछारा के पास 'मरीन ड्राइव' से सटे समुद्र तट पर ले जाया गया और छोटी-छोटी मछली पकड़ने वाली नावों में बिठा दिया गया. एक जगह उन्हें पास की झाड़ियों में छिपने के लिए मजबूर किया गया, क्योंकि उस समय बांग्लादेशी सेना की एक गश्ती टीम वहां से गुजर रही थी.

Advertisement
उन्होंने बताया, बाद में, हमें अलग-अलग चरणों में म्यांमार के जलक्षेत्र के पास, सेंट मार्टिन द्वीप के करीब मौजूद एक बड़ी मछली पकड़ने वाली नाव में भेज दिया गया. उस नाव में और भी यात्रियों को चढ़ाया गया, जिससे यात्रियों की कुल संख्या लगभग 280 हो गई. इनमें 13 चालक दल के सदस्य और तस्कर, 21 रोहिंग्या महिलाएं और चार बच्चे शामिल थे. इन यात्रियों में से लगभग 150 लोग रोहिंग्या थे, जबकि बाकी बांग्लादेशी थे.

4 अप्रैल को म्यांमार के शमीला के जलक्षेत्र से निकलने के बाद, वह नाव 8 अप्रैल को अंडमान द्वीप समूह के पास पहुंची. समुद्र में तेज लहरों और खराब मौसम के कारण, तस्करों ने यात्रियों को नाव के चार छोटे-छोटे कंपार्टमेंट में ठूंस दिया. ये कंपार्टमेंट असल में मछलियां और जाल रखने के लिए बनाए गए थे. रफीकुल ने दावा किया कि दम घुटने और अत्यधिक भीड़भाड़ के कारण 25 से 30 लोगों की मौत हो गई. तस्करों ने धमकी दी थी कि अगर डेक पर मौजूद लोग कंपार्टमेंट में जाने से मना करेंगे, तो वे जहाज को डुबो देंगे. आखिरकार, बड़ी-बड़ी लहरों की चपेट में आने से वह नाव पलट गई.

रफीकुल ने बताया कि उन्होंने एक पानी की बोलत पकड़कर अपनी जान बचाई. वो नहीं जानते कि बाकी लोगों के साथ क्या हुआ. 9 अप्रैल को उन्हें आठ अन्य लोगों के साथ बचा लिया गया.

Advertisement

यह भी पढ़ें: साउथ अफ्रीका ने जिम्बाब्वे को 8 नरकंकाल और पत्थर की चिड़िया क्यों वापस किए? जानिए इसकी वजह

Featured Video Of The Day
नीतीश कुमार ने पहनाई माला, सम्राट चौधरी ने छू लिए पैर, देखें VIDEO