ऑस्ट्रेलिया में 10 जंगली कुत्तों के झुंड को क्यों मार रही सरकार? 100 साल में तो खुद हो जाएंगे विलुप्त

ऑस्ट्रेलिया में पाए जाने वाले डिंगो न तो पूरी तरह से कुत्ते हैं और न ही भेड़िये. ये प्राचीन जंगली कुत्तों की एक अनोखी वंशावली है जो शुरुआत के घरेलू कुत्तों से अलग हो गई थी.

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डिंगो एक तरह के जंगली कुत्ते हैं जो बहुत पहले जंगलों में रहने लगे थे (फोटो- फाइल फोटो)
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  • क्वींसलैंड सरकार ने केगारी द्वीप पर जंगली कुत्तों के झुंड को मौत के इंजेक्शन से मारने का निर्णय लिया है
  • यह कार्रवाई कनाडाई पर्यटक पाइपर जेम्स की मौत में डिंगो के शामिल होने के कारण की जा रही है
  • केगारी द्वीप पर लगभग 200 डिंगो रहते हैं, जिन्हें स्थानीय बुचुल्ला लोग पवित्र मानते हैं और वोंगारी कहते हैं
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ऑस्ट्रेलिया के एक राज्य क्वींसलैंड की सरकार ने घोषणा की है कि वह जंगली कुत्तों (डिंगो) के एक समूह को मौत के घाट उतार देगी. इन जंगली कुत्तों को ऑस्ट्रेलियाई द्वीप केगारी पर कनाडाई पर्यटक पाइपर जेम्स की मौत से जोड़ा गया है. अब ऑस्ट्रेलिया के पर्यावरण मंत्री एंड्रयू पॉवेल ने रविवार, 25 जनवरी को कहा कि 10 जानवरों के इस पूरे झुंड को जहरीला इंजेक्शन देकर मार दिया जाएगा. उन्हें इस तरह मौत के घाट उतारा जाएगा कि उन्हें किसी तरह का दर्द न हो.

नोट- डिंगो न तो पूरी तरह से कुत्ते हैं और न ही भेड़िये. ये प्राचीन जंगली कुत्तों की एक अनोखी वंशावली है जो शुरुआत के घरेलू कुत्तों से अलग हो गई है और हजारों वर्षों से ऑस्ट्रेलिया में अलग-थलग रहती है. ये एक अलग प्रकार के कैनिड के रूप में अलग से विकसित हुई है, जिसे कभी-कभी कैनिस फेमिलेरिस (घरेलू कुत्ता) या कैनिस ल्यूपस (भेड़िया) के बजाय अपनी प्रजाति या उप-प्रजाति, कैनिस डिंगो माना जाता है.

आखिर इन जंगली कुत्तों ने किया क्या था?

10 डिंगो का यह समूह 19 साल के पाइपर जेम्स की मौत से जुड़ा है. जेम्स की मौत पिछले सोमवार को हुई थी और उनकी बॉडी पानी के अंदर मिली थी. शुक्रवार को उसके पोस्टमार्टम की रिपोर्ट जारी हुई थी. रिपोर्ट में उसके डूबने और डिंगो के काटने से जुड़ी चोटों के निशान मिले थे. हालांकि द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार यह भी पाया गया है कि डिंगो के काटने के जो निशान मिले हैं वो जेम्स की मौत के पहले के हैं और उनके काटने की वजह से "तत्काल मौत होने की संभावना नहीं थी".

स्थानीय लोगों के लिए पवित्र हैं डिंगो

केगारी द्वीप क्वींसलैंड की राजधानी, ब्रिस्बेन से लगभग 380 किलोमीटर उत्तर में है. इस द्वीप पर अनुमानित 200 डिंगो मौजदू हैं, जो यहां के स्वदेशी बुचुल्ला लोगों के लिए पवित्र हैं, जो उन्हें वोंगारी कहते हैं. विशेष रूप से केगारी की विश्व विरासत सूची में भी डिंगो का उल्लेख है. केगारी को पहले फ़्रेजर द्वीप के नाम से जाना जाता था.

विलुप्त होने की कगार पर डिंगो

द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार सेंट्रल क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के सीनियर लेक्चरर ब्रैडली स्मिथ ने कहा कि सरकार का यह फैसला तर्कहीन है और इसका डिंगो जनसंख्या की पारिस्थितिकी पर "विनाशकारी" प्रभाव पड़ेगा. उन्होंने कहा कि यह 50 से 100 वर्षों में विलुप्त होने की राह पर है. उन्होंने कहा, "हर बार जब आप किसी एक जानवर, और विशेष रूप से उसके पूरे परिवार को हटाते हैं, तो आप उनकी पहले से ही सीमित आबादी से उनके संपूर्ण आनुवंशिकी को हटा रहे हैं. इसलिए यह डिंगो आबादी के लिए एक पूर्ण आपदा है."

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