शांति के लिए तेहरान में आसिम मुनीर और होर्मुज में युद्धपोतों की तैनाती... क्या 'डबल गेम' खेल रहे हैं ट्रंप?

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप शांति वार्ता की बात करते हुए युद्ध खत्म होने की संभावना भी जता रहे हैं और होर्मुज में अमेरिकी जहाजों और सैनिकों का जत्था भी बढ़ा रहे हैं. बहुत जल्द होर्मुज के करीब 10 हजार अमेरिकी सैनिक पहुंच रहे हैं.

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  • अमेरिका और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव जारी है, अमेरिका ने अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाई है.
  • अमेरिकी नौसेना ने दस ईरानी जहाजों को वापस लौटाने का दावा किया है और आईआरजीसी को आर्थिक चोट पहुंचा रही है.
  • अमेरिका ने गल्फ कॉपरेशन काउंसिल के छह अरब देशों से आईआरजीसी के बैंक खातों को फ्रीज करने की मांग की है.
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एक तरफ अमेरिका और ईरान में दूसरी दौर की बातचीत के लिए प्रयासों का दौर जारी है. वहीं, दूसरी तरफ अमेरिका कई ऐसे बड़े फैसले ले रहा है, जिससा का सीधा असर इन प्रयासों पर पड़ सकता है. सारी बयानबाजी के बावजूद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी अभी जारी है और इस दौरान अमेरिका होर्मुज पर अपनी पकड़ बढ़ाने के लिए एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ एम्फिबियस एसॉल्ट शिप भी भेज रहा है. इसके अलावा होर्मुज में अमेरिका ने सख्त नाकाबंदी कर रखी है.

10 ईरानी जहाजों को वापस लौटाया... अमेरिका का दावा

अमेरिका का दावा है कि अब  तक उसकी नौसेना ने 10 ईरानी जहाजों को वापस लौटाया है. साथ ही अमेरिका ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी  को आर्थिक चोट पहुंचाने की कोशिश में  है. उसने गल्फ कॉपरेशन काउंसिल के 6 अरब देशों सऊदी अरब,  कुवैत, यूएई, कतर, बहरीन और ओमान में चल रहे आईआरजीसी के बैंक अकाउंट्स फ्रीज करने की मांग की है.

क्या डबल गेम खेल रहे हैं ट्रंप?

तो अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप सीधे-सीधे डबल गेम खेल रहे हैं. वे शांति वार्ता की बात करते हुए युद्ध खत्म होने की संभावना भी जता रहे हैं और होर्मुज में अमेरिकी जहाजों और सैनिकों का जत्था भी बढ़ा रहे हैं. बहुत जल्द होर्मुज के करीब 10 हजार अमेरिकी सैनिक पहुंच रहे हैं. इनमें से अकेले करीब 6 हजार सैनिक निमित्ज क्लास के अमेरिकी एयरकाफ्ट कैरियर यूएसएस जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश पर तैनात हैं. यह परमाणु ऊर्जा से चलने वाला विमान वाहक पोत हैं. यानी यह लंबी लड़ाई के लिये तैयार है. एक लाख टन वजन का है. इसकी रफ्तार करीब 56 किलोमीटर प्रतिघंटा हैं. इस पर  70 से ज्यादा एफ-18 लड़ाकू विमान हैं.

होर्मुज में अमेरिका तैनान कर रहा युद्धपोत

वहीं, एम्फिबियस एसॉल्ट शिप बॉक्सर अपने क्लास का बहुत ही शक्तिशाली युद्धपोत है. इसे भी छोटा मोटा एयरकाफ्ट कैरियर कहा जा सकता हैं. इसमें 5वीं पीढ़ी का एयरकाफ्ट एफ-35 तैनात है. यह समुद्र, जमीन और हवा में ऑपरेशन कर सकता हैं. इसमें मरीन कमांडो तैनात होते है जो जमीन पर किसी भी तरह के ऑपरेशन को अंजाम दे सकते हैं. इन सबके अलावा ईरान के करीब ही एक और अमेरिकी विमान वाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन के अलावा 16 से ज्यादा जंगी जहाज पहले से ही मौजूद हैं.

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तेहरान पहुंचे आसिम मुनीर

इन सबके बीच पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर तेहरान पहुंच गए हैं. माना जा रहा है कि वह अमेरिका का संदेश लेकर ईरान पहुंचे हैं, ताकि बातचीत का दूसरा दौर जल्द शुरू हो सके. ईरान ने अमेरिका को धमकी भी दी है कि अगर उसने होर्मुज की नाकेबंदी जारी रखी तो आईआरजीसी पलटवार कर सकती है. इससे सीजफायर टूट भी सकता हैं. ईरान का यहां तक दावा है कि अगर अमेरिका ऐसी नाकेबंदी जारी रखता है तो वह खाड़ी देशों के साथ साथ लाल सागर तक जहाजों की आवाजाही को रोक देगा. हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर 22 अप्रैल को खत्म होने वाला है. अमेरिका से ऐसे इनपुट मिल रहे है कि इस युद्धविराम को और दो हफ्ते तक बढ़ाया जा सकता हैं.

युद्धविराम के लिए अमेरिका पर दवाब!

पहले दौर की बातचीत में अविश्वास के माहौल के बाद भी सकारात्मक संदेश मिले हैं. अपने विरोधाभासी बयानों के बावजूद ट्रंप संकेत दे रहे हैं कि ईरान के साथ बातचीत इस हफ्ते फिर से शुरू हो सकती हैं. वहीं, ट्रंप यह भी कह रहे है कि वह इजराइल और लेबनान के बीच फिर से बातचीत कराने की कोशिश कर रहे हैं. ईरान का जोर इस बात पर भी रहा है कि इजरायल पहले लेबनान पर हमले बंद करें. अमेरिका और ईरान में एक और अहम बात यह दिख रही है कि बातचीत में दोनों पक्ष लचीला रुख अपनाये हुए हैं. इसी से कुछ रास्ता निकलने की उम्मीद ज्यादा जताई जा रही हैं. अब अरब समेत दुनिया के कई देश अमेरिका पर दवाब डाल रहे है कि युद्धविराम को स्थायी शांति में बदला जाए. इसके बावजूद अमेरिका अपनी तैयारियों में कोई ढील नहीं देना चाहता है. वह ईरान पर लगातार दवाब बना रहा है ताकि वह उसे झुका सकें पर ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह युद्ध नहीं बातचीत के जरिए समाधान चाहता हैं. लेकिन अगर किसी ने जंग थोपने या झुकाने की कोशिश की तो उसे असफलता हाथ लगेगी. साफ है दोनों देशो के बीच अहम मुद्दो पर मतभेद जरुर है पर मौजूदा रुख को देखते हुए लगता है कि कुछ न कुछ रास्ता निकल सकता है.

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