- AI केवल टेक्नोलॉजी अपग्रेड नहीं कर रहा, इसके पूरे स्ट्रक्चर में ही बदलाव आ रहा है.
- AI खुद ही खुद को बेहतर बनाने की क्षमता की ओर बढ़ रही हैं.
- AI खुद अपना सक्सेसर बनाने लगे, तो यह मानव इतिहास की सबसे बड़ी तकनीकी छलांग और सबसे बड़ी चुनौती भी हो सकती है.
दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI जिस रफ्तार से आगे बढ़ रहा है, उसने टेक्नोलॉजी की पूरी परिभाषा बदल कर रख दी है. लेकिन AI की इस बढ़ती रफ्तार के बीच लगातार ऐसे संकेत भी मिल रहे हैं जो एक बड़े बदलाव की चेतावनी भी हैं. दरअसल, AI इंसानों का मोहताज नहीं रह जाएगा, क्योंकि जिस तेजी से उसमें डेवलपमेंट आ रहा है, वो खुद ही अपना सक्सेसर बनाने की दिशा में बढ़ रहा है. एंथ्रोपिक ने एक ब्लॉग में लिखा है कि वो खुद ही सिस्टम को अपने काम का एक बड़ा हिस्सा सौंप रहे हैं, जिससे उनका काम जल्दी हो रहा है.
एंथ्रोपिक का यह भी मानना है कि अगर इस ट्रेंड को और आगे ले जाया जाए और AI की कंप्यूटिंग ताकत बढ़ा दी जाए, तो वो खुद-ब-खुद अपने अगले युग के AI को डिजाइन और डेवलप करने में सक्षम होंगे.
अगर AI खुद के वर्जन को बनाने में सक्षम हो गया तो यह टेक्नोलॉजी के इतिहास में एक बहुत बड़ी उपलब्धि होगी. इसके साइंस, हेल्थकेयर और अन्य क्षेत्रों को जहां बहुत फायदा पहुंच सकता है. वहीं AI सिस्टम पर इंसानों का कंट्रोल खोने का जोखिम भी बढ़ सकता है. तो अगर सिस्टम अपने अगले वर्जन या सक्सेसर को पूरी तरह खुद ही बनाने में सक्षम हो जाएं तो उन्हें सुरक्षित रखना, उनकी निगरानी करना और वो किस तरह काम करें उसे आकार देना बेहद अहम होगा.
इसे रिकर्सिव सेल्फ इम्फ्रूवमेंट कहा गया है, यानी AI का खुद को लगातार बेहतर बनाते जा रहा है. रिपोर्ट ने स्पष्ट तौर पर यह बताया है कि यह बदलाव बहुत तेजी से हो रहा है, जिसके लिए शायद पूरी दुनिया तैयार ही नहीं है.
तो क्या हमारे हाथ से कंट्रोल निकल जाएगा?
यह सवाल रिपोर्ट का सबसे गंभीर हिस्सा है. अगर AI लगातार खुद को सुधार करता रहा और इंसान सिर्फ उसे निर्देश देने तक सीमित रह गया, तो उसे कंट्रोल करने का केंद्र भी धीरे-धीरे इंसान से हट कर खुद AI के हाथों में जाने का खतरा है. यानी भविष्य में AI खुद ही तय करेगा कि उसे क्या करना है और क्या नहीं.
एंथ्रोपिक की रिपोर्ट कहती है कि AI अब किसी टास्ट को करने से आगे बढ़कर उसकी योजना और उसे बेहतर बनाने में भी शामिल हो रहा है.
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