- पेंटागन और एंथ्रोपिक के बीच क्लॉड AI के सैन्य इस्तेमाल पर तनातनी.
- एंथ्रोपिक सुरक्षा नियमों पर अड़ा, पेंटागन चाहता है बिना पाबंदियों के उपयोग.
- क्लॉड हाल में वेनेज़ुएला ऑपरेशन में काम आया; विवाद के बीच कंपनी का मिलियन डॉलर का अनुबंध जोखिम में है.
AI कंपनी एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई मंगलवार को अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से मिलने वाले हैं. यह मुलाकात पेंटागन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी के बीच टेक्नोलॉजी के मिलिट्री इस्तेमाल को लेकर बढ़ते तनाव के बीच हो रही है. दरअसल, अमेरिकी समाचार एक्सियोस के मुताबिक एंथ्रोपिक और अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के बीच कॉन्ट्रैक्ट पर बातचीत कंपनी की उसके AI सिस्टम पर सख्त सुरक्षा उपायों के मद्देनजर रुक गई है.
एक सीनियर डिफेंस अधिकारी ने एक्सियोस को बताया, "एंथ्रोपिक जानता है कि यह कोई जान-पहचान करने वाली मीटिंग नहीं है. यह कोई फ्रेंडली मीटिंग नहीं है. यह बकवास करने या बात खत्म करने वाली मीटिंग है."
एंथ्रोपिक चाहता है कि उसके AI टूल्स का मिलिट्री ऑपरेशन में कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है, इस पर साफ लिमिट हो और यह भरोसा हो कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ऐसे तरीकों से नहीं किया जाएगा जो कंपनी के सेफ्टी और एथिकल स्टैंडर्ड्स का उल्लंघन करते हों.
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हालांकि, रक्षा विभाग ने संकेत दिया है कि वह कंपनी के AI टूल्स को 'कानून के दायरे में किए जाने वाले इस्तेमालों' की फ्लेक्सिबिलिटी चाहता है, जिसमें कंपनी की तरफ से कोई अन्य सीमा तय नहीं की जाएगी. यानी बगैर किसी ज्यादा पाबंदी के.
पेंटागन और एंथ्रोपिक के बीच सौदे की बातचीत लटक चुकी है क्योंकि कंपनी अपने AI मॉडल क्लॉड पर कड़े सुरक्षा नियम लगाना चाहती है, जैसे कि इसे मानवीय नियंत्रण के बिना हथियार चलाने या बड़े पैमाने पर निगरानी में इस्तेमाल नहीं होने देना.
क्लॉड फिलहाल अमेरिकी सेना के गोपनीय नेटवर्क में इस्तेमाल होने वाला एकमात्र उन्नत AI सिस्टम है, इसलिए पेंटागन इसे खोना नहीं चाहता. लेकिन इसी बीच यह विवाद और बढ़ गया है जब रिपोर्ट में कहा गया कि क्लॉड का इस्तेमाल वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने वाले सैन्य ऑपरेशन में भी हुआ था.
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जब कंपनी को पता चला कि क्लॉड का इस्तेमाल हुआ...
कुछ दिनों पहले कंपनी ने दावा किया था कि निकोलस मादुरों को पकड़ने में क्लॉड ने गोली नहीं चलाई, लेकिन उसने सैटेलाइट तस्वीरों, कम्युनिकेशन डेटा और लॉजिस्टिक्स पैटर्न का विश्लेषण करके यह बताया कि निशाना कहां साधना है.
इसमें बताया गया कि AI क्लॉड ने अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन को एक गुप्त ऑपरेशन में तकनीकी मदद दी. इस ऑपरेशन को एक तानाशाह को पकड़ने के नाम से जोड़ा गया- जिसे ऐतिहासिक ऑपरेशन वैल्करी (Operation Valkyrie) का नाम दिया गया.
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कंपनी ने यह भी दावा किया कि उसे इसकी जानकारी नहीं थी लिहाजा कंपनी के सीईओ ने आश्चर्य जताया कि आखिर ये कैसे संभव हुआ.
उन्होंने कहा, "मैंने अपनी रिस्पॉन्सिबल स्केलिंग पॉलिसी में इसका जिक्र नहीं किया जो कि 47 पेज की है. इसमें 'बायोलॉजिकल रिस्क' पर एक सेक्शन है. इसमें 'ऑटोनॉमस रेप्लिकेशन' पर एक सेक्शन है. इसमें 'हेड्स ऑफ स्टेट को पकड़ने में मदद करने' पर कोई सेक्शन नहीं है. यह एक चूक थी."
पेंटागन के साथ टकराव
पेंटागन ऑपरेशन वाल्किरी से बहुत खुश था और कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाना चाहता था. पेंटागन ने कंपनी को अगले तीन साल में 200 मिलियन के कान्ट्रैक्ट का प्रस्ताव दिया. कंपनी को बड़े मिलिट्री इंटेलिजेंस एप्लीकेशन तैयार करने थे, जिसे ऑपरेशनल डिसीजन सपोर्ट बताया गया. पर कंपनी के सीईओ ने इसे रिस्पॉन्सिबल स्केलिंग पॉलिसी का हवाला देते हुए ठुकरा दिया कि उसमें हेड्स ऑफ स्टेट को कैप्चर करने के लिए कोई सेक्शन नहीं था. एक बैठक में कंपनी के सीईओ ने चार बार गार्डरेल्स शब्द का इस्तेमाल किया. गार्डरेल्स यानी सख्त नियमों की जरूरत.














