जंग के बीच अब आसमानी आफत! मिडिल ईस्ट पर ‘मेगा स्टॉर्म’ का खतरा, बाढ़ और भारी तबाही का अलर्ट

हफ्तों से युद्ध झेल रहे मध्य पूर्व में अब एक दुर्लभ और शक्तिशाली मेगा स्टॉर्म का खतरा मंडरा रहा है. अगले तीन दिनों में 100-500 मिमी बारिश, बाढ़, तेज़ हवाओं और व्यापक अव्यवस्था की आशंका जताई गई है.

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अप्रैल 2024 में, UAE में 75 वर्षों में सबसे भारी वर्षा दर्ज की गई, जिसमें अल ऐन में 254.8 मिमी बारिश हुई.
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  • मिडिल ईस्ट में असामान्य मौसम प्रणाली भारी बारिश और तूफानों के कारण व्यापक तबाही मचा सकती है.
  • दुबई और आसपास के शहरों में 24-48 घंटे में सामान्य से कई गुना अधिक बारिश होने का अनुमान है.
  • अप्रैल 2024 में UAE ने रिकॉर्ड भारी बारिश देखी थी जिसने शहर के बुनियादी ढांचे को बुरी तरह प्रभावित किया था.
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नई दिल्ली:

जंग से जूझ रहे मिडिल ईस्ट के लिए अब एक और बड़ी चुनौती सामने खड़ी है. इस बार दुश्मन कोई देश नहीं, बल्कि प्रकृति है. क्षेत्र में एक शक्तिशाली और असामान्य मौसम प्रणाली दस्तक देने जा रही है, जो आज से ही असर दिखाना शुरू कर सकती है. इसका प्रभाव संयुक्त अरब अमीरात, दक्षिणी ईरान, पूर्वी इराक और आसपास के देशों में व्यापक तबाही मचा सकता है.

रेगिस्तान में ‘असामान्य' खतरा

मिडिल ईस्ट आमतौर पर सूखे और गर्म मौसम के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार तस्वीर अलग है. मौसम वैज्ञानिकों ने आने वाले दिनों में बेहद भारी बारिश की चेतावनी दी है. कुछ मॉडल्स के मुताबिक अगले तीन दिनों में 100 मिमी से लेकर 500 मिमी तक बारिश हो सकती है, जो कई जगहों के सालाना औसत से भी ज्यादा है.

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इस तूफान का पीक गुरुवार और शुक्रवार को रहने की संभावना है. इसकी वजह मिस्र और सऊदी अरब के ऊपर बना गहरा ट्रफ, भूमध्यसागर से आ रही सिस्टम की टक्कर और इटली की ओर से आ रहा एक शक्तिशाली वेदर पैटर्न है.

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दुबई समेत बड़े शहरों पर सबसे ज्यादा खतरा

दुबई इस खतरे के केंद्र में है. यहां आमतौर पर साल भर में करीब 100 मिमी बारिश होती है, लेकिन अनुमान है कि सिर्फ 24-48 घंटे में 76 से 152 मिमी या उससे ज्यादा बारिश हो सकती है. अबू धाबी, शारजाह और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास के बंदरगाहों पर भी बाढ़ और तेज हवाओं का खतरा है, जहां पहले से ही युद्ध के कारण दबाव बना हुआ है. इतना ही नहीं, इस सिस्टम के चलते रेगिस्तानी इलाकों में दुर्लभ टॉरनेडो, ओलावृष्टि और तेज आंधी-तूफान भी देखने को मिल सकते हैं.

पहले भी देख चुका है कहर

अप्रैल 2024 में यूएई ने 75 साल की सबसे भारी बारिश देखी थी. अल ऐन में 254.8 मिमी और दुबई एयरपोर्ट पर 142 मिमी बारिश ने शहर को ठप कर दिया था. फ्लाइट्स बंद हुईं, सड़कों पर पानी भर गया और कई लोगों की जान चली गई.

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2019 में ईरान, इराक और सीरिया में आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी. 2022 में जेद्दा में सिर्फ 6 घंटे में 179 मिमी बारिश ने शहर को डुबो दिया था. विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और तेजी से हो रहा शहरीकरण ऐसे 'सदी में एक बार' आने वाले तूफानों को अब ज्यादा आम बना रहा है.

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जंग के बीच डबल संकट

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच यह तूफान और भी खतरनाक साबित हो सकता है. खासकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है. अगर यहां बाधा आती है तो वैश्विक तेल सप्लाई पर असर पड़ सकता है. पहले से ही टैंकर मूवमेंट प्रभावित है और कीमतों पर दबाव बना हुआ है. ऐसे में बाढ़ या तूफान से स्थिति और बिगड़ सकती है.

हाई अलर्ट पर प्रशासन

खाड़ी देशों की सरकारें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. इमरजेंसी सेवाएं अलर्ट पर हैं और लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है. आने वाले 48-72 घंटे मिडिल ईस्ट के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं, जहां जंग के बीच अब मौसम की मार भी बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है.

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