मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच पिछले 2 दिनों में इजरायल, ईरान और अमेरिका, तीनों देशों के शीर्ष नेताओं ने जंग को लेकर बड़े बयान दिए हैं. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तीनों के संदेश अलग हैं, लेकिन एक बात कॉमन है: जंग अभी खत्म होती नहीं दिख रही.
नेतन्याहू का दावा: आधे से ज्यादा मिशन पूरा, लेकिन जंग जारी
इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने साफ संकेत दिया है कि ईरान के खिलाफ जंग फिलहाल खत्म करने के मूड में नहीं है. उन्होंने कहा कि यह युद्ध अपने आधे से ज्यादा लक्ष्यों को हासिल कर चुका है, लेकिन इसकी कोई तय समयसीमा नहीं है.
न्यूजमैक्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि यह आकलन 'मिशन' के हिसाब से है, समय के हिसाब से नहीं. उनके मुताबिक, इजरायल और अमेरिका मिलकर ईरान की सैन्य क्षमता, मिसाइल सिस्टम और परमाणु ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा चुके हैं.
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नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के हजारों सदस्य मारे गए हैं और उसका औद्योगिक ढांचा कमजोर हो चुका है. हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि 'रीजीम चेंज' (सरकार गिराना) सीधा लक्ष्य नहीं है, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा कि ईरानी शासन अंदर से ढह सकता है.
पेजेश्कियान का अमेरिकी जनता को खत: ‘प्रोपेगैंडा से बाहर निकलें'
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने जंग के बीच एक अलग रास्ता अपनाया है. उन्होंने सीधे अमेरिकी नागरिकों के नाम खुला खत लिखकर जंग के नैरेटिव को चुनौती दी है. अपने खत में पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान ने कभी किसी युद्ध की शुरुआत नहीं की और उसे खतरे के रूप में पेश करना 'मनगढ़ंत' है. उन्होंने अमेरिकी जनता से अपील की कि वे राजनीतिक बयानबाजी और प्रोपेगैंडा से ऊपर उठकर वास्तविकता को देखें.
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उन्होंने अमेरिका पर यह भी आरोप लगाया कि वह 'अमेरिका फर्स्ट' की बजाय इजरायल के लिए एक प्रॉक्सी की तरह काम कर रहा है. पेजेश्कियान के मुताबिक, ताकतवर देशों द्वारा हथियारों के बाजार को बनाए रखने के लिए दुश्मन की छवि गढ़ी जाती है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की सैन्य तैयारियां आत्मरक्षा के तहत हैं और किसी भी तरह की आक्रामकता नहीं हैं.
ट्रंप का राष्ट्र के नाम संबोधन: ‘निर्णायक जीत', लेकिन दबाव जारी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में जंग को लेकर बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ तेज और निर्णायक जीत हासिल कर ली है और अब यह युद्ध अपने अंत की ओर बढ़ रहा है.
ट्रंप के मुताबिक, ईरान की नौसेना पूरी तरह तबाह हो चुकी है, उसकी वायुसेना खंडहर में बदल गई है और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को भारी नुकसान पहुंचा है. उन्होंने इसे अमेरिकी सैन्य इतिहास की सबसे सटीक और प्रभावी कार्रवाइयों में से एक बताया. हालांकि, इस जीत के दावे के साथ ही ट्रंप ने यह भी कहा कि अगले 2–3 हफ्तों में ईरान पर सैन्य दबाव और बढ़ाया जाएगा. उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर ईरान के तेल ढांचे को भी निशाना बनाया जा सकता है.
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ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका अब ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर है और उसे होर्मुज जलडमरूमध्य की जरूरत नहीं है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि तेहरान के साथ पर्दे के पीछे बातचीत जारी है.
तीनों बयानों से क्या साफ?
तीनों नेताओं के बयानों को साथ रखें तो तस्वीर साफ होती है-
- इजरायल जंग को लंबा खींचने की तैयारी में है.
- ईरान खुद को हमले का शिकार बताकर वैश्विक सहानुभूति जुटाने में लगा है.
- अमेरिका जीत का दावा करते हुए भी सैन्य और कूटनीतिक दोनों रास्ते खुले रखे हुए है.
यानी जंग सिर्फ जमीनी नहीं, नैरेटिव की भी लड़ाई बन चुकी है. जहां हर देश अपनी जनता और दुनिया को अपनी-अपनी कहानी बता रहा है.














