ईरान पर हमला करके खूब तेल और गैस से कमाई कर रहा अमेरिका, यूरोप-एशिया बने खरीदार

अमेरिका आम तौर पर प्रति माह लगभग 110 मिलियन बैरल तेल का निर्यात करता है, जिसमें से लगभग आधा यूरोप को और एक तिहाई से अधिक एशिया को जाता है.

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अमेरिका अब होर्मुज जलडमरूमध्य खुलवाने पर प्राथमिकता दे रहा है.
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  • ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के अभियान के चलते मिडिल ईस्ट के देश भी युद्ध की आग में झोंक दिए गए हैं.
  • सऊदी अरब से लेकर संयुक्त अरब अमीरात, इराक हर तेल उत्पादन करने वाले देश पर बमबारी हो रही है.
  • एशियाई देशों ने अप्रैल में डिलीवरी के लिए अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाकर लगभग 60 मिलियन बैरल कर दी है.
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ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान युद्ध के कारण फारस की खाड़ी से तेल आपूर्ति बाधित होने के चलते एशियाई देशों ने अमेरिका से तीन साल में सबसे अधिक मात्रा में तेल खरीदा है. ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के अभियान के चलते मिडिल ईस्ट के देश भी युद्ध की आग में झोंक दिए गए हैं. सऊदी अरब से लेकर संयुक्त अरब अमीरात, इराक हर तेल उत्पादन करने वाले देश पर बमबारी हो रही है. खाड़ी से एशिया और यूरोप जाने वाले जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पास फंसे हुए हैं. इसका सबसे ज्यादा फायदा अमेरिका को हुआ है. 

युद्ध से पहले और अब

यूरोप पहले रूस से तेल और गैस ज्यादा मात्रा में खरीदता था. अब स्थिति ये है कि वो अमेरिका पर निर्भर है. खाड़ी देशों से भी यूरोप का तेल और गैस आना रुक चुका है. ऐसे में तेल और गैस के बढ़ती कीमतों का अगर सबसे ज्यादा फायदा हो रहा है तो वो अमेरिका ही है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट कहती है कि हाल के दिनों में एशियाई देशों ने अप्रैल में डिलीवरी के लिए अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाकर लगभग 60 मिलियन बैरल कर दी है. यह अप्रैल 2023 के बाद से उच्चतम मासिक स्तर है. 60 मिलियन बैरल की मात्रा अभी और बढ़ सकती है, क्योंकि संयुक्त राज्य अमेरिका से अप्रैल में लोड होने वाले कार्गो की खरीद का समय अभी भी सीमित है. इस स्थिति के कारण अमेरिकी ऊर्जा संसाधनों की कीमतें बढ़ रही हैं.

इस मामले में फंसा अमेरिका

हालांकि, ब्लूमबर्ग ने बताया कि संयुक्त राज्य अमेरिका से खरीदा गया तेल दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, थाईलैंड और जापान जैसे एशियाई देशों की समस्या का तुरंत समाधान नहीं करेगा. अप्रैल में लोड होने वाले कार्गो आमतौर पर लगभग दो महीने बाद ही अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं. संयुक्त राज्य अमेरिका आम तौर पर प्रति माह लगभग 110 मिलियन बैरल तेल का निर्यात करता है, जिसमें से लगभग आधा यूरोप को और एक तिहाई से अधिक एशिया को जाता है. एशियाई खरीदारों ने इस वर्ष के पहले दो महीनों में लगभग 70 मिलियन बैरल अमेरिकी तेल खरीदा.

होर्मुज इसीलिए प्राथमिकता

यही कारण है कि अमेरिका अब जल्द से जल्द युद्ध को समाप्त करने या फिर होर्मुज खुलवाने पर बल दे रहा है. मगर ईरान अब अपनी शर्तों पर युद्ध को रोकने की बात कर रहा है. यहीं से अमेरिका की दिक्कतें शुरू हो गईं हैं. अमेरिका नहीं चाहता कि दुनिया उसके खिलाफ हो, और युद्ध रोकने के लिए उसे बाध्य करे. इसलिए वो लगातार कई देशों पर दबाव डाल रहा है कि होर्मुज से तेल-गैस जहाजों की आवाजाही सुनिश्चित करने में उसकी मदद करें. एक बार होर्मुज का रास्ता साफ हो गया तो तेल की कमाई से अमेरिका लंबे समय तक युद्ध में हो रहे नुकसान की भरपाई कर सकेगा. साथ ही वेनेजुएला की तरह ईरान पर भी अपनी पसंद के आदमी को सत्ता पर बैठाकर तेल और गैस के बिजनेस पर पूरी तरह कब्जा कर लेगा. 

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