- ईरान के पूर्व सु्प्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम विदाई की रस्में शुरू हो गई हैं.
- खामेनेई का पार्थिव शरीर अभी ईरान की राजधानी तेहरान की ग्रैंड मोसाला मस्जिद में रखी गई है.
- खामेनेई की अंतिम विदाई की रस्में 7 दिन तक दो देशों की 5 शहरों में होगी.
Ali Khamenei Funeral: ईरान के पूर्व सु्प्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम विदाई की रस्में शुरू हो गई हैं. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के भीषण हवाई हमलों में अयातुल्ला अली खामेनेई का निधन हो गया था. जिसके बाद पश्चिम एशिया में भीषण युद्ध की शुरुआत हुई थी. जंग के बीच खामेनेई के पार्थिव शरीर को फोरेंसिक मोर्चरी के रेफ्रिजरेटेड कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षित रखा गया था. अब सीजफायर की घोषणा के बाद खामेनेई को नम आंखों से विदा किया जा रहा है. 3 जुलाई शुक्रवार से खामेनेई के अंतिम संस्कार के कार्यक्रम शुरू हुए. जिसमें कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं.
अभी कहां रखा गया है खामेनेई का पार्थिव शरीर
खामेनेई का पार्थिव शरीर अभी ईरान की राजधानी तेहरान की ग्रैंड मोसाला मस्जिद में रखी गई है. जहां देश-विदेश से पहुंचे प्रतिनिधि उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं. ईरान ने खामेनेई की अंतिम विदाई और राजकीय अंतिम संस्कार के लिए खास तैयारियां की है. उनके पार्थिव शरीर को ईरान और इराक के 5 प्रमुख शहरों तेहरान, कोम, नजफ, कर्बला और मशहद में ले जाया जाएगा.
अयातुल्ला अली खामेनेई के पार्थिव शरीर को अभी तेहरान के ग्रैंड मोसाला मस्जिद में रखा गया है.
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दो देश, 5 शहर, 7 दिन खामेनेई की विदाई का पूरा शेड्यूल
1. तेहरान - ईरान की राजधानी तेहरान में 3 जुलाई से खामेनेई की अंतिम विदाई की रस्में शुरू हुई. खामेनेई, उनकी पत्नी, बेटी, दामाद और 14 माह की पोती के ताबूतों को अंतिम दर्शन के लिए तेहरान की ग्रैंड मोसाला मस्जिद (Grand Mosallah) में रखा गया है. यहां आम जनता और 100 से अधिक देशों के विदेशी मेहमान और प्रतिनिधि उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं. तीन दिन तक खामेनेई का जनाजा यहीं रखा जाएगा. 6 जुलाई को तेहरान के विभिन्न हिस्सों से खामेनेई की अंतिम यात्रा निकाली जाएगी. जिसमें लाखों लोग शामिल होंगे.
2. कोम- चौथे दिन ईरान की राजधानी तेहरान से खामेनेई का पार्थिव शरीर कोम ले जाया जाएगा. 7 जुलाई को यह कोम पहुंचेगा. कोम शिया इस्लाम की शिक्षा के प्रमुख केंद्र है, यहां खामेनेई की अंतिम विदाई से जुड़ी कई धार्मिक रस्में निभाई जाएंगी.
खामेनेई की अंतिम विदाई में मातम मनाती ईरान की महिलाएं.
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3. नजफ- कोम के बाद खामेनेई का पार्थिव शरीर इराक ले जाया जाएगा. 8 जुलाई को खामेनेई का ताबूत इराक के पवित्र शहर नजफ ले जाया जाएगा. नजफ शिया समुदाय के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है. यहां इमाम अली दरगाह में सार्वजनिक अंतिम यात्रा निकाली जाएगी.
4. कर्बला- नजफ के बाद खामेनेई का पार्थिव शरीर इराक के पवित्र शहर कर्बला में लाया जााएगा. जहां इमाम हुसैन और उनके भाई अब्बास की पवित्र दरगाहों पर खामेनेई का अंतिम जुलूस निकाला जाएगा.
5. मशहद- 9 जुलाई को सभी धार्मिक यात्राओं के बाद खामेनेई के पार्थिव शरीर को वापस ईरान के उत्तर-पूर्वी शहर मशहद में लाया जाएगा. मशहद खामेनेई का गृह जिला है. 9 जुलाई को ही उन्हें मशहद की ऐतिहासिक और पवित्र इमाम रजा दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक (दफनाया) किया जाएगा.
खामेनेई की विदाई में फूट-फूट कर रोते बच्चे.
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इन 5 शहरों को ही क्यों चुना गया?
ईरान, इराक की ये पांचों शहरें इस्लामिक मान्यता और खास कर शिया समुदाय के पवित्र केंद्र हैं. ऐसे में सालों तक दुनिया के सबसे बड़े शिया धर्मगुरु रहे ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई के पार्थिव शरीर को इन सभी जगहों पर ले जाया जाएगा. अमेरिका, इजरायल के साथ चले भीषण जंग के बाद हो रहे इस कार्यक्रम के जरिए ईरान दुनिया को अपनी ताकत भी दिखाएगा.
डेढ़ से दो करोड़ लोग होंगे शामिल, चलाई जा रही स्पेशल ट्रेनें
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार खामेनेई का अंतिम संस्कार अपने तरह का दुनिया के सबसे अलग और बड़ा आयोजन हो सकता है. खामेनेई की अंतिम विदाई में डेढ़ से दो करोड़ लोगों के शामिल होने का अनुमान जताया जा रहा है. खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने तेहरान आ रहे आम लोगों के लिए मेट्रो और सरकारी बसें मुफ्त की गई है. बाहर के आए लोगों के लिए होटल के किराए की कम कर दिए गए हैं. स्पेशल ट्रेनें भी चलाई जा रही हैं. स्कूल और मस्जिदों में भी लोगों के ठहरने की व्यवस्था की गई है.
खोमेनेई के जनाजे को श्रद्धांजलि देते लोग.
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खुमैनी का जनाजा याद आया
अब, ईरान सरकार इस अंत्येष्टि को राष्ट्रीय एकता और साझा शोक के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास कर रही है. आधिकारिक आयोजन निकाय द्वारा साझा किए गए अंत्येष्टि के प्रतीक के रूप में अयातुल्ला खामेनेई की बंद मुट्ठी के साथ "हमें उठना होगा" का नारा अंकित है. लेकिन तेहरान में तनाव और सन्नाटा छाया हुआ है, जो क्रांति के जनक, सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के भावपूर्ण अंतिम संस्कार से बिलकुल विपरीत है. तब, लाखों रोते-बिलखते लोग खुमैनी के अंतिम संस्कार के जुलूस में उमड़ पड़े और कुछ लोग एम्बुलेंस पर चढ़ गए; इस दौरान मृत नेता का नंगा पैर कफन से बाहर निकल आया, जबकि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स भीड़ को पीछे धकेलने की कोशिश कर रहे थे.
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