- चिली, वेनेजुएला, अमेरिका, पुर्तगाल, कोस्टा रिका, एल साल्वाडोर, मेक्सिको के विशेषज्ञ बचाव अभियान में शामिल हैं.
- गार्ड की पत्नी ने कहा, "यह किसी चमत्कार से कम नहीं. एक इंसान को बचाने के लिए इतने देश एक साथ काम कर रहे हैं."
- 24 जून को आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो भूकंपों में अब तक लगभग 2,300 लोगों की मौत हो चुकी है.
वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप के सात दिन बाद भी 43 वर्षीय सिक्योरिटी गार्ड हर्नान गिल मलबे के नीचे जिंदा मिला है. उसे बचाने के लिए सात देशों की संयुक्त रेस्क्यू टीम लगातार अभियान चला रही है, जिसे उसकी पत्नी ने चमत्कार बताया. वेनेजुएला में 24 जून को आए दो विनाशकारी भूकंपों के एक हफ्ते बाद भी उम्मीद पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. राजधानी के पास तटीय इलाके कैटिया ला मार में सात मंजिला इमारत के मलबे के नीचे दबे 43 वर्षीय सिक्योरिटी गार्ड हर्नान गिल अब भी जिंदा हैं. उन्हें बाहर निकालने के लिए सात देशों की संयुक्त रेस्क्यू टीम दिन-रात अभियान चला रही है.
रेस्क्यू टीमों के मुताबिक, बुधवार देर रात तक बचावकर्मी हर्नान गिल से करीब एक मीटर की दूरी पर पहुंच चुके थे. उनके पास सुरक्षित पहुंचने के लिए बेहद सावधानी से मलबा हटाया जा रहा है, क्योंकि पास की एक इमारत कभी भी गिर सकती है.
बचाव दल में 7 देशों के एक्सपर्ट
चिली, वेनेजुएला, अमेरिका, पुर्तगाल, कोस्टा रिका, एल साल्वाडोर और मेक्सिको के विशेषज्ञ बचाव अभियान में शामिल हैं. चिली की फायर सर्विस ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें हर्नान गिल अपनी छोटी-सी जगह के अंदर कैमरे की ओर सिर घुमाते दिखाई दिए. उन्होंने चेहरे पर मास्क लगाया हुआ था और उनकी दाईं आंख लाल नजर आ रही थी.
हर्नान की पत्नी गुस्बिमार गोंजालेज ने कहा, "यह किसी चमत्कार से कम नहीं है. मैंने पहली बार देखा है कि एक इंसान की जान बचाने के लिए इतने देश एक साथ काम कर रहे हैं."
रेस्क्यू टीम क्या उपाय कर रही है?
बचाव दल ने पिछले तीन दिनों में इमारत को गिरने से रोकने के लिए लकड़ी और लोहे से उसे सहारा दिया है. साथ ही, एक पाइप के जरिए हर्नान तक हवा पहुंचाई जा रही है और उन्हें पानी भी दिया जा रहा है ताकि वे जीवित रह सकें.
रेस्क्यू टीम के प्रमुख क्रिस्टियन वेरा ने बताया कि इमारत के अंदर बड़े-बड़े पिलर होने की वजह से सही जगह तक पहुंचना बेहद मुश्किल है. पहले 60×60 सेंटीमीटर की सुरंग बनाने की योजना थी, लेकिन इमारत में हल्का झुकाव आने के बाद उसे बदलना पड़ा. अब बचावकर्मी दूसरे रास्ते से हर्नान तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं.
यह खबर ऐसे समय आई है जब भूकंप के सात दिन बाद अन्य लोगों के जीवित मिलने की उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी है. 24 जून को आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो भूकंपों में अब तक लगभग 2,300 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं. ऐसे में हर्नान गिल का सात दिन तक जिंदा रहना पूरी दुनिया के लिए उम्मीद और हिम्मत की मिसाल बन गया है.
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