महायुद्ध में फंस गए ट्रंप! आखिर पीछे हटने को क्यों हुए मजबूर? जंग के 25वें दिन का हाल

  • 29:56
  • प्रकाशित: मार्च 24, 2026

ईरान और इजरायल के बीच जारी जंग को आज पूरे 25 दिन हो चुके हैं, लेकिन युद्धविराम की संभावनाओं के बीच भी ज़मीनी हालात बेहद भयावह बने हुए हैं. बीती रात से ईरान, लेबनान और इराक के कई इलाकों में ज़ोरदार धमाकों की खबरें सामने आई हैं. एक ओर कूटनीतिक बातचीत शुरू होने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इजरायल और ईरान की सैन्य कार्रवाइयों ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है.

24 दिन, 24 तस्वीरें: जंग की भयावह तस्वीर

28 फरवरी से शुरू हुई यह जंग अब अपने 25वें दिन में प्रवेश कर चुकी है. बीते 24 दिनों में तेहरान से लेकर दक्षिणी लेबनान तक तबाही के कई भयावह दृश्य सामने आए हैं. रिहायशी इमारतों, सैन्य ठिकानों, मिसाइल साइट्स और पुलों पर हुए हमलों ने हालात को और बदतर बना दिया है. तेहरान में रक्षा मंत्रालय से जुड़ी इमारतों पर हमले हुए, मिसाइल बेस तबाह किए गए और कई इलाकों में आग और धुएं का गुबार फैल गया. वहीं दक्षिणी लेबनान में चेतावनी के बाद अल‑कासिमिया ब्रिज को उड़ा दिया गया.

ट्रंप का दावा बनाम ज़मीनी सच्चाई

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान से बातचीत हुई है और हमलों को 5 दिनों के लिए रोकने पर विचार किया जा रहा है. ट्रंप का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच कई अहम बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है और सीजफायर की दिशा में बातचीत आगे बढ़ रही है. हालांकि इन दावों के बावजूद बीती रात इजरायल ने ईरान और लेबनान में कई ठिकानों पर हमले किए. इजरायली वायुसेना ने तेहरान और उसके आसपास के इलाकों में 100 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है, जिनमें IRGC एयर डिफेंस, ग्राउंड फोर्स मुख्यालय और ऑपरेशनल इंटेलिजेंस सेंटर शामिल हैं.

नेतन्याहू का सख़्त संदेश

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा है कि जब तक देश की सुरक्षा हितों की गारंटी नहीं मिल जाती, तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी. नेतन्याहू ने कहा, “हम ईरान को उसकी हैसियत दिखाते रहेंगे. हमारी पहुंच और मारक क्षमता की कोई सीमा नहीं है.” उनके इस बयान ने ट्रंप के युद्धविराम वाले दावों पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं.

ईरान का जवाब: बातचीत की पुष्टि से इनकार

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा है कि अमेरिका की ओर से मित्र देशों के जरिए संदेश जरूर मिले हैं, लेकिन ईरान ने किसी सीधी बातचीत या सहमति की पुष्टि नहीं की है. ईरान का कहना है कि हर फैसला उसके राष्ट्रीय सिद्धांतों के अनुसार लिया जाएगा. ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि जंग उनके लिए थमी नहीं है और वे इसे अपनी जीत मानते हैं, न कि युद्धविराम.

पर्दे के पीछे डील?

इजरायली मीडिया में दावा किया जा रहा है कि ईरानी संसद प्रमुख मोहम्मद बाकर ग़ालीबाफ और अमेरिका के कुछ प्रभावशाली नेताओं के बीच बैक‑चैनल बातचीत चल रही है. हालांकि सवाल उठ रहे हैं कि क्या गालीबाफ को IRGC का समर्थन हासिल है या इससे ईरान के भीतर राजनीतिक टकराव और गहरा सकता है.

इराक के इरबिल पर हमला

इस बीच इराक के इरबिल में भी हमले की तस्वीरें सामने आई हैं. खुले आसमान में उठता धुएं का गुबार और क्लस्टर बम के इस्तेमाल की आशंका ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी. लोगों की चीख‑पुकार ने हमले की भयावहता को बयान कर दिया.

होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा खतरा

होर्मुज स्ट्रेट, जहां से भारत समेत दुनिया का 60–65% कच्चा तेल गुजरता है, युद्ध का सबसे संवेदनशील बिंदु बना हुआ है. ईरान ने साफ कहा है कि दुश्मन देशों को तेल और गैस की सप्लाई नहीं होने दी जाएगी. एनडीटीवी की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों और तबाह किए गए ऑयल टैंकरों की तस्वीरें सामने आई हैं.

दुनिया की निगाहें अगले 5 दिनों पर

ट्रंप के ऐलान से भले ही तेल बाजार और शेयर मार्केट में अस्थायी राहत मिली हो, लेकिन सवाल अब भी कायम है. क्या ये पांच दिन कूटनीति की जीत साबित होंगे या किसी और बड़े महायुद्ध की भूमिका? फिलहाल दुनिया सांस रोके हुए है और हर नजर ईरान‑इजरायल युद्ध के अगले कदम पर टिकी हुई है.

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