मिडिल ईस्ट में चल रही भीषण जंग को अब लगभग एक महीना होने जा रहा है. इस बीच लड़ाई केवल जंग के मैदान में ही नहीं, बल्कि अमेरिका के भीतर भी तेज हो गई है. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. लाखों लोग सड़कों पर उतरकर “ट्रम्प इस्तीफा दो” के नारे लगा रहे हैं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस जंग की अब कोई ज़रूरत नहीं है और इससे केवल तबाही बढ़ रही है.
अमेरिका के भीतर बढ़ते विरोध के बीच ट्रम्प ने बड़ा सैन्य कदम उठाया है. जमीनी जंग की आशंका के संकेत मिलने लगे हैं. अमेरिका ने अपने खास मरीन कमांडोज मिडिल ईस्ट की ओर भेज दिए हैं. अमेरिकी नौसेना का अत्याधुनिक युद्धपोत USS ट्रिपोली, जो पहले जापान के पास तैनात था, अब मिडिल ईस्ट के जल क्षेत्र में पहुंच चुका है.
USS ट्रिपोली से जमीनी ऑपरेशन की तैयारी?
USS ट्रिपोली अमेरिका का खास एम्फीबियस असॉल्ट शिप है, जो समुद्र, हवा और जमीन—तीनों स्तरों पर हमला करने में सक्षम माना जाता है. करीब 45,000 टन वजनी इस युद्धपोत को “लाइटनिंग कैरियर” भी कहा जाता है. इस पर F-35 जैसे अत्याधुनिक फाइटर जेट तैनात हैं और यहीं से अमेरिकी मरीन कमांडोज को खाड़ी क्षेत्र में उतारा गया है. बताया जा रहा है कि करीब 3,500 अतिरिक्त अमेरिकी सैनिक मिडिल ईस्ट में तैनात किए जा चुके हैं.
इस सैन्य तैनाती को 15 दिन के सीजफायर से जोड़कर देखा जा रहा है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सीजफायर वास्तव में जमीनी हमले की तैयारी के लिए एक रणनीतिक चाल था?
ईरान का खुला संदेश: “आओ, हम तैयार हैं”
दूसरी ओर, ईरान भी पूरी तरह आक्रामक मूड में नजर आ रहा है. ईरानी सेना ने वीडियो जारी कर साफ संदेश दिया है कि वह अमेरिकी सेना का इंतजार कर रही है. ईरान के अखबार तेहरान टाइम्स में छपे एक पोस्टर ने हालात को और भड़का दिया है. पोस्टर पर लिखा है- “Welcome to Hell”, जिसमें अमेरिकी कमांडोज की तस्वीर के साथ चेतावनी दी गई है कि अगर अमेरिकी सैनिक ईरान में दाखिल हुए तो वे “ताबूत में लौटेंगे.”
इसके बाद ईरान ने एक एआई जनरेटेड वीडियो भी जारी किया है, जिसमें अमेरिकी सैनिकों के ताबूत ले जाते हुए दृश्य दिखाए गए हैं। इस वीडियो के जरिए ईरान दावा कर रहा है कि उसने संभावित जमीनी जंग की पूरी तैयारी कर ली है.
आसमान और जमीन दोनों मोर्चों पर लड़ाई
हवाई मोर्चे पर अमेरिका ने अपने B-52 स्ट्रैटेजिक बॉम्बर ब्रिटेन में तैनात कर दिए हैं। इसके साथ ही अमेरिकी फाइटर जेट, इजराइली विमानों को आसमान में ईंधन भरते हुए देखे गए हैं, जिससे इजराइल को लंबे समय तक हवाई हमले करने में मदद मिल रही है.
इसी बीच तेहरान के रिहायशी इलाकों पर मिसाइल हमलों की खबरें आई हैं। वहीं ईरान ने भी इजराइल पर जवाबी हमले किए हैं, जिनके बाद कई इलाकों में हड़कंप मच गया.
होरमुज, तेल संकट और जंग का नया मोर्चा?
सबसे बड़ा सवाल अब होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर है. क्या अमेरिका इसे खुलवाने के लिए जमीनी ऑपरेशन शुरू करेगा? और क्या इसी वजह से ट्रम्प ने पहले 15 दिन के सीजफायर का ऐलान किया था?
ईरान का दावा है कि जैसे ही उसे अमेरिकी जमीनी हमले की खबर मिली, उसने अमेरिकी ठिकानों पर हमले तेज कर दिए. सऊदी अरब में अमेरिका के कीमती सैन्य विमानों को तबाह करने का दावा भी किया गया है. ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी सैनिक ईरान की धरती पर उतरे, तो उन्हें “पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा.”
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह जंग और भड़की, तो इसका सीधा असर दुनिया की तेल और गैस सप्लाई पर पड़ेगा, जिससे वैश्विक आर्थिक संकट और गहरा सकता है.
क्या जमीनी जंग की ओर बढ़ रहा है मिडिल ईस्ट?
USS ट्रिपोली की तैनाती, मरीन कमांडोज की मौजूदगी और बढ़ती आक्रामक बयानबाजी यह संकेत दे रही है कि मिडिल ईस्ट में जंग अब एक नए और ज्यादा खतरनाक चरण में प्रवेश कर सकती है। सवाल यही है- क्या ट्रम्प का यह नया प्लान हालात को काबू में लाएगा, या दुनिया को एक और बड़े युद्ध की ओर धकेल देगा?