Supreme Court ने कहा है कि महिला का स्त्री धन उसकी पूर्ण संपत्ति है उसे अपनी मर्जी से खर्च करने का पूरा अधिकार है । ये कभी भी उसके पति के साथ संयुक्त संपत्ति नहीं बन सकती । संकट के समय में पति इसका उपयोग कर सकता है लेकिन इसे या इसके मूल्य को पत्नी को लौटाना पति का दायित्व है