लड़ो और मरो की मशीन लगा दी... यूजीसी को लेकर शंकराचार्य का सरकार पर हमला, देखें VIDEO

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  • प्रकाशित: जनवरी 29, 2026

शंकराचार्य ने हाल ही में पारित कानून और उससे जुड़े विवादों पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह कानून “सनातन धर्म को क्षति पहुंचाने वाला” है और इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए. शंकराचार्य का कहना है कि इस मुद्दे पर वे लगातार विरोध में हैं और उनकी प्राथमिक मांग है कि सरकार अपनी गलती सुधारते हुए कानून को रद्द करे.

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पर प्रतिक्रिया
कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई को लेकर शंकराचार्य ने कहा कि अदालत का दायरा सीमित है. उनके अनुसार, "सुप्रीम कोर्ट केवल यह देखेगा कि कानून में कोई संवैधानिक त्रुटि है या नहीं. यदि कोई क्लास या प्रावधान गलत पाया गया, तो उसमें सुधार हो सकता है, लेकिन कानून को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, क्योंकि वह संसद से पास हो चुका है. उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार साफ़ कह चुकी है कि “संसद का कानून सबको मानना पड़ेगा”, इसलिए न्यायिक विकल्प सीमित हैं.

‘सवर्ण समाज सड़कों पर है, बाकी समाज को भी विरोध करना चाहिए’
कानून के विरोध में जारी प्रदर्शनों पर शंकराचार्य ने कहा कि केवल सवर्ण समाज ही नहीं, बल्कि वह दूसरा समुदाय भी प्रभावित होगा जिसे इस पूरी बहस में अलग-दूसरे के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है. उन्होंने कहा, “एक ही हिंदू समुदाय को दो समुदायों में बांटा जा रहा है. इस विभाजन से दोनों की हानि होगी. उन्होंने इसे “हिंदू समाज में विभाजन का खतरनाक प्रयोग” बताया जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता.

आरोप: ‘सरकार का अहंकार सामने आ गया, 11 दिन तक मौका दिया’
कानून के विरोध में बैठे साधुओं के साथ हुई घटनाओं पर शंकराचार्य ने कहा कि सरकार ने शांतिपूर्ण विरोध के बावजूद संवेदनशीलता नहीं दिखाई. उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध के दौरान बटुकों (युवा साधुओं) के साथ दुर्व्यवहार हुआ, उनकी चोटी पकड़कर अपमानित किया गया. वीडियो पूरे देश में देखे गए लेकिन राज्य सरकार ने किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की. “जांच की बात होती रही, लेकिन न कोई समिति बनी, न कोई कदम उठा.”उन्होंने कहा कि यह सब “तानाशाही के संकेत” हैं और जनता इसे देख रही है.

यूजीसी नियमों पर भी गहरी आपत्ति
शंकराचार्य ने यूजीसी द्वारा जारी नियमों को सनातन धर्म के लिए “बड़ा खतरा” बताया.
उन्होंने कहा, "सनातन परंपरा में जातियों का उद्देश्य संघर्ष नहीं, बल्कि आजीविका और परंपरा की रक्षा रहा है. नए नियमों ने एक जाति को दूसरी जाति के विरुद्ध खड़ा कर दिया है, जिससे संघर्ष और अशांति बढ़ेगी. यह सनातन धर्म को कमजोर करने वाला कदम है. उनके अनुसार, “यूजीसी ने ऐसा प्रावधान लाकर जैसे ‘लड़ो और मरो’ की मशीन लगा दी हो.”
 

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