रवीश कुमार का प्राइम टाइम : भयावह और विकराल होता जाता श्रमिक स्पेशल का सफर

27 दिन हो गए श्रमिक स्पेशल के चलते हुए लेकिन हर दिन के साथ इस श्रमिक स्पेशल में सफर करने का अनुभव और भी भयावह और विकराल होता जा रहा है. ये गाड़ियां पहुंचने में 80 से 90 घंटे का वक्त ले रही हैं. इस वक्त में गाड़ी में चढ़ने का समय भी जोड़ सकते हैं क्योंकि स्क्रीनिंग सेंटर में लंबे इंतजार के बाद इन श्रमिकों को गाड़ी में चढ़ने दिया जाता है. ट्रेन का यह सफर बिना खाने-पीने के गर्मी में तय किया जा रहा है. ऐसे में कई यात्रियों की तबियत खराब हो जा रही है.

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