1967 में दार्जिलिंग जिले के नक्सलबाड़ी गांव से शुरू हुआ नक्सल आंदोलन पूरे देश में फैल गया था. यही वह जगह है जहां से सामंतवाद के खिलाफ एक विचारधारा ने जन्म लिया. आज भी नक्सलबाड़ी में उस दौर की याद के रूप में स्मारक मौजूद है, जिसमें कार्ल मार्क्स से लेकर चारू मजूमदार और सरोज दत्ता तक के नाम शामिल हैं. कभी देश के बड़े हिस्से को जकड़ने वाला नक्सलवाद अब अपने अंत की ओर बताया जा रहा है. नक्सलबाड़ी से NDTV की खास ग्राउंड रिपोर्ट.