ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई का अंतिम संस्कार दुनिया की सबसे बड़ी खबर बन चुका है. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के साझा हमलों में उनकी मौत हुई और उसके ठीक 4 महीने बाद जब तेहरान की सरजमी पर जनाजा निकला सड़कें कम पड़ गईं. इस भीषण गर्मी के बीच तापमान जहां 30°C से ऊपर का आंकड़ा पार कर रहा है, वहां लाखों करोड़ों लोगों का ये हुजूम चीख-चीख कर कह रहा है कि जंगे हथियारों से जीती जा सकती है, लेकिन किसी कौम के इरादों को मिसाइलों से कुचरा नहीं जा सकता है. जब तेहरान की सड़कों पर लाखों करोड़ों लोग रो रहे थे, छाती पीट रहे थे, तब 7 समंदर पार अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों में एक अजीब-सी छटपटाहट और टीज दिखाई दी. एक्सिस को दिए एक इंटरव्यू में ट्रम्प कहते नजर आए, 'मैं ये देख कर हैरान हूं कि लोग रो रहे हैं. मुझे लगा था की लोग खामनेई से नफरत करते हैं, मुमकिन है कि नकली आंसू हो. गुरूर और हताशा का ये मिला जुला रूप यहीं नहीं रुका. ट्रंप आगे एक ऐसी धमकी देते है, जो किसी भी सभ्य कूटनीति के माथे पर कलंक की तरह है.