आचार्य बालकृष्ण ने कहा, "यह हमारा सौभाग्य रहा कि भारत के विभिन्न आध्यात्मिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि के रूप में हमें ईरान के माननीय राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेशकियन से मिलने का अवसर मिला. कार्यक्रम में उनका भी संबोधन था और मेरा भी."
उन्होंने कहा, "मैं ईरान जा चुका हूं और वहां के लोगों तथा उनकी भावनाओं को नजदीक से समझा है. अगर भारत और ईरान के रिश्तों की बात करें, तो दोनों देशों के संबंध हजारों साल पुराने हैं. इसी सिलसिले में हमें आमंत्रित किया गया था और इस मुलाकात का अनुभव बेहद सकारात्मक रहा."
जब उनसे पूछा गया कि क्या यह मुलाकात ईरानी दूतावास की ओर से आयोजित की गई थी, तो उन्होंने कहा, "जी हां, ईरानी दूतावास की ओर से हमें निमंत्रण मिला था. हमें इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था. मुझे यह अवसर अच्छा लगा क्योंकि ईरान के बारे में मैं यही कहना चाहूंगा कि वहां के लोग बेहद स्वाभिमानी हैं और अपनी संस्कृति व मूल्यों के प्रति समर्पित हैं."