लोकसभा में तीन अहम विधेयकों पर चल रही चर्चा के बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दक्षिण भारत को लेकर फैलाए जा रहे “नैरेटिव” पर विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने साफ किया कि प्रस्तावित संविधान संशोधन, डीलिमिटेशन कानून और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े चुनावी बदलावों से दक्षिणी राज्यों की लोकसभा में ताकत कम नहीं होगी, बल्कि बढ़ेगी।
गृह मंत्री ने कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल के मौजूदा और प्रस्तावित सीटों का आंकड़ों के साथ विश्लेषण करते हुए कहा कि 50 प्रतिशत सीट वृद्धि के बाद भी इन राज्यों का प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा 543 सदस्यीय लोकसभा की तुलना में प्रस्तावित 816 सीटों वाली नई लोकसभा में दक्षिण भारत की कुल हिस्सेदारी करीब 24 प्रतिशत हो जाएगी।
अमित शाह ने जाति जनगणना को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने अगली जनगणना को जाति जनगणना के रूप में कराने का निर्णय ले लिया है। उन्होंने समझाया कि वर्तमान चरण में घरों और भवनों की गणना होती है, जबकि जाति की गणना व्यक्तियों के स्तर पर बाद में की जाती है।
उन्होंने महिला आरक्षण, लोकसभा सीटों की कुल संख्या, डीलिमिटेशन कमीशन की भूमिका और 2029 से पहले किसी भी नए परिसीमन के लागू न होने पर भी स्पष्ट जवाब दिया। गृह मंत्री ने कहा कि डीलिमिटेशन कमीशन एक्ट में कोई बदलाव नहीं किया गया है और सभी आगामी चुनाव पुराने ढांचे के तहत ही होंगे।
लोकतंत्र को कमजोर करने के आरोपों पर पलटवार करते हुए अमित शाह ने कहा कि भारत में सत्ता जनता के वोट से बनती है और 130 करोड़ लोगों के जनमत को कोई भी राजनीतिक दल मैनिपुलेट नहीं कर सकता। उन्होंने आपातकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत का लोकतंत्र पहले भी मजबूत रह चुका है और आगे भी रहेगा।
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