पहचान छुपाकर शादी करने वालों की अब खैर नहीं, उत्तराखंड में UCC संशोधन अध्यादेश लागू

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) संशोधन अध्यादेश लागू हो गया है. इसमें शादी और लिव-इन में दबाव, धोखाधड़ी के लिए कठोर दंड होगा. विवाह में गलत जानकारी देना विवाह तोड़ने का आधार होगा. ये संशोधन UCC को स्पष्ट, प्रभावी और व्यावहारिक बनाने के लिए हैं.

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  • उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता के प्रावधानों में सुधार के लिए संशोधन अध्यादेश को तत्काल प्रभाव से लागू
  • अध्यादेश के तहत शादी और लिव-इन रिलेशन में दवाब, धोखाधड़ी जैसे कृत्यों के लिए सख्त दंडात्मक प्रावधान जोड़े गए
  • लिव-इन रिलेशन के खत्म होने पर प्रशासन द्वारा समाप्ति प्रमाण पत्र जारी करने का नियम
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देहरादून:

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) के विभिन्न प्रावधानों में सुधार के लिए लाए गए संशोधन अध्यादेश को सोमवार को लागू कर दिया गया, जिसके तहत शादी और लिव-इन रिलेशंस में दवाब और धोखाधड़ी जैसे कामों के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधान करने समेत करीब डेढ़ दर्जन संशोधन किए गए हैं. उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) की स्वीकृति मिलने के बाद तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया.

अध्यादेश में क्‍या-क्‍या?

उत्‍तराखंड सरकार यूसीसी 2024 में आवश्यक संशोधनों के लिए यह अध्यादेश लाई है. इन संशोधनों का उद्देश्य समान नागरिक संहिता के प्रावधानों को अधिक स्पष्ट, प्रभावी एवं व्यावहारिक बनाना, प्रशासनिक दक्षता को सुदृढ़ करना तथा नागरिकों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना है. अध्यादेश में विवाह के समय पहचान से संबंधित गलत जानकारी को विवाह तोड़ने का आधार बना दिया गया है, जबकि विवाह एवं लिव-इन रिलेशन में बल, दबाव, धोखाधड़ी अथवा विधि-विरुद्ध कृत्यों के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं. 

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लिव-इन रिलेशन को लेकर अध्‍यादेश में क्‍या?

लिव-इन रिलेशन के खत्‍म होने पर प्रशासन द्वारा 'समाप्ति प्रमाण पत्र' जारी किए जाने का प्रावधान किया गया है जबकि ‘विधवा' शब्द को ‘जीवनसाथी' से प्रतिस्थापित किया गया है. संशोधन अध्यादेश में विवाह, तलाक, लिव-इन रिलेशन एवं उत्तराधिकार से संबंधित रजिस्‍ट्रेशन को रद्द करने की शक्ति महापंजीयक (Registrar General) को प्रदान की गई है.

ये प्रावधान जोड़ा गया

इसके अलावा, आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 के स्थान पर अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 तथा दंडात्मक प्रावधानों के लिए भारतीय न्याय संहिता, 2023 को लागू किया गया है जबकि उप-पंजीयक द्वारा निर्धारित समय-सीमा में कार्यवाही न किए जाने की स्थिति में प्रकरण स्वतः पंजीयक एवं महापंजीयक को अग्रेषित किए जाने का प्रावधान किया गया है. अध्यादेश में उप-पंजीयक पर लगाए गए दंड के विरुद्ध अपील का अधिकार दिया गया है और दंड की वसूली भू-राजस्व की तरह किए जाने का प्रावधान जोड़ा गया है. उत्तराखंड स्वतंत्र भारत में यूसीसी लागू करने वाला पहला प्रदेश है. पिछले साल 27 जनवरी को प्रदेश में यूसीसी लागू किया गया था.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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