उत्तराखंड में साल-दर-साल बढ़ रही हैं सड़क दुर्घटनाएं, 2025 में 1242 लोगों की मौत, आंकड़े चिंताजनक

उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं और मरने वालों की संख्या भी बढ़ रही है. राज्य के पहाड़ी और मैदानी रास्तों पर सड़क दुर्घटनाओं की वजह ओवर स्पीड, लगातार वाहन चलाना, वाहनों का समय पर मेंटेनेंस नहीं करना, जैसे कई कारण शामिल हैं.

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  • उत्तराखंड में 2025 में कुल 1846 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 1242 लोगों की मौत और 2056 लोग घायल हुए
  • देहरादून, हरिद्वार और उधम सिंह नगर जिलों में सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं और मौतें दर्ज की गईं
  • पहाड़ी क्षेत्रों में ओवरस्पीड, वाहन मेंटेनेंस की कमी और अनुचित चालक चयन सड़क दुर्घटनाओं के मुख्य कारण हैं
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देहरादून:

उत्तराखंड में लगातार ट्रैफिक बढ़ रहा है और उसके साथ दुर्घटनाएं भी बढ़ रही हैं. इस साल 1 जनवरी से अब तक सड़क दुर्घटनाओं में राज्य में 36 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं 130 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. साथ ही तीन लोग अभी भी लापता हैं. साल 2025 में उत्तराखंड में 1846 दुर्घटनाएं हुईं थी, जिसमें 1242 लोगों की मौत हुई थी. यही नहीं 2056 लोग घायल भी हुए थे. इसके अलावा राज्य में साल भर में अलग-अलग हादसों या आपदाओं में 151 लोगों की मौत हो चुकी है. 172 लोग घायल हुए और 86 लोग अभी भी लापता हैं.

उत्तराखंड में दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं, जो राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है. ऐसे में सड़क सुरक्षा को लेकर कई बैठकें हुई हैं. इसके अलावा सड़क सुरक्षा से संबंधित तमाम विभागों को भी दिशा-निर्देश दिए गए हैं. कहा गया है कि ऐसे उपाय किए जाएं ताकि राज्य में सड़क दुर्घटनाओं के मामले कम हों. राज्य में ब्लैक स्पॉट को चिन्हित किया जाए, सड़कों की मरम्मत की जाए सड़कों में गड्ढे ना हों, इसके अलावा कैमरे, पहाड़ी रास्तों पर क्रैश बैरियर जैसे कई ऐसे उपाय हैं जिसे सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है.

प्रदेश में 2025 में देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं. यही नहीं साल 2023, साल 2024 में भी देहरादून, हरिद्वार और उधम सिंह नगर में ही सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं हुईं, इ्नमें से देहरादून में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटना हुई. इसके अलावा उधम सिंह नगर दूसरे नंबर पर और हरिद्वार तीसरे नंबर पर है. वहीं सड़क दुर्घटनाओं में चौथे नंबर पर नैनीताल जिला आता है.

  • साल 2025 में राज्य में 1846 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिसमें 1242 लोगों की मौत हुई. इसके अलावा 2056 लोग घायल हुए.
  • साल 2025 में उत्तरकाशी में 20 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिसमें 14 लोगों की मृत्यु हुई और 75 लोग घायल हुए.
  • टिहरी जिले में साल 2025 में 62 सड़क दुर्घटना हुई, जिसमें 59 लोग मारे गए और 149 लोग घायल हुए.
  • चमोली जिले में साल 2025 में 50 सड़क दुर्घटना हुईं, जिसमें 49 लोगों की मौत हुई और 80 लोग घायल हुए.
  • रुद्रप्रयाग जिले में साल 2025 में 31 सड़क दुर्घटना हुई और 34 लोगों की मौत हुई, 45 लोग घायल हुए.
  • पौड़ी जिले में साल 2025 में 38 सड़क दुर्घटनाएं हुईं. 25 लोगों की मौत हुई और 76 लोग घायल हुए.
  • देहरादून जिले में साल 2025 में 450 सड़क दुर्घटना हुईं, जिसमें 229 लोगों की मौत हुई और 407 लोग घायल हुए.
  • हरिद्वार जिले में साल 2025 में 412 सड़क दुर्घटना हुईं जिसमें 283 लोगों की मौत हुई और 404 लोग घायल हुए.
  • नैनीताल जिले में साल 2025 में 257 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिसमें 166 लोगों की मौत हुई और 305 लोग घायल हुए.
  • उधम सिंह नगर जिले में 424 सड़क दुर्घटना हुईं, जिसमें 295 लोगों की मौत हुई और 338 लोग घायल हुए.
  • अल्मोड़ा जिले में साल 2025 में 33 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिसमें 24 लोगों की मौत हुई और 44 लोगों को घायल हुए.
  • पिथौरागढ़ जिले में साल 2025 में 36 सड़क दुर्घटना हुई, 38 लोगों की मौत हुई और 56 लोग घायल हुए.
  • चंपावत जिले में साल 2025 में 20 सड़क दुर्घटना हुई. 17 लोगों की मौत हुई और 36 लोग घायल हुए.
  • बागेश्वर जिले में साल 2025 में 13 सड़क दुर्घटना हुई, जिसमें 12 लोगों की मौत हुई और 11 लोग घायल हुए.

उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या साल दर साल बढ़ रही है. साल 2025 में साल 2024 से करीब 5.67 प्रतिशत दुर्घटनाएं अधिक रही. इसी तरह साल 2025 में सड़क दुर्घटनाओं में लोगों की मृत्यु का प्रतिशत साल 2024 से 13.94 अधिक रहा. साल 2025 में घायलों की संख्या 2024 से 32.90 अधिक रही.

आंकड़े दर्शाते हैं कि किस तरीके से राज्य में सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं. मरने वालों की संख्या भी बढ़ रही है और घायलों की संख्या भी अधिक हो रही है. राज्य के पहाड़ी और मैदानी रास्तों पर सड़क दुर्घटनाओं की वजह ओवर स्पीड, लगातार वाहन चलाना, वाहनों का समय पर मेंटेनेंस नहीं करना, जैसे कई कारण शामिल हैं. राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों की बात करें तो उसमें परिवहन विभाग को सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए और कड़े नियम लागू करने होंगे, जिसमें पर्वतीय क्षेत्रों में रात को वाहनों को चलने की परमिशन न दी जाए, वाहनों का सही से मेंटेनेंस होना चाहिए.

इसके अलावा पर्वतीय क्षेत्रों पर अनुभवी वाहन चालकों को ही परमिशन होनी चाहिए, तो दूसरी तरफ मैदानी क्षेत्रों में तेज गति सबसे ज्यादा वाहन दुर्घटना का कारण हैं. इसके अलावा वाहन चलाते हुए अक्सर वाहन चालक नशा करते हैं. वहीं मैदानी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा ट्रैफिक सिग्नल का पालन नहीं करना और कम उम्र के बच्चों का वाहन चलाना भी देखा जाता रहा है.

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