हरिद्वार में नॉनवेज डिलीवरी विवाद: संतों का विरोध तेज, रैपिडो का पुतला फूंका

Haridwar Non Veg Delivery: हरिद्वार में नॉनवेज डिलीवरी को लेकर संतों का विरोध तेज, रैपिडो कंपनी का पुतला दहन, निगम की कार्रवाई पर असंतोष. पढ़िए पूरी खबर.

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हरिद्वार में नॉनवेज डिलीवरी को लेकर विवाद बढ़ा; संतों ने रैपिडो कंपनी का पुतला फूंका, सख्त कार्रवाई की मांग की

Haridwar Non Veg Delivery: हरिद्वार में नॉनवेज फूड डिलीवरी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. तीर्थनगरी की धार्मिक मर्यादाओं के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए संतों और हिंदूवादी संगठनों ने रैपिडो कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. आरोप है कि हरकी पौड़ी और गंगा घाटों के आसपास ऑनलाइन माध्यम से पके मांस की डिलीवरी की जा रही थी. इस मामले में सत्यता की पुष्टि के बाद संतों ने कड़ा विरोध जताया और नगर निगम द्वारा केवल नोटिस जारी करने की कार्रवाई को नाकाफी बताया. इसी के विरोध में रानीपुर क्षेत्र में संतों ने रैपिडो कंपनी का पुतला दहन किया और चेतावनी दी कि यदि जल्द कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.

स्टिंग ऑपरेशन में नॉनवेज डिलीवरी का दावा

संतों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से यह सूचना मिल रही थी कि हरकी पौड़ी के आसपास स्थित होटलों, धर्मशालाओं और घाटों पर ऑनलाइन ऐप के जरिए नॉनवेज भोजन की डिलीवरी की जा रही है. इस पर संदेह होने के बाद संतों ने खुद स्टिंग ऑपरेशन किया. उनका दावा है कि कुछ ही मिनटों में ऑनलाइन ऑर्डर किए गए नॉनवेज भोजन की डिलीवरी हो गई, जिससे यह पुष्टि हुई कि धर्मनगरी की सीमाओं के भीतर इस प्रकार की सेवाएं संचालित हो रही हैं.

Haridwar Non Veg Delivery: संत समाज का गुस्सा

विवाद बढ़ा, निगम ने जारी किया नोटिस

इस मामले के सामने आने के बाद हिंदूवादी संगठनों और संत समाज में नाराजगी बढ़ गई. विरोध को देखते हुए नगर निगम प्रशासन ने संबंधित कंपनी को नोटिस जारी किया. हालांकि संतों का कहना है कि केवल नोटिस देना पर्याप्त कार्रवाई नहीं है. उनका आरोप है कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े इतने गंभीर मुद्दे पर प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए थे.

रैपिडो कंपनी का पुतला दहन, उग्र विरोध

नगर निगम की कार्रवाई से असंतुष्ट संतों ने हरिद्वार के रानीपुर क्षेत्र में प्रदर्शन किया. इस दौरान उन्होंने रैपिडो कंपनी का पुतला दहन कर अपना विरोध जताया. संतों ने प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया कि अगर जल्द ही कंपनी के खिलाफ कड़ी और दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है. प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में संत और समर्थक मौजूद रहे.

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धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप

संत समाज का कहना है कि हरिद्वार केवल एक शहर नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है. ऐसे स्थान पर गंगा घाटों के आसपास नॉनवेज फूड की डिलीवरी धार्मिक मर्यादाओं का उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि गंगा तट की पवित्रता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है और इस तरह की गतिविधियां उस पवित्रता के खिलाफ हैं.

संतों ने उठाई कड़ी कार्रवाई की मांग

पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने कहा कि हरिद्वार में हर साल लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए आते हैं. ऐसे में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए नॉनवेज की डिलीवरी न केवल धार्मिक भावना को आहत करती है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी चिंता का विषय है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आज इसे नहीं रोका गया, तो भविष्य में और भी गंभीर या संदिग्ध सामग्री की डिलीवरी हो सकती है. उन्होंने मांग की कि गंगा घाटों के आसपास इस तरह की गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाई जाए.

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लाइसेंस निरस्त करने की भी उठी मांग

संत स्वामी कार्तिक गिरी महाराज ने कहा कि केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है. उन्होंने मांग की कि संबंधित कंपनी का लाइसेंस रद्द किया जाना चाहिए. उनके अनुसार, धर्मनगरी में नॉनवेज डिलीवरी करना "अधर्म" है और इस पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि जब डिलीवरी के सबूत मौजूद हैं, तो प्रशासन को तत्काल मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए.

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

अखंड परशुराम अखाड़ा के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि नगर निगम द्वारा की गई कार्रवाई से संत समाज संतुष्ट नहीं है. उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो संत देहरादून स्थित कंपनी के मुख्य कार्यालय पर भी प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे.

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