Vijay Mishra: यूपी के प्रयागराज की MP/MLA कोर्ट द्वारा 46 साल पुराने प्रकाश नारायण पांडेय हत्याकांड में उम्रकैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाए जाने के बाद पूर्व बाहुबली विधायक पंडित विजय मिश्र का सियासी और आपराधिक साम्राज्य पूरी तरह ढह गया है. 11 फरवरी 1980 को इलाहाबाद कचहरी में हुए उस खूनी खेल का हिसाब आज 13 मई 2026 में जाकर पूरा हुआ, जिसने उत्तर प्रदेश के एक रसूखदार बाहुबली को उम्रभर के लिए सलाखों के पीछे भेज दिया है. 23 की उम्र में मर्डर किया था और अब 69 की उम्र में आजीवन कारावास की सजा पाई है.
Vijay Mishra Vidhayak Gyanpur: ज्ञानपुर सीट पर 20 साल तक रहा एकछत्र राज
उत्तर प्रदेश की सियासत में विजय मिश्र वो नाम है, जिसका भदोही जिले की ज्ञानपुर सीट पर दो दशकों तक कब्जा रहा. साल 2002 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश की सत्ता किसी के भी पास रही हो, लेकिन ज्ञानपुर की चाबी विजय मिश्र के पास ही रही. वो लगातार चार बार विधायक चुना गया. तीन बार समाजवादी पार्टी के सिंबल पर और एक बार निषाद पार्टी के टिकट पर.
हालांकि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में ज्ञानपुर की जनता ने मिश्र की विजय के तिलस्म को तोड़ दिया. 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में निषाद पार्टी ने उनका टिकट काटकर विपुल दुबे को प्रत्याशी बनाया. इसके बाद विजय मिश्र ने प्रगतिशील मानव समाज पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़ा, लेकिन तीसरे स्थान पर रहा. विपुल दुबे ने 6,231 वोटों से जीत दर्ज की.
इलाहाबाद से आगरा जेल तक का सफर
7 सितंबर 1957 को प्रयागराज (इलाहाबाद) के खपतिहा में जन्मे विजय मिश्र का आपराधिक ग्राफ उनकी राजनीति के साथ-साथ बढ़ता गया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2007 तक विजय मिश्र के खिलाफ दर्ज जिन मुकदमों की संख्या 30 थी, वह नवंबर 2023 तक बढ़कर 83 पहुंच गई. हत्या और रंगदारी जैसे संगीन मामलों के अलावा उस पर वाराणसी की एक गायिका से दुष्कर्म का भी आरोप लगा. फिलहाल वो आगरा जेल की सलाखों के पीछे है.
प्रकाश नारायण पांडेय हत्याकांड क्या है?
प्रयागराज की MP/MLA कोर्ट ने जिस प्रकाश नारायण पांडेय हत्याकांड में पूर्व ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्र समेत चार दोषियों को सजा सुनाई है, वह 11 फरवरी 1980 की घटना है. इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र प्रकाश नारायण पांडेय की कचहरी परिसर में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. पुरानी रंजिश के चलते अंजाम दी गई इस वारदात ने तब पूरे प्रदेश को दहला दिया था. कर्नलगंज थाने में दर्ज उस FIR के 46 साल बाद अब जाकर इंसाफ हुआ है, जिसने विजय मिश्र समेत जीत नारायण, संतराम और बलराम को उम्रभर के लिए सलाखों के पीछे भेज दिया है.
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