यूपी का वो गांव, जिसका नाम है 'तवायफ'; गांववाले बोले- नाम बदलो, बेटियों की शादी नहीं हो रही

यूपी के बलिया जिले के एक गांव का नाम 'रुपवार तवायफ' है. इसे लेकर गांववालों को कई परेशानियां झेलनी पड़ती हैं. गांववालों ने इस गांव का नाम बदलने की मांग की है.

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  • उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सिकंदरपुर तहसील में स्थित एक गांव का नाम सरकारी दस्तावेजों में रुपवार तवायफ है
  • गांव के नाम के कारण वहां की लड़कियों की शादी में समस्या आती है और लोग नाम बताने में शर्म महसूस करते हैं
  • ग्रामीणों के अनुसार यह नाम सदियों पुराना है और वेश्याओं के रहने के कारण इस गांव का नाम ये पड़ गया
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बलिया:

अंग्रेजी लेखक विलियम शेक्सपियर ने कहा था- नाम में क्या रखा है? लेकिन असल जिंदगी में नाम में ही सबकुछ रखा है. जरा कल्पना करिए एक ऐसे गांव की जिसका नाम वहां के लोगों के लिए ही मुसीबत बन गया है. गांव का नाम ऐसा है कि गांववाले भी इसे बताने में शर्मिंदा होते हों. ऐसा ही एक गांव उत्तर प्रदेश में है, जो अपने नाम के कारण बदनाम है. गांववाले इसका नाम बदलने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि इसके नाम की वजह से गांव की बेटियों की शादी नहीं हो पा रही है.

यहां जिस गांव की बात हो रही है, वह यूपी के बलिया जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर सिकंदरपुर तहसील क्षेत्र में बसा है. गांव में एक स्कूल है, जिस पर गांव का नाम सिर्फ रुपवार लिखा है. लेकिन सरकारी दस्तावेजों में इसका पूरा नाम 'रुपवार तवायफ' है. 

इस गांव का नाम रुपवार तवायफ क्यों पड़ा? इसे लेकर गांव वाले इसका इतिहास बताते हैं. गांव के रहने वाले राजदेव यादव बताते हैं कि यह सदियों पुराना नाम है. बुजुर्गों से सुनते आए हैं कि यहां पर वेश्याएं रहती थीं. उन लोगों के नाम पर राजा-महाराजा और अंग्रेजों ने इस गांव को बसाया था. उन्हीं के नाम पर इस गांव का नाम रुपवार तवायफ पड़ गया. 

राजदेव यादव बताते हैं कि गांव के इस नाम से बहुत परेशानियां होती हैं. गांव का नाम बताने में भी शर्म आती है. हम लोग गांव का आधा नाम सिर्फ रुपवार ही बताते हैं. उनका कहना है कि गांव के नाम के कारण शादी-ब्याह में भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है. लड़कियों की शादी नहीं हो पाती है. उन्होंने कहा कि हमने सरकार से इस गांव का नाम बदलने की मांग की है.

गांव की रहने वाली 11वीं की छात्रा श्वेता यादव कहती हैं कि गांव के नाम के कारण सहेलियां मजाक उड़ाती हैं. वह कहती हैं कि स्कूल-कॉलेज की सहेलियां मजाक उड़ाती हैं. कुछ डॉक्यूमेंट्स दिखाते हैं तो वहां के अफसर भी देखकर कुछ-कुछ सोचने लगते हैं. हम चाहते हैं कि इसका नाम बदलकर देवपुर रखा जाए, क्योंकि आने वाली पीढ़ी को ये सब न झेलना पड़े. उसने कहा कि अगर कोई लड़की कामयाब भी हो जाती है तो इस गांव के नाम तवायफ लगे होने के कारण परेशानी आती है. वो चाहे कितने भी ऊंचे पद पर क्यों न पहुंच जाए लेकिन नाम के कारण उसे लोग अच्छी नजर से नहीं देखते हैं. 

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