- यूपी में बैटरी से चलने वाले ई‑ब्रशकटर और सोलर थ्रेशर के माध्यम से पराली जलाने की समस्या पर काबू पाया जा रहा है
- परियोजना को भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और यूपी सरकार से मंजूरी मिली है
- औरैया जिले के किसानों को 100 ई‑ब्रशकटर वितरित किए गए हैं, जो खेती की लागत कम कर पर्यावरण हितैषी हैं
पराली जलाने की समस्या कितनी बड़ी है, ये किसी से छिपा नहीं है. दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण की एक वजह पराली जलाना ही होता है. जिस पर राज्यों की सरकारों के बीच सियासत भी कोई नहीं बात नहीं है. इस बीच राहत की खबर ये है कि पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए तमाम उपाए खोजे जा रहे हैं. इसी के तहत यूपी में एक महत्वपूर्ण पहल रंग ला रही है. सौर/बिजली से चलने वाली मशीनों द्वारा धान की खेती की लागत कम करते हुए पराली जलाने की समस्या से निपटा जा रहा है.
पराली का सस्ता और पर्यावरण‑अनुकूल विकल्प
इस पहल के तहत बैटरी से चलने वाले ई‑ब्रशकटर उपलब्ध कराए गए हैं, जिनसे धान की फसल को जड़ से काटा जा सकता है. साथ ही सोलर थ्रेशर के माध्यम से फसल के अवशेषों को पशु चारे में बदला जा रहा है. इससे पराली जलाने का एक किफायती और पर्यावरण‑अनुकूल के मुफीद मिलता है, साथ ही खेती की लागत भी कम होती है. इस परियोजना को भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और उत्तर प्रदेश सरकार से मंजूरी मिली है. यह परियोजना किसानों को केंद्र में रखकर तैयार की गई है और पर्यावरण से जुड़ी एक गंभीर समस्या के लिए विस्तार योग्य समाधान पेश करती है.
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औरैया में किसानों को मिले ई‑ब्रशकटर
कार्यक्रम के तहत हाल ही में औरैया जिले के चयनित किसानों को 100 विकलप ई‑ब्रशकटर वितरित किए गए. यह परियोजना विकलप (अल्टरनेटिव फार्मटेक प्राइवेट लिमिटेड) के सहयोग से लागू की जा रही है, जो छोटे किसानों के लिए स्वच्छ ऊर्जा आधारित कृषि समाधान पर काम करने वाला एक स्टार्टअप है. किसान राम प्रकाश ने कहा, “इस मशीन का फायदा यह है कि जहां पहले 10 लोग में काम करते थे, वहीं अब एक मशीन वही काम एक दिन में कर देती है. यह जड़ से कटाई करती है, इसके बाद हम कभी भी फसल काट सकते हैं. कटाई के बाद अवशेषों को इकट्ठा कर सकते हैं, चारे के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं या सड़ने के लिए छोड़ सकते हैं, आग जलाने की जरूरत ही नहीं पड़ती.”
किसानों का अनुभव और लागत में बड़ी बचत
एक अन्य किसान पिंकी ने कहा, “इससे मेरा समय भी बचेगा और मैं इसके बारे में दूसरे किसानों को भी बताऊंगी. पहले खेतों में पराली जलाई जाती थी, जिससे प्रदूषण बढ़ता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. इसके कई फायदे हैं और सभी किसानों को इसका लाभ लेना चाहिए. इसके लिए मैं कृषि विज्ञान केंद्र का बहुत धन्यवाद करती हूं.” किसान विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि यह भारत का पहला बैटरी से चलने वाला ब्रशकटर है, जिससे रोजाना संचालन लागत काफी कम हो जाती है. उन्होंने कहा, “पेट्रोल से चलने वाली मशीनें पहले से मौजूद थीं, लेकिन उनका खर्च बहुत ज्यादा था. करीब 100 रुपये प्रति घंटे का खर्च आता था, साथ ही प्रदूषण और मेंटेनेंस की समस्या भी थी. इन्हीं परेशानियों को देखते हुए हमने नवाचार किया और यह भारत का पहला बैटरी‑चलित ब्रशकटर तैयार किया, जिसकी पूरे दिन की लागत मात्र 5 रुपये है.”
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मजदूरों की कमी की समस्या का व्यावहारिक समाधान
अल्टरनेटिव फार्मटेक प्राइवेट लिमिटेड के सह‑संस्थापक पुनीत गोयल ने एएनआई से बातचीत में कहा, “पराली जलाने की समस्या इसलिए बढ़ी क्योंकि गांवों में मजदूरों की कमी हो गई है. मजबूरी में किसान कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई करते हैं, जिससे खेत में ठूंठ बच जाता है और बाद में उसे जलाना पड़ता है. हमारी मशीनों से जड़ से कटाई होती है, जिससे कोई ठूंठ नहीं बचता. साथ ही ज्यादा मजदूरों की जरूरत नहीं पड़ती और एक व्यक्ति एक दिन में करीब एक एकड़ की कटाई कर सकता है.” भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और उत्तर प्रदेश सरकार से अनुमोदित यह परियोजना किसानों पर केंद्रित और पर्यावरण की दृष्टि से एक प्रभावी समाधान के रूप में सामने आ रही है.














