UP में योगी मंत्रिमंडल का विस्तार थोड़ी देर में, 6 नए चेहरों के साथ क्षेत्र और जाति को साधेगी BJP, पूरा गुणा-गणित

Yogi Cabinet Expansion: उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं. ऐसे में 15% मंत्री पद के नियम के हिसाब से अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं. वर्तमान में यूपी में कुल 54 मंत्री हैं. ऐसे में बाक़ी बची छह सीटों पर नए चेहरों को जगह दी जा सकती है.

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मंत्रिमंडल विस्तार से पहले राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुलाकात की है.
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  • उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार आज होगा जिसमें छह नए मंत्रियों को जगह मिल सकती है.
  • विस्तार में अवध और पश्चिमी यूपी को विशेष तवज्जो दी जाएगी क्योंकि पीएम मोदी और सीएम योगी पूर्वांचल से हैं.
  • पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी सहित मनोज पांडेय, पूजा पाल सहित कई विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है.
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लखनऊ:

UP Yogi Cabinet Expansion Updates: उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार का बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार थोड़ी देर में होगा होगा. योगी आदित्यनाथ के दूसरे कार्यकाल का ये आखिरी विस्तार हो सकता है क्योंकि अगले साल की शुरुआत में विधानसभा के चुनाव होने हैं. इस विस्तार में क्षेत्र और जाति का विशेष ख्याल रखकर नए चेहरों को जगह दी जा सकती है. सूत्र बता रहे हैं कि पुराने मंत्रियों को हटाए बिना छह नए मंत्रियों को मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है. 

कहा जा रहा है कि इस विस्तार में अवध और पश्चिम को ज्यादा तवज्जो मिल सकती है, क्योंकि खुद पीएम मोदी पूर्वांचल से सांसद हैं. इनके अलावा सीएम योगी आदित्यनाथ और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी पूर्वांचल से ही हैं. 

पूर्व मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी

जिन चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है, उनको लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. इनमें सबसे बड़ा नाम पूर्व मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी का है. भूपेंद्र चौधरी योगी कैबिनेट में मंत्री भी रहे हैं. हालांकि प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. वर्तमान में भूपेंद्र चौधरी एमएलसी हैं और उनका कार्यकाल साल 2028 तक है. 

सपा से बगावत करने वाले मनोज पांडेय और पूजा पाल का भी नाम

संभावित मंत्रियों में भूपेंद्र चौधरी के अलावा चर्चा में लगभग 8-10 नाम हैं. इनमें छह को मंत्रिमंडल के जगह मिल सकती है. संभावितों में सपा से बगावत करने वाले मनोज पांडेय और पूजा पाल का नाम है. इनके अलावा कृष्णा पासवान, सुरेंद्र दिलेर, अशोक कटारिया, कैलाश राजपूत और हंसराज विश्वकर्मा का नाम भी चर्चा में है. इनमें हंसराज विश्वकर्मा को छोड़ कोई भी पूर्वांचल से नहीं है. साथ ही मनोज पांडे को छोड़ कोई सवर्ण नहीं है. 

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मनोज पांडे रायबरेली जिले की ऊंचाहार सीट से विधायक हैं, वो मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल इकलौते सवर्ण विधायक हो सकते हैं.

मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल होने वाले इकलौते सवर्ण मनोज पांडे

समाजवादी पार्टी से बगावत करने वाले मनोज पांडे रायबरेली जिले की ऊंचाहार सीट से विधायक हैं. मनोज पांडेय ब्राह्मण हैं और अवध क्षेत्र से आते हैं. वहीं पूजा पाल कौशांबी जिले की चायल सीट से गड़ेरिया समाज की महिला विधायक हैं. राजू पाल की पत्नी पूजा पाल समाजवादी पार्टी से विधायक थीं लेकिन अतीक अहमद की हत्या के बाद उन्होंने खुलकर सीएम योगी के पक्ष में बयानबाज़ी की थी. इससे नाराज होकर सपा ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था. 

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कृष्णा पासवान, अशोक कटारिया, हंसराज विश्वकर्मा का भी नाम

बीजेपी के विधायकों में प्रमुख नाम कृष्णा पासवान, अशोक कटारिया, हंसराज विश्वकर्मा, सुरेंद्र दिलेर और कैलाश राजपूत का है. कृष्णा पासवान फतेहपुर की खागा सीट से बीजेपी की विधायक हैं. बीजेपी के संगठन में भी कृष्णा पटेल काम कर चुकी हैं. वहीं अशोक कटारिया विधान परिषद सदस्य हैं और उनका कार्यकाल 2030 तक है. अशोक कटारिया गुर्जर बिरादरी से आते हैं. ओबीसी समाज से आने वाले हंसराज विश्वकर्मा पीएम मोदी की संसदीय क्षेत्र काशी से हैं और वर्तमान में एमएलसी हैं. 

कृष्णा पासवान फतेहपुर की खागा सीट से बीजेपी की विधायक हैं.

सुरेंद्र दिलेर और कैलाश राजपूत के नाम की भी चर्चा

सुरेंद्र दिलेर अलीगढ़ की खैर सीट से विधायक हैं. दिलेर वाल्मीकि समाज के नेता हैं. उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि भी राजनैतिक हैं और हमेशा से मज़बूत रही है. कैलाश राजपूत कन्नौज की तिर्वा से विधायक हैं. वो लोध बिरादरी से आते हैं. तिर्वा इलाका समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है. इनके अलावा चर्चा में सुरेश पासी का भी नाम चल रहा है लेकिन सुरेश पासी की किस्मत तभी खुल सकती जय जब कृष्णा पासवान का नाम कटे, हालांकि इसकी गुंजाइश कम लगती है. 

ब्राह्मणों की नाराज़गी को दूर करने का भी मौक

बात करें जातीय और क्षेत्रीय संतुलन की तो बीजेपी अगले साल के विधानसभा चुनाव को देखते हुए अनुसूचित जाति और ओबीसी को ख़ास तवज्जो देती दिख रही है. इसके अलावा हाल फ़िलहाल के ब्राह्मणों की नाराज़गी को देखते हुए सवर्ण समाज से ब्राह्मण नेता की क़िस्मत खुल सकती है. बीजेपी पासी बिरादरी और अनुसूचित जातियों को साधने की राजनीति के तहत एससी वर्ग के नेताओं को जगह देने के पक्ष में खड़ी दिखाई देती है. 

यूपी की राजनीति के चार हिस्से

यूपी की राजनीति में प्रदेश को चार हिस्सों में देखा जाता है. इनमें पूर्वांचल, पश्चिमांचल, अवध और बुंदेलखंड आते हैं. इनमें वर्तमान में पूर्वांचल का दबदबा इसलिए ज़्यादा है क्योंकि पीएम मोदी वाराणसी से सांसद हैं. इसके अलावा सीएम योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से आते हैं. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी रहने वाले गोरखपुर के हैं और बगल की महाराजगंज सीट से सांसद हैं. इसके अलावा कई कई चर्चित मंत्री भी पूर्वांचल से आते हैं. 

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पूर्वांचल से अभी 4 मंत्री

पूर्वांचल से आने वाले चर्चित मंत्रियों की बात करें तो वाराणसी से कुल तीन मंत्री हैं. वहीं सुभासपा के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर, निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ संजय निषाद और अपना दल (सोनेलाल) के नेता आशीष पटेल भी पूर्वांचल से हैं. बलिया से दयाशंकर सिंह हों या सूर्य प्रताप शाही, एके शर्मा हों या दारा सिंह चौहान, ये सब पूर्वांचल से ही हैं. ऐसे के इस बार के विस्तार के पूर्वांचल को बहुत कुछ मिलेगा, इसकी संभावना कम है. 

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सपा के पीडीए को मात देने के लिए जातियों को साधना जरूरी

बीजेपी को पता है कि समाजवादी पार्टी पीडीए के रथ पर सवार होकर उससे मुकाबला करेगी. ऐसे में जातियों को साधना बीजेपी की रणनीति का अहम हिस्सा है. ओबीसी के अलावा अनुसूचित जातियों को साधना बीजेपी की प्राथमिकता है. दलित वोटों के छिटकने की वजह से लोकसभा चुनाव में नुकसान झेल चुकी बीजेपी विस्तार के ज़रिए एससी समाज को ये संदेश देने की पूरी कोशिश करेगी कि भागीदारी के मामले में बीजेपी में एससी समाज को कम तरजीह नहीं दी जाती. 

पश्चिम यूपी को भी साधने की रणनीति पर बीजेपी

पश्चिम को साधना भी बीजेपी के लिए बहुत ज़रूरी है. किसान आंदोलन के बाद पश्चिम में जाट के अलावा गुर्जर, शाक्य, सैनी, कुर्मी समेत गौड़ यादव ओबीसी को अपने साथ लाने की बीजेपी ने पुरज़ोर कोशिश की है. इस बार भी भूपेंद्र चौधरी को बड़ा मंत्रालय देकर बीजेपी जाटों को अपनी तरफ़ खींचने की कोशिश करेगी तो वहीं अगर अशोक कटारिया मंत्री बने तो गुर्जर बिरादरी का एक और मंत्री योगी सरकार में शामिल हो जाएगा.

अखिलेश का तंज- दिल्ली से पर्ची आ गई

यूपी के इस मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तंज कसा है. अखिलेश यादव के सोशल मीडिया में लिखा है कि लगता है कि दिल्ली से पर्ची आ गई. वो इसी तंज के बीच महिला आरक्षण का मुद्दा उठाने की भी कोशिश करते हैं और कहते हैं कि महिलाओं को ज़्यादा हिस्सा मिलना चाहिए. फ़िलहाल इस विस्तार में कौन कौन मंत्री होगा, ये तस्वीर तो कल साफ़ होगी. साथ ही नज़र इस पर भी रहेगी कि किसको कौन सा विभाग मिलता है. 

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