Akhilesh Yadav Vs Om Prakash Rajbhar: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज कर दी है. एक तरफ ममता बनर्जी को नैतिक समर्थन देने अखिलेश कोलकात्ता पहुंचे हैं तो दूसरी तरफ यूपी में उनके सियासी विरोधी उन्हें घेर रहे हैं. इस सियासी घमासान के बीच सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर का एक ताजा बयान चर्चा का विषय बन गया है. दरअसल, एक कार्यक्रम के दौरान राजभर की जुबान इस कदर फिसली कि उन्होंने कह दिया, 'सौ परसेंट राजा के लक्षण परिलक्षित हो रहे हैं, पीडीए आ रहा है.' राजभर के मुंह से अपनी ही रणनीति की तारीफ सुनकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इसे लपक लिया और सोशल मीडिया पर पलटवार कर दिया.
जुबान फिसली और 'कोहनी' का इशारा
दरअसल, एक कार्यक्रम के दौरान अपनी बात रखते हुए राजभर की जुबान कुछ इस तरह फिसली कि उन्होंने कह दिया, 'सौ परसेंट राजा के लक्षण परिलक्षित हो रहे हैं, पीडीए आ रहा है.' जैसे ही उनके मुंह से विपक्षी गठबंधन का मुख्य नारा 'पीडीए' निकला, वहां मौजूद लोग हैरान रह गए. हालांकि, उनके बगल में बैठे शख्स ने कोहनी मारते हुए उनकी गलती याद दिलाई तो राजभर ने भी संभलते हुए NDA कहा. लेकिन तब तक शायद देर हो चुकी थी. राजभर का बयान वायरल हो गया और अखिलेश ने इसे लपक लिया.
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अखिलेश का 'सच' वाला तंज
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस वाक्य को हाथो-हाथ लिया और राजभर पर तीखा तंज कसा. अखिलेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सच अपने आप निकलता है और झूठ हमेशा सोच-समझकर बोला जाता है. उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि राजभर के मन का सच आखिरकार उनकी जुबान पर आ ही गया और वे अनजाने में ही सही, लेकिन यह स्वीकार कर गए कि यूपी में पीडीए ही आ रहा है. अखिलेश ने यहाँ तक कह दिया कि मन से तो राजभर भी पीडीए के ही साथ हैं, बस राजनीतिक मजबूरियों के कारण दूसरी ओर खड़े हैं.
राजभर का 'पसीने' वाला पलटवार
इसके बाद पलटवार करने में राजभर भी पीछे नहीं रहे. उन्होंने बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी की हार का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव की सक्रियता पर सवाल उठाए. राजभर ने तंज कसा कि ममता बनर्जी हफ्तों तक अखिलेश का इंतजार करती रहीं, लेकिन वे चुनाव प्रचार के लिए नहीं गए. उन्होंने कहा कि भयानक गर्मी में अखिलेश यादव भला बाहर कहाँ निकलते हैं, क्योंकि रैलियां करने पर पसीना निकलेगा और सुबह जल्दी उठना पड़ेगा.
2027 की तैयारी और आंकड़ों का खेल
दरअसल यह पूरी खींचतान 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों का हिस्सा है. 2024 के लोकसभा चुनाव में एनडीए और सपा-कांग्रेस गठबंधन के बीच वोट प्रतिशत का अंतर बहुत मामूली (करीब 0.17%) रहा था. इसी समीकरण को देखते हुए अखिलेश यादव अब महिला आरक्षण का मुद्दा भी उठा रहे हैं. उन्होंने मांग की है कि भाजपा सरकार 2027 के यूपी चुनाव में ही महिला आरक्षण लागू करे. फिलहाल, राजभर के बयान और उस पर अखिलेश के पलटवार ने यूपी की सियासी पिच पर लड़ाई को और दिलचस्प बना दिया है.
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