- बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी के नियमों में बदलाव के कारण अपने पद से इस्तीफा दिया है
- अग्निहोत्री ने कहा कि इन नियमों से सामान्य वर्ग के छात्र झूठे आरोपों और शारीरिक शोषण के खतरे में आ गए हैं
- उनके अनुसार मौजूदा हालात सामान्य वर्ग को सरकार से दूर कर रहे हैं और इससे राजनीतिक अस्थिरता की आशंका है
बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री अपने एक फैसले की वजह से चर्चाओं में हैं. उन्होंने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपने पद से इस्तीफा यूजीसी के नियमों में बदलाव की वजह से दिया है. अलंकार अग्निहोत्री के इस फैसले से प्रशासनिक और राजनीतिक हलके में हड़कंप सा मच गया है. अपने इस्तीफे के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने एक बयान भी जारी किया है. उन्होंने इस बयान में अपने इस्तीफे की वजह बताई है और साथ ही कहा है कि आज जो हालात हैं वो सामान्य वर्ग के लोगों के लिए कहीं से भी उचित नहीं है.
नए नियम ने सामान्य वर्ग के लोगों को स्वघोषित अपराधी मान लिया है
उन्होंने सोमवार को इस्तीफा देने के बाद कहा कि UGC का जो नया रेगुलेशन आया है, उसमें सामान्य वर्ग के व्यक्तियों स्वघोषित अपराधी मान लिया गया है. सामान्य वर्ग के किसी भी छात्र, जो पढ़ने में अच्छा है उसपर अब कोई भी आरोप लगा देगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो जाएगी. भले ही ये आरोप ईर्ष्या की वजह से लगाया गया हो. इसी तरीके से अगर आपकी बेटी पर किसी की गलत नजर है तो उसपर आरोप लगाने के साथ ही वो समिति के लोग आपकी बेटी का शारीरिक शोषण कर सकती है है. क्या आप चाहते हैं कि सामान्य वर्ग के बेटी-बेटियां आत्महत्याएं करने लगे?
अब बच्चे सरनेम देखकर एक दूसरे से लड़ेंगे
अलंकार अग्निहोत्री ने आगे कहा कि क्या आप चाहते हैं कि यूनिवर्सिटी स्तर पर इतना भेदभाद हो जाए जो बच्चों को यूनिवर्सिटी से निकलते ही एक दूसरों का दुश्मना बना दे. आप एक ऐसी व्यवस्था देकर जा रहे हैं जहां बच्चे एक दूसरे का सरनेम देखकर एक दूसरे से लड़ेंगे. एक दूसरे को मारेंगे. क्या आप चाहते हैं कि देश में सिविल वार की स्थिति पैदा हो जाए. आज सामान्य वर्ग सरकार से काफी खफा है.
ब्राह्मणों का अपमान करना गलत है
साथ ही उन्होंने कहा कि यूपी में ब्राह्मण विरोधी अभियान चल रहा है. आपने कई घटनाएं देखी होंगी कि किस तरह के ब्राह्माणों के खिलाफ घटनाएं हो रही है. थानों में पीट-पीटकर हत्याएं की जा रही हैं. दो हफ्ते पहले ही मौनी अमावस्या के मौके पर शंकराचार्य जी के ब्राह्मण बटुक शिष्यों की चोटी/ शिखा पकड़ कर पिटाई गई है वो सही नहीं था. क्या आप किसी अन्य धर्म या जाति के साथ कर सकते हैं? आज हालात ये हैं कि केंद्र और राज्य सरकार से सामान्य वर्ग खुद को अलग मान रहा है. आज अगर चुनाव हो जाएं तो केंद्र और राज्य में ये सरकार नहीं बचेगी.
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