यूपी बोर्ड की फर्जी वेबसाइट बना डाली, 4-5 हजार रुपए लेकर बांटी 7000 मार्कशीट, कौन हैं आरोपी?

UP Board Fake Website Scam में प्रयागराज साइबर सेल ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी वेबसाइट बनाकर हजारों नकली मार्कशीट तैयार कर छात्रों और अभिभावकों से ठगी कर रहे थे.

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UP Board Fake Website Scam: उत्तर प्रदेश की प्रयागराज पुलिस को यूपी बोर्ड की फर्जी वेबसाइट बनाकर लोगों से ठगी करने वाले दो लोगों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल हुई है. प्रयागराज की साइबर सेल पुलिस ने यूपी बोर्ड की 7 हजार फर्जी मार्कशीट बेचने वाले दो जालसाजों को गिरफ्तार किया है.

फर्जी वेबसाइट बनाकर की जा रही थी ठगी

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओरिजिनल वेबसाइट www.upmsp.edu.in की फर्जी वेबसाइट www.upmsp-edu.in  बनाकर और वेबसाइट पर अवैध रूप से विद्यार्थियों और अभिभावकों से अनुचित भुगतान के माध्यम से ठगी करने वाले दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

शिकायत के बाद दर्ज हुआ केस

गंगानगर जोन के डीसीपी और नोडल साइबर क्राइम अधिकारी के निर्देशन में प्रयागराज के साइबर क्राइम थाने में 26 सितंबर 2025 को माध्यमिक शिक्षा परिषद की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया था. डीसीपी साइबर क्राइम कुलदीप सिंह गुनावत के मुताबिक यूपी बोर्ड द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे में फर्जी वेबसाइट और फर्जी मार्कशीट बांटने का आरोप लगाया गया था. 

UP Board Fake Website Scam

आजमगढ़ से हुई गिरफ्तारी

साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस लगातार मामले की छानबीन कर रही थी. इस दौरान पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया. गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में शशि प्रकाश राय उर्फ राजन शर्मा और मनीष कुमार राय शामिल हैं. दोनों आरोपियों को आजमगढ़ से गिरफ्तार किया गया. यूपी बोर्ड की फर्जी वेबसाइट मामले में पुलिस ने बीएनएस की धारा 318(4), 319(2), 338, 336(3), 340(2), 61(2), 112 और आईटी एक्ट की धारा 66(D), 74 व 84(सी) में मुकदमा दर्ज किया था. दोनों आरोपी आजमगढ़ के रहने वाले हैं. पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है.

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कॉल सेंटर बनाकर चला रहे थे गिरोह

डीसीपी कुलदीप सिंह गुनावत ने बताया कि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की फर्जी वेबसाइट बनाकर ठगी करने वाले गिरोह के कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया गया है. आरोपियों ने ‘श्री एजुकेशन' नाम से कॉल सेंटर खोल रखा था, जहां से यह पूरा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था.
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी फेसबुक पर मार्कशीट में नंबर बढ़ाने और फर्जी मार्कशीट तैयार करने के लिए विज्ञापन डालते थे. इसके बाद अभ्यर्थी, अभिभावक और शैक्षणिक संस्थान उनसे संपर्क करते थे.

फर्जी मार्कशीट और डिग्री का खेल

संपर्क करने के बाद ये लोग संबंधित कॉलेज और विश्वविद्यालय की मुहर, होलोग्राम और मार्कशीट का प्रोफार्मा तैयार करवाते थे. इसके बाद अभ्यर्थियों के लिए फर्जी बैकडेटेड हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और यूनिवर्सिटी की मार्कशीट व डिग्री एडिट करते थे. काम पूरा होने के बाद आरोपी 4 से 5 हजार रुपए लेकर फर्जी बैकडेटेड मार्कशीट और डिग्री कोरियर के माध्यम से भेज देते थे. प्रति डॉक्यूमेंट मिलने वाली रकम आपस में बांट लेते थे. मुख्य आरोपी शशि प्रकाश राय उर्फ राजन शर्मा वर्ष 2014 से इस तरह की कूटरचित मार्कशीट और डिग्री तैयार कर रहा था.

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भारी मात्रा में सामान बरामद

पुलिस ने आरोपियों के पास से 10 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 9 सिम कार्ड, 42 विभिन्न विश्वविद्यालयों की फर्जी मुहर, 6 मॉनिटर, सीपीयू, 2 पेन ड्राइव, 217 फर्जी अंकपत्र और 1000 होलोग्राम बरामद किए हैं. इसके अलावा प्रिंटर और अन्य उपकरण भी जब्त किए गए हैं. डीसीपी कुलदीप सिंह गुनावत के मुताबिक आरोपी अब तक 7000 फर्जी मार्कशीट तैयार कर बांट चुके हैं. पुलिस अब उन लोगों की भी जांच कर रही है, जिन्हें ये फर्जी दस्तावेज दिए गए थे.

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