मथुरा के वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर में दर्शन का समय बढ़ाने संबंधी फैसला रहेगा बरकार: इलाहाबाद हाईकोर्ट

नए समय के अनुसार गर्मियों में दर्शन का समय सुबह सात बजे से दोपहर 12:30 बजे तक और शाम 4:15 बजे से रात 9:30 बजे तक होगा, जबकि सर्दियों में यह समय सुबह आठ बजे से दोपहर 1:30 बजे तक और शाम चार से रात नौ बजे तक होगा.

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इलाहाबाद:

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की समिति के निर्णय के खिलाफ अवमानना याचिका खारिज कर दिया है. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि कमेटी ने अवमानना नहीं की.कोर्ट ने कहा सुप्रीम कोर्ट ने नियमित दिनचर्या की निगरानी व समुचित व्यवस्था के लिए कमेटी गठित कराई है.कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत समय में बदलाव का फैसला तीर्थ यात्रियों का दबाव कम करने के लिए लिया है.हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इससे कोर्ट आदेश का उल्लघंन नहीं होता.जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच ने ये फैसला सुनाया है.

नए समय के अनुसार गर्मियों में दर्शन का समय सुबह सात बजे से दोपहर 12:30 बजे तक और शाम 4:15 बजे से रात 9:30 बजे तक होगा, जबकि सर्दियों में यह समय सुबह आठ बजे से दोपहर 1:30 बजे तक और शाम चार से रात नौ बजे तक होगा.याचिकाकर्ता गौरव गोस्वामी की तरफ से इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर की गई थी सिविल अवमानना याचिका.कोर्ट ने पाया कि सुप्रीम कोर्ट की कमेटी मंदिर के अंदर और बाहर के दबाव कम करने के लिए कार्य कर रही है ताकि तीर्थयात्रियों को असुविधा न हो.याची का कहना था कि जब मथुरा की सिविल अदालत द्वारा पारित आदेश पर नवंबर 2022 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी तो समिति दर्शन का समय नहीं बढ़ा सकती थी.

याची की तरफ से कहा गया कि दर्शन का समय बढ़ाने से देवता की रोज़ाना की दिनचर्या बदल जाएगी और कोई प्रशासनिक निकाय न्यायिक रोक को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता. दूसरी ओर कमेटी ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने दखल इसलिए दिया क्योंकि पहले की आपसी लड़ाई ने समस्याओं को और बढ़ा दिया था जिससे तीर्थयात्रियों को कोई सुविधा या समाधान नहीं मिल रहा था.बता दें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त उच्चाधिकार प्राप्त मंदिर प्रबंधन समिति की अध्यक्षता रिटायर्ड न्यायमूर्ति अशोक कुमार (सेवानिवृत्त) कर रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासनिक गतिरोध और आपसी कलह के कारण तीर्थयात्रियों को हो रही असुविधा का हवाला देते हुए आठ अगस्त, 2025 को उच्चस्तरीय मंदिर प्रबंधन समिति का गठन किया था. समिति को विशेष रूप से मंदिर के अंदर और बाहर की दैनिक गतिविधियों की देखरेख और पर्यवेक्षण का कार्य सौंपा गया. समिति की 11 सितंबर, 2025 को हुई बैठक में  दर्शन की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया गया. कोर्ट ने माना समिति सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की गई है और मंदिर के अंदर और बाहर के दैनिक कार्यों की देखरेख कर रही है. उसकी राय में समिति ने हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन नहीं किया है.

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