- मुकुंदानंद गिरी ने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सत्य बोलते हैं. इसलिए निशाना बनाए जा रहे हैं.
- रामभद्राचार्य न तो जगद्गुरु रामानंदाचार्य हैं और न ही तुलसी पीठ का गठन कर सकते हैं, इनके बीच विवाद हुआ था.
- मुकुंदानंद ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी राजनीतिक रूप से अकेले पड़ गए हैं.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मामले में एक और आरोपी और उनके शिष्य प्रत्यक्त चैतन्य मुकुंदानंद गिरी ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की मुख्य समस्या यह है कि वे सदैव सत्य बोलते हैं. मुकुंदानंद ने कहा कि रामभद्राचार्य, रविंद्रपुरी और रामदेव जैसे गुरुओं की तरह सत्ता के 'पिछलग्गू' नहीं हैं. इसीलिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि रामभद्राचार्य जी न तो जगद्गुरु रामानंदाचार्य हैं और न ही वे तुलसी पीठ का गठन कर सकते थे. उनके बीच विवाद तब शुरू हुआ जब पिछले वर्ष अविमुक्तेश्वरानंद जी ने उनसे कुछ प्रश्न पूछे थे. मुकुंदानंद ने चेतावनी दी कि वे युद्ध नहीं चाहते, लेकिन यदि उन पर घिनौने आरोप लगाए जाएंगे, तो वे चुप नहीं बैठेंगे.
CM योगी पर हमला करते हुए मुकुंदानंद गिरी ने कहा कि एक महंत का प्रोटोकॉल यह होता है कि उसे शंकराचार्य के समक्ष साष्टांग दंडवत प्रणाम करना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री वर्तमान में राजनीतिक रूप से अकेले पड़ गए हैं, क्योंकि उनके दोनों उपमुख्यमंत्री उनसे अलग सुर में बात कर रहे हैं. मुकुंदानंद ने शासन को 'संवेदनहीन' बताते हुए कहा कि वैचारिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन वर्तमान प्रशासन में संवेदना का अभाव है. उन्होंने स्वयं को पीड़ित बताते हुए कहा कि वे शांतिपूर्वक पूजा-पाठ कर रहे थे, किंतु उन्हें मारा गया, अपमानित किया गया और अब झूठा आरोपी बना दिया गया है.
मुकुंदानंद गिरी ने कहा कि एक दंडी संन्यासी को आरोपी बनाना नीचता है. शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने उन्हें 'हिस्ट्रीशीटर' (76D) बताया और कहा कि उन पर 27 मुकदमे दर्ज हैं. वे अब तक 105 लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज करा चुके हैं. मुकुंदानंद ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें बच्चों के शोषण की बात कही गई है. उन्होंने कहा कि वे बच्चे कभी स्वामी जी या उनसे मिले तक नहीं हैं. उन्होंने न्यायालय पर अपना पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए मांग की कि यदि वे निर्दोष पाए जाते हैं, तो झूठी शिकायत करने वाले पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए.
ये भी पढ़ें :- POCSO केस में नामजद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद हाईकोर्ट पहुंचे, गिरफ्तारी पर रोक की मांग













