- शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यूजीसी के जातिगत भेदभाव के नए नियम सनातन धर्म के विरुद्ध हैं।
- उन्होंने बताया कि ये नियम हिंदू समुदाय को विभाजित करने का षड़्यंत्र है और तत्काल वापस लिए जाने चाहिए
- शंकराचार्य के अनुसार सुप्रीम कोर्ट केवल संवैधानिक प्रावधानों की जांच कर सकता है, नियमों को बदलना संभव नहीं है
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के जातिगत भेदभाव को लेकर आए नए नियमों पर जारी बवाल में अब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की भी एंट्री हो गई है. वाराणसी पहुंचे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि ये सनातन धर्म के विरुद्ध है. एक जाति से दूसरों को लड़ाकर सनातन को खत्म करने षड़्यंत्र है. उन्होंने कहा कि अमित शाह ने तो पहले ही कह दिया है कि ये संसद से पास कानून है और सुप्रीम कोर्ट भी ज्यादा कुछ नहीं कर सकता. सुप्रीम कोर्ट केवल संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है कि नहीं, यही देख सकता है.
उन्होंने कहा कि हम इसका शुरू से विरोध कर रहे हैं. हम कह रहे है कि ये ठीक नहीं है। सनातन धर्म को क्षति पहुंचाने वाला कानून आप लेकर आए हैं, इसको तत्काल वापस लीजिए। सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई भी है। सुप्रीम कोर्ट भी सिर्फ यही देख सकता है कि ये संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं. इसको बदल नहीं सकता है. अमित शाह ने पहले ही कह दिया है कि संसद से पास कानून है, सबको मानना पड़ेगा. तो अब सुप्रीम कोर्ट इसमें सिर्फ सुधार कर सकता है.
दूसरा समाज भी सड़क पर उतरेः अविमुक्तेश्वरानंद
उन्होंने कहा कि कि सवर्ण समाज सड़क पर है. दूसरा समाज सड़क पर नहीं है. हम तो समझते हैं कि उसको भी सड़क पर होना चाहिए क्योंकि लड़ाई उसके भी हित में नहीं. एक-दूसरे के विरुद्ध अगर एक दूसरा जो एक ही परिवार का है, अगर खड़ा होता है तो इसमें दोनों की हानि होती है. इसलिए सवर्ण समाज को भी और जो दूसरा समाज कहा जा रहा है, उसे भी सड़क पर होना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि हिंदू समुदाय से आप दो समुदाय बना रहे हैं. एक हिंदू समुदाय को विभाजित करने का ये कैसा प्रयोग है. इसको कैसे स्वीकार किया जा सकता है?
माघ मेला विवाद पर क्या हुआ?
प्रयागराज माघ मेला के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा विवाद भी सामने आया था. माघ मेला के दौरान पुलिस वालों ने शंकराचार्य और उनके शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की की थी. उन्हें प्रशासन ने कई बार नोटिस भी भेजा था. इस बारे में जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि माफी मांगना, न मांगना ये सरकार के ऊपर निर्भर है. उन्होंने कहा कि 11 दिन तक वहां बैठकर पूरा मौका दिया कि आपसे जो अपराध हुआ है, उसको आप चाहें तो सुधार सकते हैं लेकिन उन्होंने नहीं सुधारा तो ये बात जनता के सामने आ चुकी है.
उन्होंने कहा कि भक्तों की जिस तरह से चुटिय खींची गई, उसके बाद न तो कोई कार्रवाई हुई और न माफी मांगी गई. वीडियो में लोगों ने देख लिया है कि किस तरह से मारा-पीटा जा रहा है. उन्होंने कहा कि बटुकों को उनकी चोटी पकड़कर अपमानित किया जा रहा है. उसके बाद भी किसी पर कोई छोटी सी कार्रवाई भी नहीं हुई. बातें वही कि जांच की जाएगी. कोई जांच कमेटी नहीं बनाई गई. इससे पता चलता है कि वो जो चाहेंगे, करेंगे. किसी को कुछ बोलने का अधिकार नहीं रहा.
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि तानाशाही अपने देश में काबिज हो चुकी है. न्याय की आशा अब कोई इस पार्टी की सरकार में न करे. सरकार का विरोध हो रहा है. यूजीसी का नियम तो इसलिए लाया गया ताकि लोग इसकी चर्चा न करें. सवाल ये है कि यूजीसी जैसा नियम सनातन धर्म के लिए बहुत बड़ा खतरा है.














