NDTV Exclusive: "कांवड़ यात्रा के लिए रास्ते बंद हो सकते हैं, तो 30 मिनट की नमाज पर ऐतराज क्यों?"

ईद उल अजहा के मौके पर सपा नेता डॉ. एसटी हसन ने NDTV से खास बातचीत में त्योहारों के दौरान कानूनी भेदभाव के मुद्दे पर योगी सरकार जमकर घेरा. उन्होंने कहा कि अगर कांवड़ यात्रा या जगरातों के लिए रास्ते बंद हो सकते हैं, तो महज 30 मिनट की नमाज पर राजनीति क्यों की जाती है? इसके साथ ही उन्होंने महंगाई और 2027 के चुनावी समीकरणों पर भी खुलकर अपनी राय रखी.

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अगर कांवड़ यात्रा या जगरातों के लिए रास्ते बंद हो सकते हैं, तो महज 30 मिनट की नमाज पर राजनीति क्यों की जाती है?
Mirza Ghalib

ईद उल अजहा यानी बकरा ईद के मुकद्दस मौके पर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और मुरादाबाद के पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन ने NDTV इंडिया से एक विशेष बातचीत की. मुरादाबाद संवाददाता मिर्ज़ा ग़ालिब के साथ इस इंटरव्यू में उन्होंने त्योहार के संदेश से लेकर सड़कों पर नमाज, बढ़ती महंगाई और 2027 के राजनीतिक समीकरणों जैसे कई संवेदनशील और समसामयिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी.

डॉ. एसटी हसन ने बातचीत की शुरुआत ईद उल अजहा के वास्तविक अर्थ को समझाते हुए की. उन्होंने कहा कि यह त्योहार महज एक रस्म या कुर्बानी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंसानियत, सर्वोच्च त्याग और समर्पण का प्रतीक है. हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि यह दिन हमें सिखाता है कि अपने रब की रिजा के लिए इंसान में हर बड़ी से बड़ी चीज कुर्बान करने का जज्बा होना चाहिए. उन्होंने अवाम से अपील की कि लोग छोटी-छोटी रंजिशों को भुलाकर एक-दूसरे को माफ करें, क्योंकि मोहब्बत और भाईचारे से ही समाज और देश तरक्की कर सकता है.

"नियम और कानून सबके लिए एक हों"

जब उनसे उत्तर प्रदेश में सड़कों पर नमाज को लेकर प्रशासन की सख्ती पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने धरातल की हकीकत सामने रखी. डॉ. हसन ने साफ किया कि अब यूपी में सड़कों पर नमाज नहीं हो रही है. मुरादाबाद का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों से ईदगाह में अलग-अलग शिफ्ट में नमाज का इंतजाम किया जा रहा है, ताकि भीड़ सड़क पर न आए. उन्होंने कहा कि इस मामले को बार-बार तूल देना सिर्फ एक राजनीतिक एजेंडा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयानों और प्रशासनिक गाइडलाइंस पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व सांसद ने कहा कि सड़कें यकीनन राहगीरों और यातायात के लिए होती हैं, इसमें कोई दो राय नहीं है. लेकिन देश का कानून और नियम हर नागरिक पर समान रूप से लागू होने चाहिए. जब हमारे देश में जगराते होते हैं या कांवड़ यात्रा के दौरान महीनों तक रास्ते डायवर्ट या बंद किए जाते हैं, तब किसी को असुविधा नहीं दिखती. तो फिर साल में एक-दो बार होने वाली महज 30 मिनट की नमाज को लेकर ही सवाल क्यों खड़े किए जाते हैं?

महंगाई की मार से बेहाल है आम जनता

साक्षात्कार के दौरान डॉ. हसन ने आर्थिक मोर्चे पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि देश में महंगाई इस वक्त सातवें आसमान पर है. पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के लगातार बढ़ते दामों ने आम आदमी और मध्यम वर्ग की कमर तोड़कर रख दी है. उन्होंने सरकार से मांग की कि वे केवल बयानबाजी करने के बजाय धरातल पर काम करें और जनता को इस चौतरफा महंगाई से राहत दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए.

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 वहीं, 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर पूछे गए सवाल पर डॉ. हसन ने दूरगामी रणनीति का खुलासा किया. उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर सत्ता परिवर्तन करना है, तो विपक्षी वोटों का बिखराव हर हाल में रोकना होगा. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गठबंधन या सीटों के तालमेल को लेकर कोई भी अंतिम निर्णय समाजवादी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ही करेगा. नेतृत्व जो भी फैसला लेगा, कार्यकर्ता उसी दिशा में मजबूती से आगे बढ़ेंगे.

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