- उत्तर प्रदेश को लगभग चार वर्षों के इंतजार के बाद राजीव कृष्ण को नया स्थायी पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया है
- राजीव कृष्ण 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की है
- पुलिस सेवा में विभिन्न पदों पर कार्य किया है और 2024 में पुलिस महानिदेशक के सर्वोच्च रैंक पर पदोन्नत हुए हैं
उत्तर प्रदेश को करीब चार साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार अपना नया स्थायी पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मिल गया है. वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण को प्रदेश का नया पूर्णकालिक पुलिस कप्तान नियुक्त किया गया है. संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा भेजे गए पैनल पर शासन स्तर पर गहन मंथन के बाद, मुख्यमंत्री ने राजीव कृष्ण के नाम के प्रस्ताव को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है.
Rajiv Krishna has been appointed as the permanent DGP of Uttar Pradesh
आईपीएस राजीव कृष्ण का जीवन परिचय
उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) के मूल निवासी राजीव कृष्ण का जन्म 26 जून 1969 को हुआ था. उनके पिता का नाम एचके मित्तल है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है.
Rajiv Krishna has been appointed as the permanent DGP of Uttar Pradesh
पुलिस सेवा में करियर और पदोन्नति
अपनी शैक्षणिक योग्यता के बाद वे भारतीय पुलिस सेवा के लिए चुने गए. वे 1991 बैच के आईपीएस हैं और उनकी भर्ती 15 सितंबर 1991 को हुई थी. सेवा में आने के बाद 21 अक्टूबर 1993 को उनका पुष्टीकरण हुआ और 10 अक्टूबर 1995 को उन्हें सीनियर स्केल मिला. इसके बाद 9 अगस्त 2005 को वे सिलेक्शन ग्रेड में पहुंचे.
एक कुशल पुलिस अधिकारी के रूप में उनका करियर लगातार आगे बढ़ता रहा. वे 7 अगस्त 2007 को पुलिस उपमहानिरीक्षक और फिर 9 नवंबर 2010 को पुलिस महानिरीक्षक के पद पर प्रमोट हुए. इसके बाद 1 जनवरी 2016 को उन्हें अपर पुलिस महानिदेशक का पदभार मिला और अपनी उत्कृष्ट कार्यशैली के चलते 1 फरवरी 2024 को वे पुलिस महानिदेशक के सर्वोच्च रैंक पर पदोन्नत हुए.
राजीव कृष्ण पुलिस महानिदेशक के रैंक पर अपनी सेवा दे रहे थे. वे उत्तर प्रदेश के लखनऊ जिले में DGP HQRS और DG सतर्कता विभाग की कमान संभाल रहे हैं, जहाँ उनकी इस पद पर तैनाती 31 मई 2025 को हुई थी.
पुरस्कार और सम्मान
अपने लंबे और शानदार सेवाकाल में राजीव कृष्ण को कई प्रतिष्ठित सेवा पदकों और सम्मानों से नवाजा गया है. उन्हें पुलिस मेडल और पुलिस मेडल फॉर मेधावी सेवा जैसे सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है. इसके अलावा उन्हें उत्कृष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक भी मिला है. पुलिस विभाग में उनके योगदान की सराहना करते हुए उन्हें DG का कमेंडेशन रॉल और अलग-अलग वर्षों में प्रतिष्ठित DG कमेंडेशन डिस्क के सिल्वर, गोल्ड और प्लैटिनम संस्करणों से भी सम्मानित किया गया है.
4 साल बाद खत्म होगा 'कार्यवाहक' का दौर
उत्तर प्रदेश में मई 2022 से कोई भी स्थायी पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नहीं था. पिछले चार सालों में कई कार्यवाहक डीजीपी बदले जा चुके हैं. राजीव कृष्ण खुद 1 जून 2025 से कार्यवाहक डीजीपी का पद संभाल रहे हैं, जिन्हें अब स्थायी कमान मिलने जा रही है.
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सुप्रीम कोर्ट का नियम और लंबा कार्यकाल
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, राज्य के स्थायी डीजीपी को न्यूनतम 2 साल का कार्यकाल मिलना अनिवार्य है. आईपीएस राजीव कृष्ण जून 2029 में रिटायर होंगे. ऐसे में नियमों के मुताबिक उन्हें प्रदेश के सबसे बड़े पुलिस पद पर एक लंबा और स्थिर कार्यकाल मिलने की पूरी संभावना है.
रेस में शामिल थे ये दिग्गज नाम
स्थायी डीजीपी की इस दौड़ में राजीव कृष्ण के अलावा कई और सीनियर आईपीएस अधिकारियों के नाम चर्चा में थे.
- रेणुका मिश्रा: 1990 बैच की सीनियर आईपीएस अधिकारी.
- आलोक शर्मा: 1991 बैच के आईपीएस, जो वर्तमान में केंद्र में डेपुटेशन पर SPG (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) के डायरेक्टर हैं और अगले महीने रिटायर हो रहे हैं.
- पीयूष आनंद: 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी, जो फिलहाल केंद्र में प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर सेवाएं दे रहे हैं.
कैसे होता है स्थायी DGP का चयन?
स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के लिए हाल ही में (26 मई को) यूपीएससी के साथ यूपी के मुख्य सचिव एसपी गोयल और अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद की एक अहम बैठक हुई थी. प्रक्रिया के तहत संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) अधिकारियों की सीनियरिटी, अनुभव और सर्विस रिकॉर्ड को देखकर 3 नाम शॉर्टलिस्ट करता है. इसके बाद अंतिम फैसला राज्य सरकार का होता है कि वह उस पैनल में से किसे डीजीपी चुनती है.
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