'दरिंदे' को फांसी की सजा, 8 साल की बच्ची से दुष्कर्म कर की थी हत्या, POCSO कोर्ट ने 18 महीने में सुनाया फैसला

Prayagraj News: प्रयागराज पॉक्सो कोर्ट ने सजा सुनाते हए कहा कि यह अपराध अत्यंत जघन्य है और समाज की अंतरात्मा को झकझोरने वाला है. दोषी के सुधार की संभावना शून्य है, इसलिए वह सजा-ए-मौत का हकदार है. कोर्ट ने घटना के 18 महीने बाद फैसला सुनाया.

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Prayagraj Rape Murder Case: दोषी मुकेश पटेल को फांसी की सजा.

Prayagraj Rape Murder Case Verdict: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट ने 8 साल की बच्ची से रेप और हत्या के एक मामले में दोषी को फांसी की सजा सुनाई. कोर्ट ने 18 महीने में फैसला सुनाते हुए दोषी पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है. कोर्ट ने सजा सुनाते हुए सख्त टिप्पणी की, कहा- यह घटना समाज की अंतरात्मा को झकझोरने वाला अपराध है. दोषी के सुधार की संभावना शून्य है, इसलिए वह सजा-ए-मौत का हकदार है. 

दरअसल, प्रयागराज के गंगानगर जोन के सोरांव थाना क्षेत्र में 4 अक्टूबर 2024 को पुलिस ने BNS की धारा 103(1) के तहत एक FIR दर्ज की थी. एक महिला ने आरोप लगाया था कि 3 अक्टूबर को शाम 6:30 बजे उसकी आठ साल की बेटी मेडिकल स्टोर गई थी, जहां से वापस घर नहीं लौट. काफी खोजबीन के बाद भी उसका कुछ पता नहीं चला. पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. 

शरीर पर थे चोट के निशान 

4 अक्टूबर को बच्ची का शव घर से कुछ दूरी पर एक धान के खेत में मिला. कहा गया कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने बच्ची की हत्या कर शव खेत में फेंक दिया. पुलिस की जांच में सामने आया कि बच्ची का अपहरण कर उसके साथ रेप किया गया और फिर बेरहमी से हत्या कर दी गई. मासूम के शव पर कई चोटों के निशान मिले थे.

घटना के 12 दिन बाद पुलिस ने पैर में मारी थी गोली 

घटना के करीब 12 दिन बाद पुलिस ने आरोपी मुकेश पटेल को मुठभेड़ में गिरफ्तार किया. आरोपी के पैर में गोली लगी थी. इस मामले में पुलिस ने रेप सहित कई अन्य धाराएं भी जोड़ीं. दिसंबर 2024 में पुलिस ने प्रयागराज जिला अदालत में चार्जशीट दाखिल की. 26 मार्च को पॉक्सो कोर्ट के स्पेशल जज विनोद कुमार चौरसिया ने मुकेश पटेल को दोषी करार दिया. इसके बाद 30 मार्च 2026 को कोर्ट ने उसे फांसी की सजा सुनाई.

'दोषी के सुधार की संभावना शून्य'

पॉक्सो कोर्ट ने इस मामले को दुर्लभतम श्रेणी का बताते हुए कहा कि यह अपराध अत्यंत जघन्य है और समाज की अंतरात्मा को झकझोरने वाला है. कोर्ट ने यह भी कहा कि दोषी के सुधार की संभावना शून्य है, इसलिए वह सजा-ए-मौत का हकदार है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मृत्युदंड का अर्थ है फांसी पर लटकाकर मृत्यु देना. 

(मुजफ्फरनगर से दीपक गंभीर की रिपोर्ट) 

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