नमाज के लिए घर पर जुटते थे 50-60 लोग, पुलिस ने रोका तो अदालत पहुंचा शख्स; अब इलाहाबाद HC ने दिया ये फैसला

यूपी के बरेली में नमाज के लिए घर पर भारी भीड़ जुटती थी. प्रशासन ने रोका तो मामला हाई कोर्ट ला गया. अब हाई कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया है कि घर पर नमाज के दौरान भीड़ नहीं जुट सकती.

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हाई कोर्ट की दो जजों की बेंच ने यह फैसला सुनाया है. (फाइल फोटो)
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  • बरेली के एक निजी घर में नमाज के दौरान भारी भीड़ जुटने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रोक लगाने का आदेश दिया है
  • हाई कोर्ट ने कहा है कि नमाज के लिए भीड़ जुटाने से शांति भंग होने पर प्रशासन कार्रवाई कर सकता है
  • याचिकाकर्ता तारिक खान ने कोर्ट में वादा किया कि जुमे की नमाज के दिन भीड़ नहीं जुटाएगा
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बरेली:

उत्तर प्रदेश के बरेली में एक घर था, जहां हर दिन नमाज होती थी और इसके लिए भारी भीड़ जुटती थी. आसपास के लोगों ने आपत्ति जताई तो प्रशासन ने भी ऐसा करने से मना किया. मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट चला गया. अब हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि निजी घर में नमाज के दौरान भीड़ नहीं जुटेगी. हाई कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर नमाज के लिए भीड़ जुटती है और माहौल बिगड़ता है तो फिर प्रशासन कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है.

हाई कोर्ट ने इस मामले में 25 मार्च को ही फैसला सुना दिया था लेकिन इसकी कॉपी अब उपलब्ध हुई है. हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता ने वादा किया है कि वह जुमे की नमाज के दिन घर पर भीड़ नहीं जुटाए. हाई कोर्ट ने भी अपने फैसले में कहा कि उम्मीद है कि याचिकाकर्ता अपने वचन का पालन करेगा. यह फैसला जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने सुनाया है.

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क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला बरेली के एक घर के अंदर नमाज पढ़ने से कथित तौर पर जाने वाली याचिका से जुड़ा है. याचिका तारिक खान नाम के शख्स ने दायर की थी. 

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मामला बरेली के मोहम्मदगंज गांव का है. गांव में हसीन खान के घर पर 16 जनवरी को कुछ लोग नमाज पढ़ रहे थे. हिंदू परिवारों की शिकायत पर पुलिस ने रोक लगा दी थी. याचिकाकर्ता तारिक खान ने अपनी याचिका में दावा किया कि प्रशासन ने उसे घर पर नमाज पढ़ने से रोका.

याचिका पर सुनवाई के दौरान 12 फरवरी को हाई कोर्ट ने नमाज पढ़ने से कथित तौर पर रोकने के लिए बरेली के डीएम और एसएसपी को कंटेम्प्ट नोटिस जारी किया था. हाई कोर्ट ने कहा था कि 27 जनवरी के एक फैसले में साफ कर दिया था कि बगैर इजाजत के प्राइवेट जगहों पर प्रार्थन सभा की जा सकती है और पहली नजर में इस मामले पर भी यही लागू होता है.

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कोर्ट ने माना- दुरुपयोग कर रहा याचिकाकर्ता

23 मार्च को इस मामले में सुनवाई हुई तो दोनों अधिकारी कोर्ट में पेश हुए और हलफनामा दाखिल किया. कोर्ट ने पाया कि दोनों अधिकारियों के हलफनामे से यह पता चला है कि अदालत से मांगी गुई सुरक्षा की आड़ में याचिकाकर्ता तारिक खान इसका दुरुपयोग कर रहा है और उसके घर में हर दिन 50-60 लोग नमाज पढ़ रहे हैं.

सुनवाई के दौरान यूपी सरकार की तरफ से पेश एडिशनल एडवोकेट जनरल अनूप त्रिवेदी ने कहा कि याचिकाकर्ता हर दिन नमाज अदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों को इकट्ठा कर रहा है. इस मामले में उन्होंने घर की तस्वीरें भी पेश कीं.

उन्होंने आगे चिंता जताते हुए कहा कि अगर इस तरह की प्रथा को जारी रहने दिया जाता है तो यह उस क्षेत्र की शांति और सौहार्द्र के लिए खतरनाक होगा और व्यक्तिगत सुरक्षा की आड़ में इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती. उन्होंने आगे कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी अधिकारियों की है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की बाधा पैदा होने की आशंका है तो अधिकारियों के पास कार्रवाई करे के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचता.

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वहीं, कोर्ट में याचिकाकर्ता तारिक खान के वकील राजेश गौतम ने वचन दिया कि घर पर नमाज पढ़ने के लिए लोगों को इकट्ठा नहीं किया जाएगा. 

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हाई कोर्ट ने क्या फैसला दिया?

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया कि अगर याचिकाकर्ता अपने वादे से मुकरता है और उस संपत्ति पर नमाज अदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों को इकट्ठा करता है और इससे शांति और सौहार्द्र को खतरा होता है तो प्रशासन कानून के हिसाब से कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है. हाई कोर्ट ने घर के मालिक हसीन खान की सुरक्षा वापस लेने का भी आदेश दिया है.

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