लखनऊ में 'ट्विशा' जैसा केस : जिसकी विदाई के समय पिता ने पकड़े दूल्हे के पैर, 6 महीने में आई खुदकुशी की खबर

लखनऊ के ठाकुरगंज में 29 वर्षीय नवविवाहिता श्वेता सिंह की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस ने पति भूपेंद्र सिंह, सास-ससुर, देवर और ननद समेत 5 लोगों पर दहेज हत्या का केस दर्ज किया है. परिजनों का आरोप है कि शादी के दिन से ही 10 लाख रुपये और स्कॉर्पियो गाड़ी के लिए श्वेता को प्रताड़ित किया जा रहा था, उसकी नौकरी छुड़वा दी गई थी और ननद द्वारा सोशल मीडिया पर अपमानजनक स्टेटस लगाए जाते थे.

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Lucknow Dowry Case: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ठाकुरगंज इलाके में 29 वर्षीय नवविवाहिता श्वेता सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. श्वेता की शादी 6 महीने पहले ही हुई थी और अब ससुराल में उसका शव फंदे से लटका मिला है. मृतका के मायके वालों का आरोप है कि यह खुदकुशी नहीं, बल्कि दहेज के लोभ में रची गई एक सोची-समझी साजिश है. मायके वालों ने बकायदा इसके सबूत भी पेश किए हैं. जिसके आधार पर पुलिस ने मृतका के पति, ससुर, सास, देवर और ननद के खिलाफ  गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर लिया है. अहम ये है कि 6 महीने पहले शादी के दिन श्वेता की विदाई के वक्त भी दूल्हे ने दहेज को लेकर बड़ी मांग रख दी थी. जिसके बाद विवाद को शांत करने के लिए श्रेता के पिता ने दूल्हे के पैर तक पकड़ लिए थे. इस पूरे मामले की परिस्थितियां  भोपाल में हुए चर्चित 'ट्विशा केस' की याद दिलाती हैं, जहां शादी के कुछ ही समय बाद एक पढ़ी-लिखी लड़की को खुदकुशी करनी पड़ी.  

Lucknow Dowry Case: विदाई के वक्त दूल्हे को समझाते श्वेता सिंह के पिता. उस वक्त भी दहेज की बात लेकर विवाद हुआ था.

'विदाई के वक्त दामाद के पैर पकड़े, लेकिन दिल नहीं पिघला'

ठाकुरगंज के विश्वनगर मल्हाई टोला की रहने वाली श्वेता सिंह की शादी 22 नवंबर 2025 को लखनऊ के काशी विहार निवासी शिवम सिंह उर्फ भूपेंद्र सिंह से हुई थी. भूपेंद्र पेशे से पैथोलॉजी का संचालन करता है. श्वेता की बहनों ने बताया कि वह तीन बहनों में सबसे छोटी और पूरे परिवार की लाडली थी. पिता उमेश कुमार सिंह ने अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा धूमधाम से श्वेता का विवाह किया था, लेकिन शादी के मण्डप से ही खुशियों पर ग्रहण लग गया था. परिजनों के मुताबिक, शादी वाले दिन ही दूल्हे भूपेंद्र ने दहेज को लेकर एक बड़ी मांग रख दी थी. मांग तुरंत पूरी न होने पर वह इस कदर नाराज हुआ कि विदाई के समय श्वेता को उसके रिश्तेदारों से मिलने तक नहीं दिया जा रहा था. उस वक्त अपनी बेटी के भविष्य और विदाई को संपन्न कराने के लिए श्वेता के बुजुर्ग पिता ने दामाद भूपेंद्र के पैर तक पकड़ लिए थे, लेकिन उस वक्त भी उसकी बेरहमी और जिद कम नहीं हुई.

Lucknow Dowry Case: श्वेता की खुदकुशी की बात मायके वाले स्वीकार नहीं रहे. उनका तर्क है कि ये खुदकुशी नहीं बल्कि हत्या है.

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स्कॉर्पियो कार की मांग और जबरन नौकरी छुड़वाने का आरोप

शादी के शुरुआती दो महीनों के बाद से ही श्वेता के लिए ससुराल का माहौल पूरी तरह बदल गया. पिता उमेश कुमार सिंह के अनुसार, ससुराल पक्ष ने 10 लाख रुपये नकद और स्कॉर्पियो गाड़ी की मांग को लेकर श्वेता को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था. पति भूपेंद्र अक्सर मायके से मिले सोफे और बेड की निंदा करके उसे नीचा दिखाता था.

श्वेता एक आत्मनिर्भर और कामकाजी लड़की थी, लेकिन शादी तय होते ही भूपेंद्र ने उसकी नौकरी छुड़वा दी थी. श्वेता लगातार दोबारा नौकरी करने की इच्छा जता रही थी ताकि वह सम्मान के साथ अपने पैरों पर खड़ी हो सके, लेकिन ससुराल के लोग इसके सख्त खिलाफ थे.

घर के भीतर होने वाले इस मानसिक उत्पीड़न को बाहर लाकर श्वेता की ननद प्रिया सिंह सोशल मीडिया पर और हवा देती थी. ननद के व्हाट्सएप स्टेटस के कई ऐसे स्क्रीनशॉट सामने आए हैं, जिनमें श्वेता और उसके परिवार पर निशाना साधते हुए 'सूअर' और 'सूअर जैसे खानदान' जैसे बेहद अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था.

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'बातचीत के एक घंटे बाद ही आई मौत की खबर'

श्वेता के परिवार का कहना है कि उन्हें इस बात का गहरा अफसोस है कि जब श्वेता फोन पर उन्हें अपनी तकलीफें बताती थी, तो उन्होंने इसे सामान्य पारिवारिक अनबन मानकर एडजस्ट करने की सलाह दी. पिता उमेश सिंह ने बताया कि घटना वाले दिन, घटना से करीब 2 से ढाई घंटे पहले उनकी श्वेता से बात हुई थी और करीब 1 घंटे पहले उसकी बड़ी बहन से भी सामान्य बातचीत हुई थी. तब तक श्वेता के व्यवहार से ऐसा बिल्कुल नहीं लग रहा था कि वह कोई आत्मघाती कदम उठाने जा रही है. रविवार सुबह 11 बजे अचानक ससुराल पक्ष से फोन आया कि श्वेता ने खुदकुशी कर ली है. परिजन जब तक मौके पर पहुंचे, ससुराल वाले शव को फंदे से उतारकर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के ट्रॉमा सेंटर ले जा चुके थे. मृतका की बहन का आरोप है कि 24 मई को मुलाकात के दौरान श्वेता के शरीर पर कोई चोट नहीं थी, लेकिन ट्रॉमा सेंटर में उसकी लाश के पैरों पर गंभीर चोट और खून के निशान मिले हैं, जो सीधे तौर पर किसी संघर्ष की ओर इशारा करते हैं.

5 नामजद आरोपियों पर केस दर्ज, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार

इस पूरे मामले पर डीसीपी पश्चिम कमलेश कुमार ने बताया कि पीड़ित परिवार की तहरीर और उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर लिया है. पुलिस ने मृतका के पति भूपेंद्र सिंह, ससुर कौशलेंद्र सिंह, सास रचना सिंह, देवर बंटी सिंह और ननद प्रिया सिंह के खिलाफ संबंधित गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है. श्वेता के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है. डीसीपी ने साफ किया कि डॉक्टरों के पैनल द्वारा दी जाने वाली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मौत के सही कारणों का पता लगाया जाएगा, जिसके बाद इस मामले में आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.
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