पति की बेगुनाही के लिए टावर पर चढ़ी पत्नी, पुलिस जेल से लेकर आई तो नीचे उतरकर लग गई गले

UP News: कानपुर में पति को न्याय दिलाने के लिए मोबाइल टावर पर चढ़ी पत्नी! POCSO एक्ट में बंद पति की बेगुनाही के लिए सीमा ने दांव पर लगाई जान. मां-बेटी के विवाद और झूठी गवाही के दबाव की इस भावुक कर देने वाली कहानी को विस्तार से पढ़ें.

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पति आएगा, तभी उतरूंगी": कानपुर में सुहाग की खातिर टावर पर चढ़ी पत्नी, मिलाप देख रो पड़ा पूरा कानुपर शहर!
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  • कानपुर पुलिस कमिश्नर कार्यालय के मोबाइल टावर पर एक महिला न्याय की मांग करते हुए चढ़ गई
  • सीमा की मां ने अपने दामाद राकेश पर POCSO एक्ट के तहत झूठा मुकदमा दर्ज कराया था जिससे राकेश जेल में बंद है
  • कोर्ट में झूठी गवाही के दबाव में टूट चुकी सीमा ने पति की रिहाई तक नीचे उतरने से इनकार कर दिया था
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UP News: उत्‍तर प्रदेश के कानपुर पुलिस कमिश्नर कार्यालय में उस वक्त दिल दहला देने वाला मंजर देखने को मिला, जब एक पत्नी सीमा (बदला हुआ नाम) अपने पति राकेश को न्याय दिलाने के लिए मोबाइल टावर पर चढ़ गई. अक्टूबर 2025 से POCSO एक्ट के तहत जेल में बंद पति को बेगुनाह बताते हुए सीमा ने साफ कह दिया "पति आएगा, तभी नीचे उतरूंगी." 

दरअसल, यह मामला मां-बेटी के विवाद की भेंट चढ़े एक प्रेम विवाह का है, जहां मां ने दामाद पर केस दर्ज कराया था. कोर्ट में मां द्वारा झूठी गवाही के दबाव से टूटी सीमा टावर पर चढ़ गई. अंततः, पुलिस ने कोर्ट से पति को लाकर टावर के नीचे खड़ा किया, जिसके बाद बिलखती पत्नी नीचे उतरी और पति के गले लगकर बेहोश हो गई.

मंगलवार को कानपुर की चिलचिलाती धूप में जब पारा चढ़ रहा था, तब कमिश्नर दफ्तर के मोबाइल टावर पर एक महिला अपनी जिंदगी और मौत के बीच झूल रही थी. यह कोई सस्पेंस ड्रामा नहीं, बल्कि एक ऐसी पत्नी की चीख थी जिसका सिन्दूर कानूनी दांव-पेंचों की सलाखों के पीछे कैद है. 

कानपुर: सुहाग के लिए मौत से लड़ गई पत्नी; टावर पर चढ़ी तो जेल से लाना पड़ा पति, बिलखते हुए गले लगकर हुई बेहोश        Photo-NDTV

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प्यार, तकरार और फिर जेल की दीवार

राकेश और सीमा ने दुनिया से लड़कर एक-दूसरे का हाथ थामा था, लेकिन सीमा की मां को यह रिश्ता मंजूर न था. आरोप है कि मां ने रंजिश में राकेश पर POCSO एक्ट का मुकदमा दर्ज करा दिया. पिछले कई महीनों से राकेश जेल की कालकोठरी में अपनी बेगुनाही का इंतजार कर रहा था.

जब मां बनी ममता की दुश्मन

मंगलवार को कोर्ट में गवाही होनी थी. सीमा अपनी मां के सामने गिड़गिड़ाती रही, "मेरा सुहाग निर्दोष है, उसे बर्बाद मत करो." लेकिन जब मां ने फिर से उसे झूठी गवाही के लिए मजबूर किया, तो सीमा का सब्र टूट गया. न्याय की आस खो चुकी वह बेटी, कचहरी से सीधे पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंची और देखते ही देखते टावर के सबसे ऊपरी हिस्से पर जा बैठी.

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मिलाप का वो भावुक मंजर

कई घंटों तक पुलिस प्रशासन लाउडस्पीकर पर प्रयास करता रहा, लेकिन सीमा टस से मस न हुई. आखिरकार, कानून को एक पत्नी की जिद के आगे झुकना पड़ा. कोर्ट की अनुमति पर जब राकेश को पुलिस टावर के नीचे लाई, तो माहौल गमगीन हो गया. पति की एक आवाज सुनते ही टावर पर चढ़ी 'शेरनी' एक कमजोर पत्नी बनकर रो पड़ी. नीचे उतरते ही वह बदहवास होकर राकेश के गले लग गई और महीनों का दर्द आंसुओं बनकर बह निकला. फिलहाल सीमा का इलाज चल रहा है, लेकिन यह घटना सवाल छोड़ गई है कि क्या आपसी रंजिशों में किसी की जिंदगी को 'झूठे' केसों की बलि चढ़ाना जायज है? 

वकील  ओम प्रकाश गुप्ता ने बताया क‍ि आज जो पीड़िता थी गवाही देने के लिए कोर्ट आई थी. 1 साल पहले सच्चेडी पुल‍िस थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था. एक साल पहले यह घर से भाग गई थी. आज कोर्ट के बाहर मां ने कहा मेरे फेवर में गवाही देना. इसी बात पर मां बेटी में झगड़ा हो गया और यह कचहरी से निकलकर टॉवर में चढ़ गई. इस समय युवती की उम्र लगभग 21 साल है. यह मुकदमा एडीजे 25 की कोर्ट में चल रहा है.  

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