- कानपुर जिले में डिजिटल जनगणना 2027 की तैयारियों के तहत कर्मचारियों और शिक्षकों को ड्यूटी लगाई जा रही है
- सहायक अध्यापक जयप्रकाश शर्मा ने जनगणना ड्यूटी से छूट के लिए दिव्यांग प्रमाण पत्र के साथ डीएम के पास पहुंचे
- डीएम जितेन्द्र प्रताप सिंह ने शिक्षक को जनता की समस्याएं सुनने और समाधान करने की जिम्मेदारी दी
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में डिजिटल जनगणना 2027 की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. प्रशासन ने कर्मचारियों और शिक्षकों की ड्यूटी लगानी शुरू कर दी है. लेकिन ड्यूटी कटवाने के लिए तरह-तरह के बहाने बनाने का सिलसिला भी शुरू हो चुका है. बुधवार को कानपुर कलेक्ट्रेट में भी एक ऐसा ही मामला देखने को मिला. जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह के एक अनोखे फैसले ने न सिर्फ एक शिक्षक का नजरिया बदल दिया, बल्कि पूरे कलेक्ट्रेट के लिए मिसाल पेश की.
जनगणना ड्यूटी कटवाने डीएम के पास पहुंचे
मामला जनता दर्शन के दौरान का है. सहायक अध्यापक जयप्रकाश शर्मा अपनी जनगणना ड्यूटी कटवाने की अर्जी लेकर जिलाधिकारी के पास पहुंचे थे. उन्होंने तर्क दिया कि वह शारीरिक रूप से अनफिट हैं, और फील्ड में जाकर जनगणना का काम नहीं कर सकते. अपनी बात को पुख्ता करने के लिए उन्होंने दिव्यांग प्रमाण पत्र भी दिखाया और गुहार लगाई कि उन्हें इस जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया जाए.
आमतौर पर ऐसी अर्जियों पर अधिकारी या तो उसे खारिज कर देते हैं या जांच के लिए भेज देते हैं, लेकिन डीएम जितेन्द्र प्रताप सिंह ने कुछ अलग ही सोचा. उन्होंने बेहद गंभीर लहजे में शिक्षक से कहा कि अगर आप फील्ड में जाने में असमर्थ हैं, तो कोई बात नहीं. आप यहीं मेरे बगल में बैठिए और जो जनता अपनी समस्याएं लेकर आ रही है, उन्हें सुनिए और उनके समाधान में मेरी मदद कीजिए.
फरियादियों की दर्द सुन हो गए परेशान
डीएम ने तुरंत शिक्षक को अपने पास एक कुर्सी डलवाकर बैठा लिया. अगले ही पल शिक्षक के सामने फरियादियों का तांता लग गया. किसी का जमीन का विवाद था, किसी की पेंशन रुकी हुई थी, तो कोई पुलिस की कार्यप्रणाली से परेशान था. हर फरियादी अपनी समस्या को लेकर भावुक और उग्र था. एक के बाद एक आती शिकायतों और लोगों के दबाव के बीच सहायक अध्यापक जयप्रकाश शर्मा असहज होने लगे.
ये भी पढ़ें-बच्चे ने बार-बार मांगा रसगुल्ला तो उठाकर तंदूर में फेंका, यूपी के बस्ती की ये खौफनाक घटना आपको हिला देगी
शिक्षण बोले- मैं जनगणना ड्यूटी कर लूंगा
करीब 30 मिनट तक जनशिकायतों के इस अंबार को झेलने के बाद शिक्षक के पसीने छूट गए. उन्हें एहसास हुआ कि ऑफिस में बैठकर सैकड़ों लोगों की समस्याओं का समाधान करना, फील्ड में जाकर जनगणना करने से कहीं अधिक मानसिक दबाव वाला काम है. शिक्षक जयप्रकाश शर्मा ने तुरंत अपनी कुर्सी छोड़ी और जिलाधिकारी के सामने हाथ जोड़कर खड़े हो गए. उन्होंने कहा, साहब, एक साथ इतनी समस्याओं को सुनना और उनका निस्तारण करना बहुत कठिन काम है. मुझे अब जनगणना की ड्यूटी करने में कोई आपत्ति नहीं है, मैं उसे बखूबी निभाऊंगा.
सोशल मीडिया पर हो रही डीएम की तारीफ
इस दिलचस्प वाकये का असर सिर्फ उस शिक्षक पर ही नहीं, बल्कि वहां मौजूद अन्य कर्मचारियों पर भी पड़ा. जो लोग अपनी ड्यूटी कटवाने की अर्जी लेकर कतार में खड़े थे, वह डीएम का यह लाइव टेस्ट देखकर चुपचाप वहां से चले गए. जिलाधिकारी के इस कदम की सोशल मीडिया और प्रशासनिक गलियारों में जमकर तारीफ हो रही है. डीएम ने बिना किसी कठोर शब्द या कार्रवाई के यह संदेश दे दिया कि कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता और जिम्मेदारी से भागने के बजाय उसे स्वीकार करना ही बेहतर है. यह घटना अब कानपुर के साथ-साथ प्रदेश भर में चर्चा का विषय बनी हुई है.
ये भी पढ़ें-बच्चे ने बार-बार मांगा रसगुल्ला तो उठाकर तंदूर में फेंका, यूपी के बस्ती की ये घटना आपको हिला देगी













