कानपुर लैंबॉर्गिनी केस: कोर्ट का लग्‍जरी कार रिलीज करने का आदेश, चुकानी होगी 8 करोड़ से ज्‍यादा की रकम

लैंबॉर्गिनी कार की रिलीज को लेकर सुनवाई होनी थी, लेकिन एसीजेएम-7 की अदालत ने मामले की सुनवाई से इनकार कर दिया. अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत ने भी सुनवाई से मना कर दिया गया. आखिरकार प्रशासनिक आदेश के तहत मामला सीजेएम कोर्ट पहुंचा. 

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  • कानपुर के लैंबोर्गिनी एक्सीडेंट मामले में कोर्ट ने वाहन को रिलीज करने का आदेश दिया है.
  • दो अदालतों ने सुनवाई से इनकार करने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में मामला पहुंचा.
  • वाहन रिलीज के लिए आठ करोड़ तीस लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड जमा करने की शर्त रखी गई है.
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कानपुर:

कानपुर के चर्चित लैंबोर्गिनी कार एक्सीडेंट मामले में आखिरकार कोर्ट ने वाहन को रिलीज करने का आदेश दिया है. हालांकि, पूरे मामले की तरह ही कार की रिलीज प्रक्रिया भी नाटकीय घटनाक्रम से भरी रही. सुनवाई से पहले दो अदालतों द्वारा मामले को लेने से इनकार करने के बाद आखिरकार मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) सूरज मिश्रा की अदालत ने गाड़ी को छोड़ने का आदेश दिया. 

गौरतलब है कि करीब दो हफ्ते पहले कानपुर की वीआईपी रोड पर लैंबॉर्गिनी कार से एक हादसा हुआ था. कार तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा चला रहे थे. इस मामले में बाद में पुलिस ने शिवम मिश्रा को गिरफ्तार किया था, लेकिन जमानती धाराएं होने के कारण कोर्ट ने रिहा करते हुए पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी भी की थी. 

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दो अदालतों ने सुनवाई से किया इनकार 

शुक्रवार को लैंबॉर्गिनी कार की रिलीज को लेकर सुनवाई होनी थी, लेकिन एसीजेएम-7 की अदालत ने मामले की सुनवाई से इनकार कर दिया. इसके बाद केस को अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में भेजा गया, जहां से भी सुनवाई से मना कर दिया गया. आखिरकार प्रशासनिक आदेश के तहत मामला सीजेएम कोर्ट पहुंचा. 

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इन शर्तों के साथ कार को किया रिलीज 

सीजेएम सूरज मिश्रा की अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कार को सशर्त रिलीज करने का आदेश दिया. कोर्ट ने आठ करोड़ 30 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड जमा करने की शर्त रखी है. 

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साथ ही आदेश दिया गया कि कार को न तो बेचा जाएगा, न ट्रांसफर किया जाएगा और न ही उसके रंग-रूप में कोई बदलाव किया जाएगा. जरूरत पड़ने पर वाहन को जांच एजेंसी या अदालत के समक्ष पेश करना अनिवार्य होगा. शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में बॉन्ड की राशि राज्य सरकार के पक्ष में जब्त की जाएगी. 
 

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