यूपी में मिला गड़ा हुआ खजाना, बेतवा नदी के किनारे घूम रहे युवकों के हाथ लगा 'इतिहास का जैकपॉट'

Historic Coins Found: जिला मुख्यालय स्थित बेतवा नदी के बीच में राजा हमीरपुर देव द्वारा बनाया गया महल अब खंडहर में तब्दील हो चुका है. नदी की तलहटी में पुराने सिक्के मिलने खबर से इलाके में सनसनी है. वहां घूमने आए युवकों के हाथ लगे सिक्के बेशकीमती बताए जा रहे हैं. लोगों का दावा है कि नदी में मिले सिक्के 200 से 300 साल से भी अधिक पुराने हो सकते हैं.

विज्ञापन
Read Time: 5 mins
300-YEAR-OLD KING HAMIRDEV ERA PRICELESS COINS FOUND
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • हमीरपुर जिले के बेतवा नदी के बीचोंबीच स्थित खंडहर में 300 साल से अधिक पुराने प्राचीन सिक्के मिले हैं
  • सिक्के राजा हमीर देव के कालखंड के बताए जा रहे हैं और इन्हें नदी की तलहटी में दबा पाया गया था
  • स्थानीय लोगों द्वारा सिक्कों के बारे में प्रशासन को सूचना दी गई, ऐतिहासिक सिक्कों की वैज्ञानिक जांच जारी है
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

King Hamirdev Era Coins: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में बेतवा नदी के बीचोंबीच राजा हमीर देव के कालखंड में बने महल के खंडहर में बेशकीमती सिक्के मिले हैं. सिक्के खंडहर घूमने आए युवकों के हाथ लगे. नदी की तलहटी में दबे सिक्कों को देख युवकों की आंखें चमक उठी. सिक्कों की तलाश में युवक आगे बढ़े तो सिक्कों के मिलने का सिलसिला शुरू हो गया. सिक्के 300 से साल अधिक पुराने और कीमती बताए जा रहे हैं. 

जिला मुख्यालय स्थित बेतवा नदी के बीच में राजा हमीरपुर देव द्वारा बनाया गया महल अब खंडहर में तब्दील हो चुका है. नदी की तलहटी में पुराने सिक्के मिलने खबर से इलाके में सनसनी है. वहां घूमने आए युवकों के हाथ लगे सिक्के बेशकीमती बताए जा रहे हैं. लोगों का दावा है कि नदी में मिले प्राचीन सिक्के 200 से 300 साल से भी अधिक पुराने हो सकते हैं.

ये भी पढ़ें-गोरखपुर की अनोखी शादी: आईसीयू में भर्ती दुल्हन की भरी मांग, बारात लेकर अस्पताल पहुंच गया दूल्हा

बेशकीमती सिक्के मिलने की जानकारी फैलते ही खंडहर पर लोगों की भीड़ जुटने लगी

रिपोर्ट में मुताबिक बेतवा नदी में बेशकीमती सिक्के मिलने की जानकारी फैलते ही खंडहर पर लोगों की भीड़ जुटने लगी. स्थानीय लोग सिक्कों को ऐतिहासिक धरोहर मान रहे हैं. सिक्कों को सबसे पहले देखने वाले युवकों ने बताया कि उन्हें सिक्के मिट्टी में दबे हुए मिले. फिलहाल सिक्कों की वास्तविक उम्र और ऐतिहासिक महत्व की पुष्टि जांच के बाद हो सकेगी. मामले की सूचना प्रशासन और संबंधित विभागों तक पहुंचा दी गई है.

बेतवा नदी के तलहटी में मिले प्राचीन सिक्के

खंडहर घूमने आए युवकों को बेतवा नदी की तलहटी में दबे मिले चमकते हुए सिक्के 

दावा किया जा रहा है कि बेशकीमती सिक्के राजा हमीरदेव काल के हो सकते हैं. बेतवा नदी के बीचोंबीच स्थित खंडहर में तब्दील हो चुके महल के पास मिले सिक्के वहां घूमने पहुंचे युवकों के हाथ लगे थे. युवकों ने बताया कि वह सामान्य रूप से घूमने के लिए खंडहर पहुंचे थे, तभी उन्हें नदी की तलहटी में दबे हुए सिक्के मिले और खोजने पर सिक्के मिलने का सिलसिला शुरू हो गया.

ये भी पढ़ें-Dangerous Game: मोबाइल पर गेम खेलने के लिए मामा ने भांजे का गला रेत डाला, गेमिंग की लत को लेकर हुई थी कहासुनी

Advertisement
भारतीय खजाना निधि अधिनियम, 1878  के अनुसार, भूमि के भीतर छिपा हुआ कोई भी लावारिस या प्राचीन खजाना राष्ट्रीय संपत्ति माना जाता है. भीड़ द्वारा उसे लूटना या बिना बताए घर ले जाना अवैध और दंडनीय अपराध है और जो लोग सिक्के लेकर चले जाते हैं, स्थानीय पुलिस की मदद से प्रशासन लूटे हुए सिक्कों की रिकवरी भी करती है.

ये भी पढ़ें-'मुस्लिम बन जाओ, वरना वीडियो वायरल कर दूंगा', शादीशुदा महिला की खौफनाक आपबीती!

हमीरपुर जिले में खंडहर या जमीन की खुदाई के दौरान अक्सर मिलते हैं प्राचीन सिक्के

गौरतलब है हमीरपुर जिले में खंडहर या जमीन की खुदाई के दौरान अक्सर प्राचीन और ब्रिटिश कालीन सिक्के मिलने की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिन्हें देखने और जुटाने के लिए स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है. इतिहास में हमीरपुर जिले से राजा हमीर देव का बेहद गहरा संबंध बताया जाता है. हालांकि इतिहास में हमीर नाम से दो शासक रहे हैं, जिनका इतिहास सिक्कों और किलों से जुड़ा है. 

खंडहर में घूमने आए युवकों द्वारा नदी की तलहटी से बरामद किए गए सिक्के

बेतवा नदी से मिले सिक्के कटोच राजवंश के राजा हमीर चंद कालखंड के हो सकते हैं

1700 ईस्वी से 1740 ईस्वी तक शासन करने वाले कटोच राजवंश के राजा हमीर चंद (हमीरपुर.हिमाचल प्रदेश) ने एक ऐतिहासिक किले का निर्माण कराया था. लगभग 300 साल पुराने सिक्के उन्हीं के कालखंड के हो सकते हैं. दूसरे राजा हम्मीर देव चौहान (रणथंभोर, राजस्थान) का नाम सामने आता है, जो राजपूताना के चौहान वंश के अंतिम प्रतापी शासक माने जाते हैं. उनका कालखंड 1283–1301 ईस्वी का बताया जाता है.

Advertisement

ये भी पढ़ें-Driver Less Car: लुढ़कते हुए अचानक नहर में समा गई पार्किंग में खड़ी कार, चौंका देगा सीसीटीवी वीडियो

बेतवी नदी के तलहटी से निकाले गए बेशकीमती सिक्के

खुदाई या खंडहर में मिले प्राचीन सिक्कों की सूचना तुरंत प्रशासन को देना अनिवार्य है

उल्लेखीय है प्राचीन औऱ ऐतिहासिक खजाना या सिक्के मिलने पर कानूनी नियम है कि अगर किसी स्थान पर खुदाई या खंडहर में प्राचीन सिक्के मिलते हैं, तो भारतीय खजाना निधि अधिनियम, 1878 के तहत तुरंत स्थानीय पुलिस या जिला मजिस्ट्रेट को सूचित करना अनिवार्य है. प्रशासन प्राचीन सिक्कों को कब्जे में लेकर सील करता है. इसके बाद ASI की टीम सिक्कों के काल, धातु और ऐतिहासिक महत्व की वैज्ञानिक जांच करती है.

ये भी पढ़ें-छेड़छाड़ के आरोपी को ग्रामीणों ने पेड़ में बांधकर पीटा, पूछताछ में युवक मासूमियत से बोला, ‘बीवी ढूंढने आया था'

                                                                                                                                                                      -रविंद्र निगम की रिपोर्ट

Advertisement
Featured Video Of The Day
NEET UG 2026: 21 जून को होगी NEET की परीक्षा, NTA ने जारी की डेट | NEET UG Re-Exam Date | BREAKING