- गाजीपुर में विश्वकर्मा समाज की लड़की के शव मिलने के बाद हत्या का मुकदमा दर्ज कर 2 सवर्ण आरोपी गिरफ्तार किए गए.
- 22 अप्रैल को सपा नेताओं पर पथराव हुआ जब वे पीड़ित परिवार से मिलने करंडा थाना क्षेत्र के कटरिया गांव जा रहे थे.
- हिंसा के बाद पुलिस ने 240 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर दस को गिरफ्तार किया और इलाके में सुरक्षा बढ़ाई.
यूपी के गाजीपुर में 22 अप्रैल को सपा नेताओं पर पथराव हुआ. मामला एक विश्वकर्मा समाज की लड़की की मौत से जुड़ा था और सपा के नेता पीड़ित परिवार से मुलाकात करने जा रहे थे. इसी बीच उन पर पथराव हुआ और मामला यूपी की राजनीति में सत्ता बनाम विपक्ष की बड़ी लड़ाई का बन गया. समाजवादी पार्टी इस मामले को लेकर सीधे सरकार पर हमलावर है. वहीं पुलिस प्रशासन का दावा है कि अराजक तत्वों ने जानबूझकर रेप की अफवाह फैलाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की.
15 अप्रैल को नदी से मिला था लड़की का शव
दरअसल विश्वकर्मा समाज की एक लड़की का शव 15 अप्रैल को नदी से बरामद हुआ. पुलिस ने शव बरामद कर कानूनी कार्रवाई शुरू की. पुलिस ने आत्महत्या मानकर कार्रवाई शुरू की लेकिन मृतका के परिजनों ने हत्या की तहरीर दे दी. पुलिस ने हरिओम पांडे और अभिषेक पांडे पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर दोनों को गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया. दोनों आरोपी सवर्ण हैं. इसके बाद समाजवादी पार्टी ने अपना प्रतिनिधिमंडल गाजीपुर भेजा.
22 अप्रैल को गाजीपुर जाते समय सपा नेताओं पर हुआ था हमला
सपा का प्रतिनिधिमंडल 22 अप्रैल को गाजीपुर के करंडा थाना क्षेत्र के कटरिया गांव जा रहा था. तभी स्थानीय लोगों ने इस मामले के राजनीतीकरण का विरोध किया. विरोध तू-तू, मैं-मैं से शुरू होकर हिंसक हो गया. लोगों ने पत्थर फेंके. कुछ स्थानीय और कुछ सपा के नेता पत्थरबाजी में घायल हुए. पुलिसवालों को भी चोटें लगीं. स्थानीय लोगों का दावा है कि वो किसी भी राजनैतिक दल को गांव जाकर राजनीति करने नहीं देना चाहते हैं.
पुलिस ने 240 लोगों पर किया केस, 10 गिरफ्तार
गाजीपुर जिला प्रशासन ने इस हिंसा को लेकर करीब 40 नामजद और 200 अज्ञात के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कर दिया. इसमें ज़्यादातर सपा के नेता हैं. अब तक 10 की गिरफ़्तारी भी हो गई है. प्रशासन ने एहतियातन गांव में पीएसी और पुलिस की तैनाती गांव और आसपास में कर दी है. इस बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 29 अप्रैल को गाजीपुर जाकर पीड़ित परिवार और अपनी पार्टी के नेताओं से मिलने की घोषणा करके प्रशासन की बेचैनी बढ़ा दी है.
पीड़ित पक्ष हमें बुलाएगा तो जरूर जाएंगे, कोई रोक कर दिखाएंः अखिलेश
लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि पीड़ित परिवार हमें बुलाएगा तो हम जरूर जायेंगे, कोई रोक के दिखाए. उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार हमें बुला रहा है. उन्होंने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि जिन पुलिसवालों को ईंट से चोट लगी वो ईंट बीजेपी की थी. बीजेपी एक बेटी को न्याय नहीं दिला पा रही है. इस मामले में अखिलेश यादव की पार्टी के लोग भी बढ़ चढ़कर विरोध जता रहे हैं.
मृतका के पिता बोले- राजनैतिक दल मेरे घर आकर सियासत न करें
सपा प्रमुख भले कहें कि पीड़ित परिवार बुलाएगा तो ही वो जायेंगे लेकिन उनके दौरे के ऐलान के बाद मृतका के पिता ने बयान जारी कर कहा है कि राजनैतिक दल मेरे घर आकर सियासत ना करें. उन्होंने कहा कि जब पुलिस ने कार्रवाई कर दी है तो फिर अब राजनीति क्यों की जा रही है? उन्होंने कहा कि जिनके ख़िलाफ़ उन्होंने शिकायत की उन्हें पुलिस ने गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया तो अब नेता राजनीति क्यों कर रहे हैं?
बीजेपी-सपा ही नहीं, कांग्रेस भी लड़ाई में कूदी
इस मामले में सिर्फ़ बीजेपी बनाम सपा वाला माहौल नहीं है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी गाजीपुर की घटना को लेकर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने दावा किया कि पीड़िता का रेप और उसके बाद हत्या की गई है. राहुल गांधी ने गाजीपुर की घटना को हाथरस, कठुआ और उन्नाव से जोड़ते हुए कहा कि हर बार वही चेहरा - पीड़िता दलित, पिछड़ी, आदिवासी, गरीब. हर बार वही सच्चाई - अपराधी को संरक्षण, पीड़ित को प्रताड़ना. हर बार वही चुप्पी- सत्ता की, जिन्हें बोलना चाहिए था.
गाजीपुर की घटना पर राहुल गांधी का एक्स पोस्ट.
पीड़ित का गांव बना छावनी, अखिलेश पहुंचे और बढ़ेगा मामला
फिलहाल यूपी की सियासत में गाजीपुर की घटना को लेकर जमकर बयानबाजी जारी है. प्रशासन के बड़े अधिकारी गाजीपुर में डेरा डाल बैठ गए हैं. पीड़ित के गांव को छावनी बना दिया गया है. बीजेपी विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगा रही. वहीं विपक्ष बीजेपी और पुलिस की मिलीभगत का आरोप लगाकर सीधा हमला बोल रहा है. अब देखना होगा कि क्या अखिलेश यादव गाजीपुर जाएंगे और अगर गए तो क्या पीड़ित परिवार उनसे मुलाकात करेगा?













