- कुर्बानी केवल आर्थिक रूप से सक्षम, बालिग और स्थायी मुसलमानों पर शरीयत के अनुसार अनिवार्य है-मौलाना निजामी
- कुर्बानी के लिए खरीदा गया जानवर पूरी तरह हलाल कमाई से होना चाहिए, हराम कमाई से कुर्बानी मान्य नहीं होती
- प्रशासन द्वारा प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी न करें और सरकारी नियमों का पूर्ण सम्मान करते हुए कुर्बानी करें
Qurbani Controversy: देशभर में बकरीद (ईद-उल-अजहा) की तैयारियां शुरू होते ही कुर्बानी को लेकर तरह-तरह की बयानबाजियां भी सामने आने लगती हैं. इस संवेदनशील माहौल के बीच इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के प्रवक्ता मौलाना सुफियान निजामी ने शरिया के नियमों और नागरिक कर्तव्यों का हवाला देते हुए एक बेहद समझदारी भरा बयान जारी किया है. उन्होंने साफ कहा है कि इबादत वही कुबूल होती है, जिससे किसी दूसरे को तकलीफ न पहुंचे.
मौलाना सुफियान निजामी ने स्पष्ट किया कि शरीयत-ए-मुतहिरा यानी इस्लाम के पाक कानून के मुताबिक, कुर्बानी हर 'साहिब-ए-निसाब' (आर्थिक रूप से सक्षम), बालिग और मुकीम मुसलमान पर वाजिब (अनिवार्य) है. इसके साथ ही इस्लाम धर्म ने इसके लिए बेहद कड़े और स्पष्ट नियम तय किए हैं. सबसे पहली शर्त यह है कि कुर्बानी के लिए खरीदा गया जानवर पूरी तरह से 'हलाल' यानी ईमानदारी की कमाई के पैसों से लिया गया हो. धोखे या हराम की कमाई से की गई कुर्बानी मान्य नहीं होती.
सरकारी नियमों का करें पालन और प्रतिबंधित जानवरों से रहें दूरी
मौलाना ने देश के सभी मुसलमानों से अपील की है कि वे कानून का पूरी तरह सम्मान करें. प्रशासन की ओर से जिन जानवरों की कुर्बानी पर कानूनी पाबंदी लगाई गई है, उनकी कुर्बानी किसी भी सूरत में न की जाए. उन्होंने कहा कि इस संबंध में उलेमा-ए-किराम और खास तौर पर इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया की तरफ से यह पुरजोर अपील की जा रही है कि कानून के दायरे में रहकर ही इस धार्मिक फरीजे को पूरा किया जाए.
स्वच्छता को ध्यान में रखकर वेस्टेज का सही से करें निपटारा
उन्होंने कुरबानी के बाद निकलने वाले कचरे के बारे में भी लोगों अहम सलाह दी है. कुर्बानी के दौरान साफ-सफाई को लेकर मौलाना निजामी ने विशेष हिदायत देते हुए कहा कि हमारी इबादत से किसी भी गैर मुस्लिम या पड़ोसी को कोई दिक्कत या परेशानी नहीं होनी चाहिए. लिहाजा, कुर्बानी बंद जगहों या पर्दों के पीछे की जाए, ताकि की किसी की भावनाए आहत न हो. साथ ही कुर्बानी के बाद निकलने वाले वेस्टेज (अवशेषों) को सड़कों या खुले में फेंकने के बजाय नगर निगम या सरकार द्वारा चिह्नित (डिफाइंड) जगहों पर ही डिस्पोज ऑफ किया जाए.
प्रशासन से भी की लोगों को परेशान नहीं करने की अपील
मौलाना निजामी ने मुंबई के मीरा रोड जैसे इलाकों में पैदा होने वाले हालिया तनावों का जिक्र करते हुए मौलाना ने कहा कि जहां भी पारंपरिक तौर पर सालों से कुर्बानी होती आ रही है, वहां की परंपरा को डिस्टर्ब नहीं किया जाना चाहिए. अगर प्रशासन यह भरोसा देता है कि पुरानी परंपराओं को नहीं रोका जाएगा, तो स्थानीय प्रशासन को जमीन पर भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शांतिपूर्वक कुर्बानी दे रहे लोगों के सामने कोई अड़चन या परेशानी खड़ी न की जाए.
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बयान के अंत में मौलाना सुफियान निजामी ने कौम को याद दिलाया कि देश में अमन, शांति और भाईचारा बनाए रखना हिंदू और मुसलमान दोनों का सबसे पहला और सबसे बड़ा 'फरीजा' (कर्तव्य) है. हम सभी को मिलकर अपने मुल्क की गंगा-जमुनी तहजीब की हिफाजत करनी चाहिए और ऐसी किसी भी बयानबाजी या हरकत से बचना चाहिए, जिससे देश का माहौल खराब हो.














