इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को धनंजय सिंह ने दी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, जारी किया गया नोटिस

वाराणसी के पहले 'ओपन शूटआउट' के रूप में चर्चित नदेसर टकसाल शूटआउट से जुड़े इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि असामाजिक गतिविधियों को रोकना राज्य का पवित्र दायित्व है और कोई भी व्यक्ति राज्य के कार्य को हड़पने का हकदार नहीं है.

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इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
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  • वाराणसी के नदेसर टकसाल शूटआउट मामले में पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है
  • नदेसर टकसाल शूटआउट 2002 में हुआ था जिसमें धनंजय सिंह की गाड़ी पर जानलेवा हमला हुआ था और कई लोग घायल हुए थे
  • सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर 20 फरवरी को अगली सुनवाई का आदेश दिया है
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प्रयागराज:

वाराणसी के पहले 'ओपन शूटआउट' के रूप में चर्चित नदेसर टकसाल शूटआउट का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. इस शूटआउट में जौनपुर से पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने गैंगस्टर मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा अपील खारिज होने के बाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. धनंजय सिंह की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है. इस मामले में अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी. यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस विपुल एम पंचोली की डिविजन बेंच ने दिया है. 

बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट से पूर्व सांसद धनंजय सिंह को एक बड़ा झटका लगा था. चार दिसंबर 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2002 के जानलेवा हमले से जुड़े गैंगस्टर एक्ट मामले में आरोपियों को ट्रायल कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका को सही नहीं मानते हुए खारिज कर दिया था. 

वाराणसी के पहले 'ओपन शूटआउट' के रूप में चर्चित नदेसर टकसाल शूटआउट से जुड़े इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि असामाजिक गतिविधियों को रोकना राज्य का पवित्र दायित्व है और कोई भी व्यक्ति राज्य के कार्य को हड़पने का हकदार नहीं है. पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने 2002 में अपने ऊपर हुए जानलेवा हमला मामले में यूपी गैंगस्टर एवं असामाजिक क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 के तहत चार आरोपियों को वाराणसी के स्पेशल जज, गैंगस्टर एक्ट द्वारा बरी किए जाने के आदेश (29 अगस्त 2025) को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. 

यह मामला लगभग 23 साल पुराना है. तारीख थी 4 अक्टूबर 2002. वाराणसी के कैंट थाना क्षेत्र के नदेसर स्थित टकसाल सिनेमा हॉल के पास तत्कालीन विधायक धनंजय सिंह की गाड़ी पर जान से मारने की नीयत से अंधाधुंध फायरिंग की गई थी, जिसमें AK-47 जैसे ऑटोमेटिक हथियारों के इस्तेमाल की बात सामने आई थी. यह वाराणसी का पहला 'ओपन शूटआउट' था. इस घटना में धनंजय सिंह, उनके गनर और ड्राइवर समेत अन्य लोग घायल हुए थे. 

इस मामले में बाहुबली विधायक अभय सिंह, एमएलसी विनीत सिंह, संदीप सिंह, संजय सिंह, विनोद सिंह और सतेंद्र सिंह उर्फ बबलू समेत अन्य अज्ञात के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया था. 29 अगस्त 2025 को वाराणसी के स्पेशल जज, गैंगस्टर एक्ट सुशील कुमार खरवार ने साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए चारों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया था, जिसे धनंजय सिंह ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी अपील को खारिज कर दिया था और ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था. हाईकोर्ट से झटका लगने के बाद अब धनंजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.

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