यूपी के पूर्व DGP प्रशांत कुमार की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा स्पष्टीकरण; जानें मामला

UP Former DGP Prashant Kumar Case: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्रिमिनल रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यूपी के पूर्व चर्चित IPS और पूर्व ADG कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार को व्यक्तिगत नोटिस जारी किया है.

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IPS प्रशांत कुमार को 48 घंटे में भेजा जाएगा नोटिस (फाइल फोटो).

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahbad High Court) ने एक क्रिमिनल रिट याचिका पर सुनवाई करते यूपी के पूर्व चर्चित आईपीएस व पूर्व डीजीपी प्रशांत कुमार (IPS & Former DGP Prashant Kumar) को व्यक्तिगत नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है. याची के अधिवक्ता ने शुक्रवार सुबह मामले को मेंशन कर इसकी अर्जेंसी बताते हुए कोर्ट से सुनवाई की मांग की थी, जिसके बाद कोर्ट ने मांग को स्वीकार करते हुए इस मामले में सुनवाई की. कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आदेश दिया कि यूपी के पूर्व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार को उनके वर्तमान निवास स्थान पर नोटिस जारी किया जाए.

यह नोटिस यूपी के पुलिस महानिदेशक के माध्यम से भेजा जाएगा. कोर्ट ने आदेश दिया है कि पूर्व एडीजी प्रशांत कुमार जारी किए गए नोटिस पर अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करें. इसमें वो अपने आधिकारिक पत्र के संबंध में स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें, जिसके पैराग्राफ संख्या एक में आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया है. इस मामले में अगली सुनवाई 28 अप्रैल को को होगी. यह आदेश जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिविजन बेंच ने याची अमित कुमार सिंह उर्फ सोनू द्वारा याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है.

वर्तमान डीजीपी के जरिए जाएगा नोटिस

याचिकाकर्ता पेशे से अधिवक्ता अमित कुमार सिंह उर्फ सोनू की तरफ से दाखिल क्रिमिनल रिट याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है. इस मामले में शुक्रवार को भी कोर्ट ने कहा है कि उनको यह नोटिस उनके वर्तमान निवास स्थान पर यूपी के डीजीपी के माध्यम से भेजा जाएगा.

कोर्ट का यह रुख पूर्व एडीजी प्रशांत कुमार द्वारा जारी एक आधिकारिक संचार में इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर है. हाईकोर्ट ने उस पत्र के पैराग्राफ संख्या एक में प्रयुक्त शब्दावली को "आपत्तिजनक" माना है. इसके मद्देनजर कोर्ट ने पूर्व एडीजी को अपने वर्तमान निवास के पते के माध्यम से कारण बताओ हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें उन्हें उस आपत्तिजनक भाषा के संबंध में स्पष्टीकरण देना होगा.

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48 घंटे के अंदर नोटिस भेजें

कोर्ट ने न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम), लखनऊ को आदेश दिया है कि वो 48 घंटों के अंदर यूपी के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के माध्यम से यह नोटिस तामील कराएं. डीजीपी नोटिस पूर्व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक को उनके वर्तमान आवास पर भेजेंगे. कोर्ट ने रजिस्ट्रार (कम्प्लायंस) को भी निर्देश दिया गया है कि वो 48 घंटों के अंदर सीजेएम लखनऊ को इस आदेश की जानकारी प्रेषित करें.

बता दें कि यूपी के पूर्व डीजीपी प्रशांत कुमार को सरकार द्वारा दिसंबर 2025 में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है.

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