'अवैध हिरासत' से तुरंत रिहा करें... नोएडा में इंजीनियर की मौत मामले में हाईकोर्ट ने बिल्डर को लेकर दिया आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में गिरफ्तार बिल्डर अभय कुमार को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने अभय कुमार द्वारा दाखिल हैबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका को मंजूर करते हुए उनकी गिरफ्तारी और रिमांड को नियमों के विरुद्ध माना है.

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  • इलाहाबाद HC ने नोएडा में इंजीनियर की मौत के मामले में बिल्डर अभय कुमार को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है
  • कोर्ट ने अभय कुमार की हैबियस कॉर्पस याचिका को मंजूर करते हुए गिरफ्तारी और रिमांड को नियमों के विरुद्ध माना है
  • नोएडा में गहरे गड्ढे में गिरने से युवराज मेहता की मौत हुई, जिसमें गड्ढा नियमों का उल्लंघन कर खोदा गया था
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प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में गिरफ्तार बिल्डर अभय कुमार को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने अभय कुमार द्वारा दाखिल हैबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका को मंजूर करते हुए उनकी गिरफ्तारी और रिमांड को नियमों के विरुद्ध माना है. यह फैसला जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की डिवीजन बेंच ने सुनाया. कोर्ट ने अपने आदेश कहा, "संबंधित अथॉरिटी याचिकाकर्ता अभय कुमार को तुरंत रिहा करे. सरकारी वकील (AGA) इस आदेश की जानकारी तत्काल अधिकारियों को दें और रिहाई के लिए सर्टिफाइड कॉपी का इंतज़ार न करें." 


क्या था पूरा मामला?

बीती 16 जनवरी की रात नोएडा के सेक्टर-150 में एक दर्दनाक हादसा हुआ था. सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार एक गहरे गड्ढे में गिर गई थी, जिससे उनकी मौत हो गई. एसआईटी (SIT) की जांच और नोएडा प्राधिकरण की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि वह गड्ढा नियमों का उल्लंघन करके खोदा गया था. इस मामले में पुलिस ने बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार किया था.

कोर्ट में याचिकाकर्ता की दलीलें

बिल्डर अभय कुमार की ओर से सीनियर एडवोकेट मनु शर्मा और उनकी टीम ने कोर्ट में पक्ष रखा. बचाव पक्ष की मुख्य दलीलें निम्नलिखित थीं.  गिरफ्तारी के समय सुप्रीम कोर्ट द्वारा मिहिर राजेश बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया. 

नियमों की अनदेखी

गिरफ्तारी मेमो के क्लॉज 13 की अनिवार्य आवश्यकताओं को पूरा नहीं किया गया और न ही गिरफ्तारी से पहले याची को इसकी जानकारी दी गई. नोएडा सीजेएम द्वारा 20 और 21 जनवरी 2026 को दिए गए रिमांड आदेशों को चुनौती देते हुए उन्हें शून्य और अमान्य घोषित करने की मांग की गई.

हाईकोर्ट का कड़ा रुख

कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि यह केस हाईकोर्ट के पूर्व के फैसले (उमंग रस्तोगी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य) के दायरे में आता है। कोर्ट ने माना कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में नियमों की स्पष्ट अनदेखी की गई है. गिरफ्तारी मेमो के क्लॉज 13 का उल्लंघन हुआ है, जिससे हिरासत अवैध हो जाती है.
 

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