- शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ विवाद के बाद बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दिया था.
- अलंकार अग्निहोत्री ने आज वाराणसी में शंकराचार्य से मुलाकात कर केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध जताया.
- उन्होंने एससी-एसटी एक्ट को देश का सबसे बड़ा काला कानून बताया और इसके विरुद्ध 6 फरवरी तक अल्टीमेटम दिया है.
प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ जो कुछ हुआ, उससे बड़ा बवाल मचा है. अविमुक्तेश्वरानंद और यूजीसी के रेगुलेशन के खिलाफ बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. अलंकार के इस्तीफे पर बड़ा बवाल मचा. अब रविवार को अलंकार अग्निहोत्री वाराणसी स्थित शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के मठ पहुंचे, जहां उन्होंने शंकराचार्य से मुलाकात कर वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों पर विस्तृत चर्चा की. इस दौरान अलंकार अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार की नीतियों, विशेष रूप से एससी-एसटी एक्ट और प्रस्तावित यूजीसी रेगुलेशन को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया.
IIT BHU से पढ़े हैं अलंकार अग्निहोत्री
अलंकार अग्निहोत्री ने बताया कि इससे पूर्व प्रयागराज में शंकराचार्य जी द्वारा उन्हें आमंत्रण दिया गया था, लेकिन समयाभाव के चलते वे वहां नहीं पहुंच सके. बाद में शंकराचार्य के वाराणसी आगमन पर आज उन्हें मुलाकात का अवसर मिला. उन्होंने कहा कि वाराणसी से उनका व्यक्तिगत जुड़ाव है क्योंकि उन्होंने आईआईटी बीएचयू से शिक्षा प्राप्त की है, इसलिए यहां आना उनके लिए भावनात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण रहा.
एससी-एसटी एक्ट को बताया “काला कानून”
शंकराचार्य से मुलाकात के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने 1989 में लागू एससी-एसटी एक्ट को देश का “सबसे बड़ा काला कानून” करार दिया. उनका दावा था कि इस कानून के अंतर्गत दर्ज लगभग 95 प्रतिशत मामले फर्जी होते हैं, जिनके कारण समाज के बड़े वर्ग को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है. उन्होंने कहा कि देश की लगभग 85 प्रतिशत आबादी इस कानून से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित है और यदि सरकार ने जनभावनाओं का सम्मान नहीं किया, तो इसका गंभीर परिणाम होगा.
6 फरवरी तक अल्टीमेटम, 7 फरवरी को राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चेतावनी
अलंकार अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 6 फरवरी 2026 तक एससी-एसटी एक्ट को किसी भी स्थिति में वापस नहीं लिया गया, तो 7 फरवरी को पूरे देश से लोग दिल्ली कूच करेंगे. उन्होंने इसे “महाआंदोलन” बताते हुए कहा कि यह जनता की इच्छा (Will of the People) का प्रतीक होगा और सरकार का वर्तमान जनादेश समाप्त हो चुका है.
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से मिले अलंकार अग्निहोत्री.
यूजीसी रेगुलेशन पर भी उठाए सवाल
उन्होंने यूजीसी के हालिया रेगुलेशन को लेकर कहा कि इससे केंद्र सरकार की मंशा उजागर होती है. उनका आरोप था कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच की राजनीतिक लड़ाई में ओबीसी और जनरल वर्ग को जानबूझकर निशाना बनाया गया है, जिससे सामाजिक तनाव और टकराव की स्थिति पैदा हो रही है. उन्होंने इसे “अप्रत्यक्ष रूप से सिविल वॉर जैसी स्थिति बनाने की कोशिश” बताया.
योगी बनाम मोदी पर स्पष्ट रुख
जब उनसे पूछा गया कि उनका विरोध उत्तर प्रदेश सरकार से है या केंद्र सरकार से, तो अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि मौजूदा सिस्टम की नीतियों से है. उन्होंने कहा कि कम से कम प्रदेश सरकार तक अपनी बात रखी जा सकती है, लेकिन केंद्र सरकार जनता की आवाज़ से पूरी तरह कट चुकी है.
केंद्र सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप
अलंकार अग्निहोत्री ने ED, CBI और इनकम टैक्स जैसी केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि ठेकों में भारी भ्रष्टाचार हो रहा है और 30 प्रतिशत तक कमीशनखोरी के कारण विकास कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में बड़े घोटालों का खुलासा हो सकता है.
शंकराचार्य से आशीर्वाद को बताया संयोग
शंकराचार्य से मुलाकात को लेकर उन्होंने कहा कि यह किसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि एक शुभ संयोग है. लोकतांत्रिक प्रक्रिया में आगे बढ़ने के लिए उन्होंने किसी विशेष धार्मिक समर्थन की योजना नहीं बनाई थी.
गौ माता आंदोलन पर टिप्पणी से किया परहेज
गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने के शंकराचार्य के आंदोलन पर सवाल पूछे जाने पर अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि यह शंकराचार्य जी का विषय है और फिलहाल उनका मुख्य फोकस एससी-एसटी एक्ट और यूजीसी रेगुलेशन पर है.
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